अश-शूरा · 32/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
وَمِنْ آيَاتِهِ الْجَوَارِ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ ۝٣٢
Wa min Aayaatihil ja waarifil bahri kal a`lam
📖 हिंदी अर्थ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الجَوَارِ: चलने वाली (नावें/जहाज़)
  • كَالأَعْلَامِ: पहाड़ों की तरह (ऊँची चीज़ें)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला की कुदरत की निशानियों में से एक निशानी वो बड़े-बड़े जहाज़ हैं जो समुद्र में पहाड़ों की तरह ऊँचे और विशाल होते हैं और पानी पर चलते हैं। ये जहाज़ अपनी विशालता और भारीपन के बावजूद अल्लाह के हुक्म से समुद्र की लहरों पर तैरते हैं और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते हैं। यह अल्लाह की उस ताकत और कुदरत का सबूत है जिसने पानी को इतना हल्का बनाया कि वो इन भारी जहाज़ों को उठा लेता है, और हवा को इस काबिल बनाया कि वो इन जहाज़ों को आगे बढ़ाती है।

अगर अल्लाह चाहे तो हवा को रोक दे और ये जहाज़ समुद्र के बीच में खड़े रह जाएँ, न आगे बढ़ सकें और न पीछे लौट सकें। ये सब कुछ अल्लाह के इशारे से होता है। जो लोग धैर्य रखने वाले हैं और अल्लाह के एहसानों का शुक्र अदा करने वाले हैं, उनके लिए इन जहाज़ों के चलने और रुकने में अल्लाह की कुदरत की बड़ी निशानियाँ और सबूत मौजूद हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए, ये विशाल जहाज़ जो पहाड़ों जितने बड़े होते हैं, वो किस तरह समुद्र की गहराइयों में सफर करते हैं? क्या ये अपनी ताकत से चलते हैं? हरगिज़ नहीं! ये अल्लाह की कुदरत से चलते हैं। जिस अल्लाह ने इन भारी जहाज़ों को पानी पर तैरने की ताकत दी, वही अल्लाह आपकी मुश्किलों को भी आसान कर सकता है। जब आप समुद्र में जहाज़ को चलते हुए देखें, तो याद करें कि अल्लाह की कुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। ये निशानियाँ हमें बताती हैं कि अल्लाह पर भरोसा रखो, उसकी इबादत करो और उसके दिए हुए एहसानों का शुक्र अदा करो। जो बंदा अल्लाह की इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वो अल्लाह की रहमत के करीब होता है।



📜 आयत 30-34 — सूरा अश-शूरा

30وَمَا أَصَابَكُم مِّن مُّصِيبَةٍ فَبِمَا كَسَبَتْ أَيْدِيكُمْ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ
और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने ही हाथों की करतूत से और (उस पर भी) वह बहुत कुछ माफ कर देता है
31وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ ۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और तुम लोग ज़मीन में (रह कर) तो ख़ुदा को किसी तरह हरा नहीं सकते और ख़ुदा के सिवा तुम्हारा न कोई दोस्त है और न मददगार
32وَمِنْ آيَاتِهِ الْجَوَارِ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं
33إِن يَشَأْ يُسْكِنِ الرِّيحَ فَيَظْلَلْنَ رَوَاكِدَ عَلَىٰ ظَهْرِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
अगर ख़ुदा चाहे तो हवा को ठहरा दे तो जहाज़ भी समन्दर की सतह पर (खड़े के खड़े) रह जाएँ बेशक तमाम सब्र और शुक्र करने वालों के वास्ते इन बातों में (ख़ुदा की क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं
34أَوْ يُوبِقْهُنَّ بِمَا كَسَبُوا وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — अश-शूरा 32

सूरा अश-शूरा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में…

सूरा आयत 32/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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