अज़-ज़ुखरुफ · 85/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٨٥
Wa tabaarakal lazee lahoo mulkus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa `indahoo `ilmus Saa`ati wa ilaihi turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَبَارَكَ: अत्यंत बरकत वाला, बड़ा और पवित्र है।
  • مُلْكُ: राज्य, अधिकार और स्वामित्व।
  • السَّاعَةِ: क़ियामत का समय, जब सब लोग मरकर उठाए जाएँगे।
  • تُرْجَعُونَ: तुम लौटाए जाओगे (अल्लाह की ओर)।

विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की महानता और उसकी असीम शक्ति का एहसास कराती है। अल्लाह वह ज़ात है जो हर प्रकार की बरकत और भलाई का स्रोत है, उसकी बरकतें अनगिनत हैं और उसका ख़ज़ाना कभी ख़त्म नहीं होता। वही है जिसके अधिकार में सारे आसमान, सारी ज़मीनें और उनके बीच की हर चीज़ है — चाहे वह दृश्य हो या अदृश्य, छोटी हो या बड़ी। पूरे ब्रह्मांड की बागडोर अकेले उसी के हाथ में है, कोई दूसरा उसका साझीदार नहीं।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने एक और ख़ास इल्म का ज़िक्र करता है — क़ियामत का इल्म। यानी क़ियामत कब आएगी, यह जानने का अधिकार सिर्फ़ अल्लाह को है। न किसी फ़रिश्ते को, न किसी नबी को, न किसी इंसान को। यह बात हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी इस तरह बितानी चाहिए कि हम हर वक़्त उस दिन के लिए तैयार रहें, क्योंकि वह घड़ी कब आ जाए, किसी को पता नहीं।

आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।" यह हर इंसान के लिए एक बड़ी याद दिलाही है — मौत के बाद हमें उठाया जाएगा, हम अपनी कब्रों से निकलेंगे, और अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। वहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा। जिसने अच्छे काम किए होंगे, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुरे काम किए होंगे, उसे अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ेगी।

यह आयत हमें तीन बड़ी बातें सिखाती है: पहली — अल्लाह की बरकत और उसकी कुदरत पर ईमान लाना; दूसरी — क़ियामत के दिन पर यक़ीन रखना और उसकी तैयारी करना; तीसरी — यह एहसास रखना कि हमें एक दिन अपने रब के सामने पेश होना है, इसलिए अपनी ज़िंदगी को नेकी और अच्छाई से भर लें। जो इंसान इन हक़ीक़तों को समझ लेता है, वह कभी गुमराही में नहीं भटकता और न ही दुनिया की चमक-दमक उसे अल्लाह से ग़ाफ़िल कर पाती है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 83-87 — अज़-ज़ुखरुफ

83فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है
84وَهُوَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ إِلَٰهٌ وَفِي الْأَرْضِ إِلَٰهٌ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ
उनके सामने आ मौजूद हो और आसमान में भी (उसी की इबादत की जाती है और वही ज़मीन में भी माबूद है और वही वाकिफ़कार हिकमत वाला है
85وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे
86وَلَا يَمْلِكُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِالْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफारिश का भी एख्तेयार नहीं रख़ते मगर (हॉ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)
87وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَهُمْ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया तो ज़रूर कह देगें कि अल्लाह ने फिर (बावजूद इसके) ये कहाँ बहके जा रहे हैं
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 85

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Tuesday, August 18, 2026

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