अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- यन्ज़ुरून – वे प्रतीक्षा कर रहे हैं
- बग़्ततन – अचानक, एकाएक
- ला यश्उरून – उन्हें इसका एहसास नहीं होगा, वे भाँप नहीं पाएँगे
तफ़सीर:
ये आयत उन लोगों की स्थिति को स्पष्ट करती है जो हक़ (सत्य) से मुँह मोड़ते हैं और मज़ाक़ उड़ाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क्या ये लोग जो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के मामले में अलग-अलग ग़लत विचार रखते हैं और सत्य को नकारते हैं, क्या ये केवल क़ियामत की घड़ी का इंतज़ार कर रहे हैं? वह घड़ी जो उन पर अचानक आ जाएगी, जबकि उन्हें इसका कोई ज़रा भी एहसास नहीं होगा।
यानी ये लोग अपनी ग़फ़लत और अहंकार में ऐसे डूबे हुए हैं कि उन्हें याद ही नहीं कि एक दिन ये दुनिया ख़त्म होनी है। वे दुनिया की चकाचौंध और मोह-माया में इस क़दर मशग़ूल हैं कि उन्होंने आख़िरत को भुला दिया है। वे सोचते हैं कि शायद क़ियामत आएगी ही नहीं, या फिर अगर आएगी भी तो बहुत दूर है। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह घड़ी अचानक आएगी, बिना किसी पेशगोई (पूर्व सूचना) के, और उस वक़्त उन्हें कोई मौक़ा नहीं दिया जाएगा।
ये आयत हम सबके लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि हम क़ियामत की तैयारी करें, क्योंकि वह घड़ी कब आ जाए, किसी को पता नहीं। मौत भी तो अचानक आती है। आज हम ज़िंदा हैं, कल नहीं। इसलिए हर पल नेकी करें, अल्लाह की इबादत करें और अपने गुनाहों से तौबा करें। अल्लाह तआला रहमत वाला है, वो चाहे तो हमें माफ़ कर दे, लेकिन हमें भी अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी।
याद रखिए! क़ियामत का इंतज़ार करने वालों के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है कि हम नेक अमल करें, लोगों के साथ भलाई करें और अल्लाह की राह में चलें। यही वो रास्ता है जो हमें उस दिन की परेशानियों से बचाएगा और जन्नत की तरफ ले जाएगा। अल्लाह हम सबको समझ दे और अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 64-68 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 66
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग बस क़यामत के ही मुन्ज़िर बैठे हैं…सूरा आयत 66/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








