Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةً وَاحِدَةً: एक ही समुदाय या एक ही धर्म पर चलने वाला समूह।
- رَحْمَتِهِ: उसकी दया, जिसका अर्थ यहाँ इस्लाम और जन्नत (स्वर्ग) है।
- وَلِيّ: मददगार, संरक्षक, जो किसी के काम आए।
- نَصِير: सहायक, जो किसी को सज़ा या मुसीबत से बचाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी इच्छा और हिकमत (बुद्धिमत्ता) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि अगर वह चाहता तो सभी इंसानों को एक ही उम्मत (समुदाय) बना देता, यानी सभी को ज़बरदस्ती एक ही धर्म—इस्लाम—पर चलने वाला बना देता, और सभी को हिदायत दे देता। लेकिन अल्लाह की हिकमत यह है कि उसने इंसान को इख्तियार (स्वतंत्र विकल्प) दिया है, ताकि वह अपनी मर्ज़ी से नेकी और बुराई में से किसी एक को चुने।
अल्लाह तआला अपनी रहमत से उन लोगों को इस्लाम की हिदायत देता है और जन्नत में दाखिल करता है जिनके लिए उसकी तरफ से भलाई लिखी जा चुकी है, और जो सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करते हैं। यह अल्लाह का फज़ल (कृपा) है जो वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अता करता है।
लेकिन जो लोग ज़ुल्म करते हैं—यानी शिर्क करते हैं और अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं—उनके लिए क़यामत के दिन न कोई वली (संरक्षक) होगा जो उनके काम आए, और न कोई नसीर (सहायक) होगा जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सके। वे पूरी तरह अकेले और बेसहारा होंगे, और उनका अंजाम अल्लाह की सज़ा के सिवा कुछ नहीं होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की असीम रहमत की याद दिलाती है कि उसने हमें हिदायत का रास्ता दिखाया और अपनी मर्ज़ी से हमें इस्लाम जैसी नेमत अता की। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें और अल्लाह के फरमानों पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है। साथ ही, यह आयत हमें ज़ुल्म और शिर्क से बचने की ताकीद करती है, क्योंकि क़यामत के दिन कोई हमारा मददगार नहीं होगा। आओ हम अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें और अपने आख़िरत (परलोक) को संवारने की कोशिश करें, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं और उसके दीन पर चलते हैं।
📜 आयत 6-10 — सूरा अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 8
सूरा अश-शूरा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा चाहता तो इन सबको एक ही गिरोह…सूरा आयत 8/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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