अश-शूरा · 18/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
يَسْتَعْجِلُ بِهَا الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِهَا ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا مُشْفِقُونَ مِنْهَا وَيَعْلَمُونَ أَنَّهَا الْحَقُّ ۗ أَلَا إِنَّ الَّذِينَ يُمَارُونَ فِي السَّاعَةِ لَفِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ ۝١٨
Yasta`jilu bihal lazeena laa yu`minoona bihaa wallazeena aamanoo mushfiqoona minhaa wa ya`lamoona annahal haqq; alaaa innal lazeena yumaaroona fis Saa`ati lafee dalaalim ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
(फिर ये ग़फ़लत कैसी) जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते वह तो इसके लिए जल्दी कर रहे हैं और जो मोमिन हैं वह उससे डरते हैं और जानते हैं कि क़यामत यक़ीनी बरहक़ है आगाह रहो कि जो लोग क़यामत के बारे में शक़ किया करते हैं वह बड़े परले दर्जे की गुमराही में हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَعْجِلُ بِهَا: इसकी (क़यामत के आने की) जल्दी मचाना, उसे जल्दी लाने की मांग करना।
  • مُشْفِقُونَ: डरने वाले, खौफ़ खाने वाले।
  • يُمَارُونَ: झगड़ा करने वाले, विवाद और जिद्दो-जहद करने वाले।
  • ضَلَالٍ بَعِيدٍ: सच्चाई से बहुत दूर की गुमराही।

तफसीर:

यह आयत क़यामत के दिन और उसके आने के मामले में लोगों की दो किस्मों का ज़िक्र करती है। पहली किस्म उन लोगों की है जो क़यामत पर ईमान नहीं रखते। ये लोग मज़ाक़ और ठट्ठे के तौर पर उसकी जल्दी मचाते हैं और कहते हैं: "ये क़यामत कब आएगी?" उनका ये अंदाज़ इसलिए है क्योंकि वे हिसाब, इनाम और अज़ाब पर यक़ीन नहीं रखते। वे इसे एक दूर की कल्पना समझते हैं, इसलिए उसका मज़ाक़ उड़ाते हैं।

दूसरी किस्म उन मोमिनीन की है जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं। उनके दिल क़यामत के ख़ौफ़ से काँपते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वह दिन बड़ी सख्तियों और मुश्किलों का दिन होगा। वे उस दिन के हालात से डरते हैं और अपने आमाल की फ़िक्र में रहते हैं। वे पूरे यक़ीन के साथ जानते हैं कि क़यामत का आना हक़ है, इसमें कोई शक नहीं। यही ईमान उन्हें अमल की तरफ़ राग़िब करता है और ग़फ़लत से बचाता है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! जो लोग क़यामत के बारे में झगड़ा करते हैं, उसके आने को बातिल ठहराने के लिए जिद्दो-जहद करते हैं, वे यक़ीनन सच्चाई से बहुत दूर की गुमराही में हैं।" यानी उनकी ये मुनाज़रत और शक-शुबहा उन्हें हक़ से दूर ले गई है, और वे अंधेरे में भटक रहे हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि क़यामत पर ईमान ही असली नजात का ज़रिया है। जो लोग उस पर ईमान रखते हैं, वे दुनिया में नेक अमल करते हैं और आख़िरत की फ़िक्र में रहते हैं। यही ईमान उन्हें गुनाहों से रोकता है और अच्छे कामों की तरफ़ बढ़ाता है। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो क़यामत के दिन से डरते हैं और उसकी तैयारी करते हैं। हमें चाहिए कि हम उन लोगों की तरह न बनें जो मज़ाक़ उड़ाते हैं, बल्कि उन मोमिनीन की तरह बनें जो ख़ौफ़ और यक़ीन के साथ अमल करते हैं। याद रखें, क़यामत ज़रूर आएगी, और उस दिन हर शख्स को उसके अमल का बदला मिलेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अश-शूरा

16وَالَّذِينَ يُحَاجُّونَ فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا اسْتُجِيبَ لَهُ حُجَّتُهُمْ دَاحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ
और उसी की तरफ लौट कर जाना है और जो लोग उसके मान लिए जाने के बाद ख़ुदा के बारे में (ख्वाहमख्वाह) झगड़ा करते हैं उनके परवरदिगार के नज़दीक उनकी दलील लग़ो बातिल है और उन पर (ख़ुदा का) ग़ज़ब और उनके लिए सख्त अज़ाब है
17اللَّهُ الَّذِي أَنزَلَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ وَالْمِيزَانَ ۗ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ قَرِيبٌ
ख़ुदा ही तो है जिसने सच्चाई के साथ किताब नाज़िल की और अदल (व इन्साफ़ भी नाज़िल किया) और तुमको क्या मालूम यायद क़यामत क़रीब ही हो
18يَسْتَعْجِلُ بِهَا الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِهَا ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا مُشْفِقُونَ مِنْهَا وَيَعْلَمُونَ أَنَّهَا الْحَقُّ ۗ أَلَا إِنَّ الَّذِينَ يُمَارُونَ فِي السَّاعَةِ لَفِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
(फिर ये ग़फ़लत कैसी) जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते वह तो इसके लिए जल्दी कर रहे हैं और जो मोमिन हैं वह उससे डरते हैं और जानते हैं कि क़यामत यक़ीनी बरहक़ है आगाह रहो कि जो लोग क़यामत के बारे में शक़ किया करते हैं वह बड़े परले दर्जे की गुमराही में हैं
19اللَّهُ لَطِيفٌ بِعِبَادِهِ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْقَوِيُّ الْعَزِيزُ
और ख़ुदा अपने बन्दों (के हाल) पर बड़ा मेहरबान है जिसको (जितनी) रोज़ी चाहता है देता है वह ज़ोर वाला ज़बरदस्त है
20مَن كَانَ يُرِيدُ حَرْثَ الْآخِرَةِ نَزِدْ لَهُ فِي حَرْثِهِ ۖ وَمَن كَانَ يُرِيدُ حَرْثَ الدُّنْيَا نُؤْتِهِ مِنْهَا وَمَا لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِن نَّصِيبٍ
जो शख़्श आखेरत की खेती का तालिब हो हम उसके लिए उसकी खेती में अफ़ज़ाइश करेंगे और दुनिया की खेती का ख़ास्तगार हो तो हम उसको उसी में से देंगे मगर आखेरत में फिर उसका कुछ हिस्सा न होगा
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अनुवाद — अश-शूरा 18

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Tuesday, August 18, 2026

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