अज़-ज़ुखरुफ · 38/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
حَتَّىٰ إِذَا جَاءَنَا قَالَ يَا لَيْتَ بَيْنِي وَبَيْنَكَ بُعْدَ الْمَشْرِقَيْنِ فَبِئْسَ الْقَرِينُ ۝٣٨
Hattaaa izaa jaaa`anaa qaala yaa laita bainee wa bainaka bu`dal mashriqaini fabi`sal qareen
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब (क़यामत में) हमारे पास आएगा तो (अपने साथी शैतान से) कहेगा काश मुझमें और तुममें पूरब पश्चिम का फ़ासला होता ग़रज़ (शैतान भी) क्या ही बुरा रफीक़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُعْدَ الْمَشْرِقَيْنِ: पूर्व और पश्चिम के बीच की दूरी (अर्थात् पूर्व और पश्चिम की दूरी जितनी विशाल होती है, उतनी दूरी)।
  • الْقَرِينُ: साथी (यहाँ शैतान को संबोधित किया गया है जो उसका साथी बना हुआ था)।

तफसीर (व्याख्या):

जब वह व्यक्ति जिसने रहमान (अल्लाह) की याद से मुँह मोड़ा था, क़ियामत के दिन हमारे सामने हाज़िर होगा, और उसका शैतानी साथी भी उसके साथ होगा, तो वह अपने उस शैतानी साथी से कहेगा: "काश! मेरे और तेरे बीच पूर्व और पश्चिम के बराबर दूरी होती!" यानी वह चाहेगा कि उसका शैतान से कोई वास्ता ही न होता। वह इस बात पर पछतावा करेगा कि उसने दुनिया में शैतान की बात मानी और अल्लाह के मार्गदर्शन को ठुकरा दिया।

वह कहेगा: "कितना बुरा साथी है यह!" क्योंकि इस शैतान ने उसे गुमराह किया, उसे अल्लाह की याद से दूर रखा, और उसे जहन्नम की तरफ ले गया। यह पछतावा उस दिन किसी काम न आएगा, क्योंकि फैसला हो चुका होगा और मौका हाथ से निकल चुका होगा।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि दुनिया में शैतान की दोस्ती और अल्लाह से दूरी का अंजाम कितना भयानक है। आज हमें मौका है कि हम अल्लाह की याद से जुड़ें, उसकी तालीमात पर अमल करें, और शैतान के बहकावे से बचें। अल्लाह का ज़िक्र और क़ुरआन की तालीम ही वह चीज़ है जो हमें उस बुरे अंजाम से बचा सकती है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह पर चलाएँ, ताकि क़ियामत के दिन हमें पछतावा न करना पड़े। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और शैतान के वसवसों से बचाए। आमीन।



📜 आयत 36-40 — अज़-ज़ुखरुफ

36وَمَن يَعْشُ عَن ذِكْرِ الرَّحْمَٰنِ نُقَيِّضْ لَهُ شَيْطَانًا فَهُوَ لَهُ قَرِينٌ
और जो शख़्श ख़ुदा की चाह से अन्धा बनता है हम (गोया ख़ुद) उसके वास्ते शैतान मुक़र्रर कर देते हैं तो वही उसका (हर दम का) साथी है
37وَإِنَّهُمْ لَيَصُدُّونَهُمْ عَنِ السَّبِيلِ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ
और वह (शयातीन) उन लोगों को (ख़ुदा की) राह से रोकते रहते हैं बावजूद इसके वह उसी ख्याल में हैं कि वह यक़ीनी राहे रास्त पर हैं
38حَتَّىٰ إِذَا جَاءَنَا قَالَ يَا لَيْتَ بَيْنِي وَبَيْنَكَ بُعْدَ الْمَشْرِقَيْنِ فَبِئْسَ الْقَرِينُ
यहाँ तक कि जब (क़यामत में) हमारे पास आएगा तो (अपने साथी शैतान से) कहेगा काश मुझमें और तुममें पूरब पश्चिम का फ़ासला होता ग़रज़ (शैतान भी) क्या ही बुरा रफीक़ है
39وَلَن يَنفَعَكُمُ الْيَوْمَ إِذ ظَّلَمْتُمْ أَنَّكُمْ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
और जब तुम नाफरमानियाँ कर चुके तो (शयातीन के साथ) तुम्हारा अज़ाब में शरीक होना भी आज तुमको (अज़ाब की कमी में) कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता
40أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ أَوْ تَهْدِي الْعُمْيَ وَمَن كَانَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो (ऐ रसूल) क्या तुम बहरों को सुना सकते हो या अन्धे को और उस शख़्श को जो सरीही गुमराही में पड़ा हो रास्ता दिखा सकते हो (हरगिज़ नहीं)
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 38

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यहाँ तक कि जब (क़यामत में) हमारे पास आएगा तो…

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Tuesday, August 18, 2026

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