अज़-ज़ुखरुफ · 62/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيْطَانُ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ ۝٦٢
Wa laa yasuddan nakumush Shaitaanu innahoo lakum `aduwwum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يَصُدَّنَّكُمْ – वह तुम्हें कभी रोक न दे / बहका न दे
  • الشَّيْطَانُ – शैतान (इब्लीस और उसके सहायक)
  • عَدُوٌّ مُبِينٌ – खुला और स्पष्ट शत्रु

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को एक बहुत ही अहम नसीहत दे रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि शैतान तुम्हें कभी उस रास्ते से न रोक दे जिस पर चलने का तुम्हें हुक्म दिया गया है। शैतान तुम्हारा सबसे पुराना और सबसे बड़ा दुश्मन है — वह तुम्हारे साथ खुली दुश्मनी रखता है और उसकी दुश्मनी कोई छिपी हुई बात नहीं, बल्कि वह खुद अपनी दुश्मनी का ऐलान कर चुका है।

शैतान की कोशिश हमेशा यही रहती है कि इंसान को अल्लाह की इबादत से, नेक कामों से और सीधे रास्ते से भटका दे। वह तरह-तरह के वसवसे (बहकावे) डालता है, तरह-तरह के बहाने सुझाता है — कभी कहता है कि "अभी वक़्त है", कभी कहता है "बाद में कर लोगे", कभी इंसान को आलस में डाल देता है, कभी उसे दुनिया की मोहब्बत में इस कदर ग़रक कर देता है कि वह आख़िरत को भूल जाए।

यहाँ अल्लाह तआला अपने बंदों को आगाह कर रहे हैं कि शैतान के इस दुश्मनी भरे जाल से बचो। वह तुम्हारा दुश्मन है — और दुश्मन से हमेशा सावधान रहना चाहिए। जिस तरह कोई समझदार इंसान अपने दुश्मन की चालों से बचने की कोशिश करता है, उसी तरह हमें भी शैतान की चालों से बचना चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने जीवन में हर कदम पर शैतान से सावधान रहें। जब भी हम कोई अच्छा काम करने का इरादा करें, तो शैतान उसमें रुकावट डालने की कोशिश करेगा — हमें उसकी बात नहीं माननी चाहिए। अल्लाह की याद, कुरआन की तिलावत और नेक संगत — ये वो ज़रिए हैं जिनसे हम शैतान के हमलों से बच सकते हैं।

याद रखिए — शैतान की दुश्मनी कोई मामूली दुश्मनी नहीं है। उसने अल्लाह के सामने क़सम खाई है कि वह इंसानों को गुमराह करके रहेगा। लेकिन अल्लाह ने हमें बताया है कि जो लोग ईमान लाते हैं और अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन पर शैतान का कोई ज़ोर नहीं चलता। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — हम अल्लाह की पनाह में आ जाएँ तो शैतान हमें कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

आओ, हम सब इस आयत पर अमल करें और शैतान से बचने के लिए अल्लाह से मदद माँगें। अल्लाह हम सबको शैतान के वसवसों से महफ़ूज़ रखे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 60-64 — अज़-ज़ुखरुफ

60وَلَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَا مِنكُم مَّلَائِكَةً فِي الْأَرْضِ يَخْلُفُونَ
और अगर हम चाहते तो तुम ही लोगों में से (किसी को) फ़रिश्ते बना देते जो तुम्हारी जगह ज़मीन में रहते
61وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَاتَّبِعُونِ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ यक़ न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है
62وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيْطَانُ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
63وَلَمَّا جَاءَ عِيسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِالْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ الَّذِي تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख्तेलाफ करते थे तुमको साफ-साफ बता दूँ तो तुम लोग ख़ुदा से डरो और मेरा कहा मानो
64إِنَّ اللَّهَ هُوَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हार परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 62

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Tuesday, August 18, 2026

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