अल-जासिया · 26/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
قُلِ اللَّهُ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يَجْمَعُكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٢٦
Qulil laahu yuhyeekum summa yumeetukum summa yajma`ukum ilaa Yawmil Qiyaamati laa raiba feehi wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा ही तुमको ज़िन्दा (पैदा) करता है और वही तुमको मारता है फिर वही तुमको क़यामत के दिन जिस (के होने) में किसी तरह का शक़ नहीं जमा करेगा मगर अक्सर लोग नहीं जानते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحْيِيكُمْ: वह तुम्हें जीवन प्रदान करता है।
  • يُمِيتُكُمْ: वह तुम्हें मृत्यु देता है।
  • يَجْمَعُكُمْ: वह तुम्हें एकत्र करेगा।
  • لَا رَيْبَ فِيهِ: इसमें कोई संदेह नहीं।
  • لَا يَعْلَمُونَ: वे नहीं जानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से, जो मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होने को झुठलाते हैं, कह दीजिए कि यह काम किसी और का नहीं, बल्कि अकेले अल्लाह का है। वही तुम्हें पहली बार जीवन प्रदान करता है, जब तुम कुछ भी नहीं थे। फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है, जब तुम्हारी नियत अवधि पूरी हो जाती है। फिर वही तुम सबको क़यामत के दिन एकत्र करेगा, और यह दिन आकर रहेगा—इसमें ज़रा भी संदेह नहीं। जिस प्रकार उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी प्रकार वह तुम्हें दोबारा जीवित करने پر پوری طرح قادر है।

मगर अफ़सोस! अधिकतर लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते, क्योंकि वे ग़ौर-फ़िक्र नहीं करते और अपनी आँखें बंद कर लेते हैं। अगर वे ज़रा सोचते तो समझ जाते कि जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने پر भी قادر है। यही वजह है कि वे इस दिन की तैयारी नहीं करते और नेक अमल से दूर रहते हैं।

दावत (नसीहत):

प्यारे भाइयों! यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत का दरवाज़ा है। जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा और हमारे हर अमल का हिसाब लेगा। यह हमारे लिए कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी है कि मौत के बाद भी ज़िंदगी है, और अच्छे अमल करने वालों के लिए जन्नत की नेमतें हैं। आओ, हम इस दिन पर ईमान लाएँ और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम कामयाब होने वालों में शामिल हों। याद रखिए, जो लोग इस हक़ीक़त से ग़ाफ़िल हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं, लेकिन जो ईमान लाए और नेक अमल करे, उसके लिए ऐसी कामयाबी है जो कभी ख़त्म नहीं होगी।



📜 आयत 24-28 — अल-जासिया

24وَقَالُوا مَا هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا يُهْلِكُنَا إِلَّا الدَّهْرُ ۚ وَمَا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَظُنُّونَ
और वह लोग कहते हैं कि हमारी ज़िन्दगी तो बस दुनिया ही की है (यहीं) मरते हैं और (यहीं) जीते हैं और हमको बस ज़माना ही (जिलाता) मारता है और उनको इसकी कुछ ख़बर तो है नहीं ये लोग तो बस अटकल की बातें करते हैं
25وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ مَّا كَانَ حُجَّتَهُمْ إِلَّا أَن قَالُوا ائْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और जब उनके सामने हमारी खुली खुली आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनकी कट हुज्जती बस यही होती है कि वह कहते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (जिला कर) ले तो आओ
26قُلِ اللَّهُ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يَجْمَعُكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा ही तुमको ज़िन्दा (पैदा) करता है और वही तुमको मारता है फिर वही तुमको क़यामत के दिन जिस (के होने) में किसी तरह का शक़ नहीं जमा करेगा मगर अक्सर लोग नहीं जानते
27وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَخْسَرُ الْمُبْطِلُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत ख़ास ख़ुदा की है और जिस रोज़ क़यामत बरपा होगी उस रोज़ अहले बातिल बड़े घाटे में रहेंगे
28وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٍ جَاثِيَةً ۚ كُلُّ أُمَّةٍ تُدْعَىٰ إِلَىٰ كِتَابِهَا الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम हर उम्मत को देखोगे कि (फैसले की मुन्तज़िर अदब से) घूटनों के बल बैठी होगी और हर उम्मत अपने नामाए आमाल की तरफ बुलाइ जाएगी जो कुछ तुम लोग करते थे आज तुमको उसका बदला दिया जाएगा
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अनुवाद — अल-जासिया 26

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Tuesday, August 18, 2026

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