Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسْتَعْجِلُ بِهَا: इसकी (क़यामत के आने की) जल्दी मचाना, उसे जल्दी लाने की मांग करना।
- مُشْفِقُونَ: डरने वाले, खौफ़ खाने वाले।
- يُمَارُونَ: झगड़ा करने वाले, विवाद और जिद्दो-जहद करने वाले।
- ضَلَالٍ بَعِيدٍ: सच्चाई से बहुत दूर की गुमराही।
तफसीर:
यह आयत क़यामत के दिन और उसके आने के मामले में लोगों की दो किस्मों का ज़िक्र करती है। पहली किस्म उन लोगों की है जो क़यामत पर ईमान नहीं रखते। ये लोग मज़ाक़ और ठट्ठे के तौर पर उसकी जल्दी मचाते हैं और कहते हैं: "ये क़यामत कब आएगी?" उनका ये अंदाज़ इसलिए है क्योंकि वे हिसाब, इनाम और अज़ाब पर यक़ीन नहीं रखते। वे इसे एक दूर की कल्पना समझते हैं, इसलिए उसका मज़ाक़ उड़ाते हैं।
दूसरी किस्म उन मोमिनीन की है जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं। उनके दिल क़यामत के ख़ौफ़ से काँपते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वह दिन बड़ी सख्तियों और मुश्किलों का दिन होगा। वे उस दिन के हालात से डरते हैं और अपने आमाल की फ़िक्र में रहते हैं। वे पूरे यक़ीन के साथ जानते हैं कि क़यामत का आना हक़ है, इसमें कोई शक नहीं। यही ईमान उन्हें अमल की तरफ़ राग़िब करता है और ग़फ़लत से बचाता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! जो लोग क़यामत के बारे में झगड़ा करते हैं, उसके आने को बातिल ठहराने के लिए जिद्दो-जहद करते हैं, वे यक़ीनन सच्चाई से बहुत दूर की गुमराही में हैं।" यानी उनकी ये मुनाज़रत और शक-शुबहा उन्हें हक़ से दूर ले गई है, और वे अंधेरे में भटक रहे हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि क़यामत पर ईमान ही असली नजात का ज़रिया है। जो लोग उस पर ईमान रखते हैं, वे दुनिया में नेक अमल करते हैं और आख़िरत की फ़िक्र में रहते हैं। यही ईमान उन्हें गुनाहों से रोकता है और अच्छे कामों की तरफ़ बढ़ाता है। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो क़यामत के दिन से डरते हैं और उसकी तैयारी करते हैं। हमें चाहिए कि हम उन लोगों की तरह न बनें जो मज़ाक़ उड़ाते हैं, बल्कि उन मोमिनीन की तरह बनें जो ख़ौफ़ और यक़ीन के साथ अमल करते हैं। याद रखें, क़यामत ज़रूर आएगी, और उस दिन हर शख्स को उसके अमल का बदला मिलेगा।
📜 आयत 16-20 — सूरा अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 18
सूरा अश-शूरा आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर ये ग़फ़लत कैसी) जो लोग इस पर ईमान नहीं…सूरा आयत 18/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
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