अज़-ज़ुखरुफ · 87/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَهُمْ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ ۝٨٧
Wa la`in sa altahum man khalaqahum la yaqoolun nallaahu fa annaa yu`fakoon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया तो ज़रूर कह देगें कि अल्लाह ने फिर (बावजूद इसके) ये कहाँ बहके जा रहे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ — यानी वे कैसे सत्य से भटकाए जाते हैं, या उन्हें कैसे उलटा किया जा रहा है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! अगर आप इन मुशरिकों से पूछें कि "तुम्हें किसने पैदा किया?" तो वे बिना किसी झिझक के कहेंगे: "अल्लाह ने।" यह बात वे खुद मानते हैं और उनका दिल इसका इक़रार करता है। लेकिन सवाल यह है कि जब वे यह मानते हैं कि अल्लाह ही उनका ख़ालिक़ है, तो फिर वे उसकी इबादत क्यों नहीं करते? वे उसकी इबादत छोड़कर दूसरों की इबादत क्यों करते हैं? क्या वही उनका पालनहार और रिज़्क़ देने वाला नहीं? फिर यह कैसी नादानी है कि वे सच्चाई को जानते हुए भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं और झूठे माबूदों की तरफ भटक जाते हैं।

यह आयत उनके खिलाफ एक स्पष्ट दलील है — उन्होंने खुद अल्लाह के ख़ालिक़ होने का इक़रार किया, फिर भी वे शिर्क पर अड़े हैं। यह उनकी सोच की विरोधाभासी स्थिति है। अगर वे सच में अल्लाह को अपना रब मानते हैं, तो उन्हें चाहिए कि वे सिर्फ उसी की इबादत करें, उसी के आगे सिर झुकाएँ, और उसी से मदद माँगें। लेकिन वे ऐसा नहीं करते, बल्कि पत्थरों और बुतों के आगे सजदा करते हैं जो न उन्हें पैदा कर सकते हैं, न रिज़्क़ दे सकते हैं, न किसी काम आ सकते हैं।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है — हमें अपने दिल से इस सच्चाई को गहराई से समझना चाहिए कि अल्लाह ही हमारा ख़ालिक़ है। जब हम यह मानते हैं, तो हमारी ज़िंदगी का हर पहलू उसी की रज़ा के मुताबिक होना चाहिए। हमें उसी की इबादत करनी चाहिए, उसी से डरना चाहिए, उसी से उम्मीद रखनी चाहिए। यही सच्ची मुसलमानी है — कि हमारा दिल, हमारी ज़ुबान और हमारे अमल सब अल्लाह की तरफ मुड़ जाएँ।

और यह भी याद रखें — जिस दिन हम अपने रब के सामने खड़े होंगे, उस दिन हमसे पूछा जाएगा कि हमने अपनी ज़िंदगी कैसे गुज़ारी। क्या हमने उसकी इबादत की जिसने हमें पैदा किया? या हम दुनिया के झूठे ख्वाबों में खोए रहे? अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो सच्चाई को पहचानते हैं और उस पर अमल करते हैं। आमीन।



📜 आयत 85-89 — अज़-ज़ुखरुफ

85وَتَبَارَكَ الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही बहुत बाबरकत है जिसके लिए सारे आसमान व ज़मीन और दोनों के दरमियान की हुक़ुमत है और क़यामत की ख़बर भी उसी को है और तुम लोग उसकी तरफ लौटाए जाओगे
86وَلَا يَمْلِكُ الَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِالْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिनकी ये लोग इबादत करतें हैं वह तो सिफारिश का भी एख्तेयार नहीं रख़ते मगर (हॉ) जो लोग समझ बूझ कर हक़ बात (तौहीद) की गवाही दें (तो खैर)
87وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَهُمْ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया तो ज़रूर कह देगें कि अल्लाह ने फिर (बावजूद इसके) ये कहाँ बहके जा रहे हैं
88وَقِيلِهِ يَا رَبِّ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ لَّا يُؤْمِنُونَ
और (उसी को) रसूल के उस क़ौल का भी इल्म है कि परवरदिगार ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगे
89فَاصْفَحْ عَنْهُمْ وَقُلْ سَلَامٌ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
तो तुम उनसे मुँह फेर लो और कह दो कि तुम को सलाम तो उन्हें अनक़रीब ही (शरारत का नतीजा) मालूम हो जाएगा
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 87

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम उनसे पूछोगे कि उनको किसने पैदा किया…

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Tuesday, August 18, 2026

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