अद-दुखान · 49/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ ۝٤٩
Zuq innaka antal `azeezul kareem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذُقْ (ज़ुक़): चख, स्वाद ले।
  • الْعَزِيزُ (अल-अज़ीज़): प्रतापी, शक्तिशाली, जिसे कोई हरा न सके।
  • الْكَرِيمُ (अल-करीम): सम्मानित, उदार, जो अपनी क़ौम में बड़ा और आदरणीय हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस अभिमानी और पापी व्यक्ति के बारे में है जो दुनिया में अपनी ताक़त और ऐशो-आराम पर इतराता था, और अल्लाह के आदेशों को ठुकराता था। जब वह आज आख़िरत के अज़ाब में डाला जाएगा, तो उससे तंज़ (उपहास) और मलामत (फटकार) के तौर पर कहा जाएगा: "चख इस अज़ाब का मज़ा! तू वही है जो अपनी क़ौम में अज़ीज़ (शक्तिशाली) और करीम (सम्मानित) समझा जाता था। आज तेरी वह सारी बड़ाई और इज़्ज़त कहाँ चली गई? तूने दुनिया में अपने आपको बड़ा समझा, लेकिन आज तू इस ज़िल्लत और अज़ाब के सामने बिल्कुल बेबस और लाचार है।"

यह वाक्य उसके लिए सबसे बड़ी रुसवाई का सबब है, क्योंकि उसे उसी चीज़ का सामना कराया जा रहा है जिस पर उसे नाज़ था। दुनिया में उसकी अज़्ज़त और करामत झूठी थी, और आज उसकी सच्ची हक़ीक़त उसके सामने आ चुकी है। यह अल्लाह की तरफ से एक कड़ा तंज़ है, ताकि वह समझे कि असली अज़्ज़त और करामत सिर्फ़ अल्लाह के पास है, और उसकी नाफ़रमानी उसे किसी भी इज़्ज़त तक नहीं पहुँचा सकती।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चमक-दमक, माल-दौलत, और क़ौम में बड़ाई — यह सब कुछ फ़ानी (नाशवान) है। जो व्यक्ति इन चीज़ों पर घमंड करता है और अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ता है, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। एक मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह के सामने झुके, उसकी रहमत और मग़फिरत का तालिब रहे, और याद रखे कि असली इज़्ज़त तो अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में है। अल्लाह हमें घमंड और अकड़ से बचाए और हमें अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — अद-दुखान

47خُذُوهُ فَاعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَاءِ الْجَحِيمِ
(फरिश्तों को हुक्म होगा) इसको पकड़ो और घसीटते हुए दोज़ख़ के बीचों बीच में ले जाओ
48ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ
फिर उसके सर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब डालो फिर उससे ताआनन कहा जाएगा अब मज़ा चखो
49ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
50إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
51إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٍ
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
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अनुवाद — अद-दुखान 49

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Tuesday, August 18, 2026

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