अज़-ज़ुखरुफ · 86/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَلَا يَمْلِكُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِالْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ ۝٨٦
Wa laa yamlikul lazeena yad`oona min doonihish shafaa`ata illaa man shahida bilhaqqi wa hum ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफारिश का भी एख्तेयार नहीं रख़ते मगर (हॉ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَدْعُونَ مِن دُونِهِ — जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं (अर्थात् मूर्तियाँ, देवता, या वे लोग जिन्हें पूजा जाता है)।
  • الشَّفَاعَةَ — सिफ़ारिश (किसी के लिए क्षमा या भलाई की प्रार्थना करना)।
  • شَهِدَ بِالْحَقِّ — सत्य की गवाही देना (अर्थात् तौहीद और सच्चाई को स्वीकार करना)।
  • يَعْلَمُونَ — वे जानते हैं (अर्थात् उनके दिलों को इसका यक़ीन है)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की ग़लतफ़हमी को दूर करती है जो अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं और समझते हैं कि ये (मूर्तियाँ, देवता, या पूज्य व्यक्ति) उनके लिए सिफ़ारिश कर सकेंगे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन्हें ये लोग अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, वे सिफ़ारिश का अधिकार बिल्कुल नहीं रखते। सिफ़ारिश का अधिकार केवल उन्हीं को मिलेगा जिन्होंने सत्य की गवाही दी — अर्थात् जिन्होंने अल्लाह की वहदानिय्यत (एकता) और सच्चाई को अपने दिल से स्वीकार किया और अपनी ज़ुबान से उसका इक़रार किया, और वे इस इक़रार की हक़ीक़त को जानते थे। इनमें ईसा (अलैहिस्सलाम), उज़ैर (अलैहिस्सलाम) और फ़रिश्ते शामिल हैं, जिन्हें कुछ लोगों ने पूजा तो किया, लेकिन वे स्वयं अल्लाह के सच्चे बंदे थे और उन्होंने सत्य की गवाही दी। अल्लाह ने उन्हें सिफ़ारिश का अधिकार केवल अपनी इजाज़त से दिया, और यह अधिकार उनका अपना नहीं, बल्कि अल्लाह की देन है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि सिफ़ारिश और शफ़ाअत का असली मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। किसी को भी — चाहे वह कितना ही बड़ा नबी, वली या फ़रिश्ता क्यों न हो — सिफ़ारिश का अधिकार अल्लाह की इजाज़त के बिना नहीं है। इसलिए हमें अपनी उम्मीदें और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखना चाहिए, और उसी से मदद माँगनी चाहिए। साथ ही, हमें सत्य की गवाही देनी चाहिए — यानी अल्लाह की वहदानिय्यत और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नबुव्वत को दिल से स्वीकार करना चाहिए, और इसी पर अमल करना चाहिए। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह के बंदे बन जाते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत के दरवाज़े खुल जाते हैं। याद रखिए, सच्ची कामयाबी उसी को मिलती है जो अपने रब को पहचाने और उसी की इबादत करे। अल्लाह हमें सत्य पर चलने और उसकी रहमत पाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 84-88 — अज़-ज़ुखरुफ

84وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
85وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे
86وَلَا يَمْلِكُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِالْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफारिश का भी एख्तेयार नहीं रख़ते मगर (हॉ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)
87وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَهُمْ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया तो ज़रूर कह देगें कि अल्लाह ने फिर (बावजूद इसके) ये कहाँ बहके जा रहे हैं
88وَقِيلِهِ يَا رَبِّ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ لَّا يُؤْمِنُونَ
और (उसी को) रसूल के उस क़ौल का भी इल्म है कि परवरदिगार ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
86आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 86

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 86 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं…

सूरा आयत 86/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 84–88. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए