अज़-ज़ुखरुफ · 41/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنْهُم مُّنتَقِمُونَ ۝٤١
Fa immaa nazhabanna bika fa innaa minhum muntaqimoon
📖 हिंदी अर्थ
तो अगर हम तुमको (दुनिया से) ले भी जाएँ तो भी हमको उनसे बदला लेना ज़रूरी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ: अगर हम तुम्हें (ऐ रसूल) उठा लें, यानी तुम्हारी मृत्यु पहले आ जाए।
  • مُّنتَقِمُونَ: बदला लेने वाले, सज़ा देने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी! अगर हम तुम्हें इस दुनिया से उठा लें और तुम्हारी आँखों के सामने उन काफ़िरों की सज़ा न आए, तो कोई चिंता नहीं। हम उनसे ज़रूर बदला लेंगे। यह बदला दो तरह से होगा — एक तो इसी दुनिया में, जैसे बद्र के दिन उन्हें मारा गया, और दूसरा आख़िरत में, जहाँ उन्हें क़ब्र और जहन्नम का अज़ाब भुगतना होगा। अल्लाह का वादा है कि वह अपने नबी की मदद करेगा और उनके दुश्मनों को रूसवा करेगा, चाहे नबी की ज़िंदगी में हो या उनके बाद।

यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी तसल्ली और हौसले की बात है। अल्लाह कभी अपने नेक बंदों को अकेला नहीं छोड़ता। भले ही सज़ा में देर हो, लेकिन अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और उसका इंसाफ़ कभी नाकाम नहीं होता। इसलिए ऐ ईमान वालों! जब तुम सच्चाई पर हो और अल्लाह के रास्ते में मेहनत कर रहे हो, तो यक़ीन रखो कि अल्लाह तुम्हारे साथ है। बुराई का अंजाम चाहे कितनी भी देर से क्यों न आए, ज़रूर आएगा। अल्लाह ने हर ज़ालिम के लिए अपनी सज़ा मुक़र्रर कर रखी है। तुम बस सब्र करो और अल्लाह पर भरोसा रखो — फ़तह (विजय) उन्हीं के लिए है जो अल्लाह पर पूरा यक़ीन रखते हैं।



📜 आयत 39-43 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

39وَلَن يَنفَعَكُمُ الْيَوْمَ إِذ ظَّلَمْتُمْ أَنَّكُمْ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
और जब तुम नाफरमानियाँ कर चुके तो (शयातीन के साथ) तुम्हारा अज़ाब में शरीक होना भी आज तुमको (अज़ाब की कमी में) कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता
40أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ أَوْ تَهْدِي الْعُمْيَ وَمَن كَانَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो (ऐ रसूल) क्या तुम बहरों को सुना सकते हो या अन्धे को और उस शख़्श को जो सरीही गुमराही में पड़ा हो रास्ता दिखा सकते हो (हरगिज़ नहीं)
41فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنْهُم مُّنتَقِمُونَ
तो अगर हम तुमको (दुनिया से) ले भी जाएँ तो भी हमको उनसे बदला लेना ज़रूरी है
42أَوْ نُرِيَنَّكَ الَّذِي وَعَدْنَاهُمْ فَإِنَّا عَلَيْهِم مُّقْتَدِرُونَ
या (तुम्हारी ज़िन्दगी ही में) जिस अज़ाब का हमने उनसे वायदा किया है तुमको दिखा दें तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
43فَاسْتَمْسِكْ بِالَّذِي أُوحِيَ إِلَيْكَ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
तो तुम्हारे पास जो वही भेजी गयी है तुम उसे मज़बूत पकड़े रहो इसमें शक़ नहीं कि तुम सीधी राह पर हो
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 41

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Friday, October 2, 2026

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