अज़-ज़ुखरुफ · 39/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَلَن يَنفَعَكُمُ الْيَوْمَ إِذ ظَّلَمْتُمْ أَنَّكُمْ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ۝٣٩
Wa lai yanfa`akumul Yawma iz zalamtum annakum fil `azaabi mushtarikoon
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुम नाफरमानियाँ कर चुके तो (शयातीन के साथ) तुम्हारा अज़ाब में शरीक होना भी आज तुमको (अज़ाब की कमी में) कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِذ ظَّلَمْتُمْ — जब तुमने (दुनिया में) ज़ुल्म किया, यानी शिर्क और गुनाह किए।
  • مُشْتَرِكُونَ — एक-दूसरे के साथ (अज़ाब में) साझीदार होना।

तफ़सीर:

आज के दिन (क़यामत के दिन) तुम्हें तुम्हारा एक-दूसरे के साथ अज़ाब में साझीदार होना किसी भी तरह से कोई फ़ायदा नहीं पहुँचाएगा, क्योंकि तुमने दुनिया में ज़ुल्म किया था — यानी अल्लाह के साथ शिर्क किया और उसकी नाफ़रमानी की। जिस तरह तुम दुनिया में कुफ्र और गुनाह में एक-दूसरे के साथी बने थे, उसी तरह आज अज़ाब में भी तुम सब साझीदार हो, लेकिन यह साझेदारी तुम्हारे किसी काम न आएगी। तुम्हारे साथी (शैतान और गुमराह करने वाले) तुम्हारा कोई बोझ नहीं उठाएँगे, और न ही तुम्हारे अज़ाब को कम कर सकेंगे। हर एक को अपने कर्मों के अनुसार पूरा-पूरा अज़ाब मिलेगा — हर काफ़िर और हर शैतान के लिए अज़ाब का अपना हिस्सा है, जो उससे कम नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इन्साफ़ बिल्कुल पूर्ण है — वहाँ कोई सिफ़ारिश या साझेदारी किसी के काम नहीं आएगी। इसलिए ऐ इन्सान! आज ही अपनी ज़िंदगी को सँवार ले, अल्लाह की रहमत और मग़फिरत का सहारा ले, क्योंकि आज का दिन अमल का दिन है, हिसाब का नहीं। कल पछताने से कोई फ़ायदा नहीं होगा। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है ताकि हम उसकी इबादत करें और उसकी रहमत कमाएँ — यही सबसे बड़ी कामयाबी है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की याद से मुँह मोड़ते हैं, वे आख़िरत में सिर्फ़ पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करेंगे। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 37-41 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

37وَإِنَّهُمْ لَيَصُدُّونَهُمْ عَنِ السَّبِيلِ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ
और वह (शयातीन) उन लोगों को (ख़ुदा की) राह से रोकते रहते हैं बावजूद इसके वह उसी ख्याल में हैं कि वह यक़ीनी राहे रास्त पर हैं
38حَتَّىٰ إِذَا جَاءَنَا قَالَ يَا لَيْتَ بَيْنِي وَبَيْنَكَ بُعْدَ الْمَشْرِقَيْنِ فَبِئْسَ الْقَرِينُ
यहाँ तक कि जब (क़यामत में) हमारे पास आएगा तो (अपने साथी शैतान से) कहेगा काश मुझमें और तुममें पूरब पश्चिम का फ़ासला होता ग़रज़ (शैतान भी) क्या ही बुरा रफीक़ है
39وَلَن يَنفَعَكُمُ الْيَوْمَ إِذ ظَّلَمْتُمْ أَنَّكُمْ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
और जब तुम नाफरमानियाँ कर चुके तो (शयातीन के साथ) तुम्हारा अज़ाब में शरीक होना भी आज तुमको (अज़ाब की कमी में) कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता
40أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ أَوْ تَهْدِي الْعُمْيَ وَمَن كَانَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो (ऐ रसूल) क्या तुम बहरों को सुना सकते हो या अन्धे को और उस शख़्श को जो सरीही गुमराही में पड़ा हो रास्ता दिखा सकते हो (हरगिज़ नहीं)
41فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنْهُم مُّنتَقِمُونَ
तो अगर हम तुमको (दुनिया से) ले भी जाएँ तो भी हमको उनसे बदला लेना ज़रूरी है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 39

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तुम नाफरमानियाँ कर चुके तो (शयातीन के साथ)…

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Saturday, October 3, 2026

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