अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَصُدَّنَّكُمْ – वह तुम्हें कभी रोक न दे / बहका न दे
- الشَّيْطَانُ – शैतान (इब्लीस और उसके सहायक)
- عَدُوٌّ مُبِينٌ – खुला और स्पष्ट शत्रु
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को एक बहुत ही अहम नसीहत दे रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि शैतान तुम्हें कभी उस रास्ते से न रोक दे जिस पर चलने का तुम्हें हुक्म दिया गया है। शैतान तुम्हारा सबसे पुराना और सबसे बड़ा दुश्मन है — वह तुम्हारे साथ खुली दुश्मनी रखता है और उसकी दुश्मनी कोई छिपी हुई बात नहीं, बल्कि वह खुद अपनी दुश्मनी का ऐलान कर चुका है।
शैतान की कोशिश हमेशा यही रहती है कि इंसान को अल्लाह की इबादत से, नेक कामों से और सीधे रास्ते से भटका दे। वह तरह-तरह के वसवसे (बहकावे) डालता है, तरह-तरह के बहाने सुझाता है — कभी कहता है कि "अभी वक़्त है", कभी कहता है "बाद में कर लोगे", कभी इंसान को आलस में डाल देता है, कभी उसे दुनिया की मोहब्बत में इस कदर ग़रक कर देता है कि वह आख़िरत को भूल जाए।
यहाँ अल्लाह तआला अपने बंदों को आगाह कर रहे हैं कि शैतान के इस दुश्मनी भरे जाल से बचो। वह तुम्हारा दुश्मन है — और दुश्मन से हमेशा सावधान रहना चाहिए। जिस तरह कोई समझदार इंसान अपने दुश्मन की चालों से बचने की कोशिश करता है, उसी तरह हमें भी शैतान की चालों से बचना चाहिए।
यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने जीवन में हर कदम पर शैतान से सावधान रहें। जब भी हम कोई अच्छा काम करने का इरादा करें, तो शैतान उसमें रुकावट डालने की कोशिश करेगा — हमें उसकी बात नहीं माननी चाहिए। अल्लाह की याद, कुरआन की तिलावत और नेक संगत — ये वो ज़रिए हैं जिनसे हम शैतान के हमलों से बच सकते हैं।
याद रखिए — शैतान की दुश्मनी कोई मामूली दुश्मनी नहीं है। उसने अल्लाह के सामने क़सम खाई है कि वह इंसानों को गुमराह करके रहेगा। लेकिन अल्लाह ने हमें बताया है कि जो लोग ईमान लाते हैं और अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन पर शैतान का कोई ज़ोर नहीं चलता। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — हम अल्लाह की पनाह में आ जाएँ तो शैतान हमें कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
आओ, हम सब इस आयत पर अमल करें और शैतान से बचने के लिए अल्लाह से मदद माँगें। अल्लाह हम सबको शैतान के वसवसों से महफ़ूज़ रखे। आमीन।
📜 आयत 60-64 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 62
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे…सूरा आयत 62/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








