अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَوْمَ يَجْمَعُ اللَّهُ الرُّسُلَ: उस दिन (क़ियामत) जब अल्लाह सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा।
- مَاذَا أُجِبْتُمْ: तुम्हें क्या उत्तर दिया गया? (अर्थात तुम्हारी उम्मतों ने तुम्हारे आमंत्रण का क्या जवाब दिया?)
- لَا عِلْمَ لَنَا: हमें कोई ज्ञान नहीं है।
- عَلَّامُ الْغُيُوبِ: छिपी हुई चीज़ों का सबसे अधिक जानने वाला।
तफ़सीर:
ऐ लोगों! उस दिन को याद करो जब अल्लाह तआला सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा और उनसे पूछेगा: "तुम्हारी उम्मतों ने तुम्हें क्या उत्तर दिया? जब तुमने उन्हें मेरे एक होने और मेरी इबादत की ओर बुलाया, तो उन्होंने क्या जवाब दिया?"
इस प्रश्न का उद्देश्य रसूलों को जवाबदेह ठहराना नहीं है, बल्कि उनकी उम्मतों पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करना है, ताकि सबके सामने उनका इनकार और विरोध स्पष्ट हो जाए।
रसूल अल्लाह के सामने अत्यंत आदर और विनम्रता के साथ उत्तर देते हैं: "हमें कोई ज्ञान नहीं है। हम केवल वही जानते हैं जो उन्होंने हमारे सामने प्रकट किया, परंतु उनके दिलों में जो कुछ था, उनके पीछे उन्होंने क्या किया, और उन्होंने हमारे बाद क्या नया किया — यह सब हम नहीं जानते। हमारे बाद उन्होंने हमारे धर्म में क्या परिवर्तन किया, यह हमारे ज्ञान से परे है। निस्संदेह, आप ही सबसे अधिक जानने वाले हैं — जो प्रकट है और जो छिपा है, जो दिलों में है और जो ग़ैब में है, सब कुछ आपके ज्ञान में है।"
यह उत्तर वास्तव में अल्लाह की बड़ाई और उसके ज्ञान की असीमितता का इक़रार है। रसूल यह स्वीकार करते हैं कि उनका ज्ञान सीमित है, जबकि अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है — वह जानता है कि उनकी उम्मतों ने उनकी पीठ पीछे क्या किया, उनके दिलों में क्या छिपा था, और उन्होंने किन बातों को बदला या छोड़ दिया।
फ़ायदे:
- रसूलों की विनम्रता: इस आयत से हमें रसूलों की अत्यधिक विनम्रता और अल्लाह के सामने अपनी लाचारी का इज़हार करने का सबक मिलता है। वे अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करते, बल्कि सारा ज्ञान अल्लाह को सौंप देते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करना चाहिए।
- अल्लाह का असीमित ज्ञान: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है — हमारे दिलों के राज़, हमारे छिपे कर्म, सब कुछ उसके सामने स्पष्ट है। इसलिए हमें अपने अंदर और बाहर दोनों को सुधारना चाहिए।
- अमल की ज़िम्मेदारी: जब रसूलों से उनकी उम्मतों के जवाब के बारे में पूछा जाएगा, तो हममें से हर एक से उसके अमल के बारे में पूछा जाएगा। यह हमें चेतावनी देता है कि हम अपने जीवन में उन रसूलों के आमंत्रण का सही उत्तर दें — यानी उनकी शिक्षाओं पर अमल करें।
- दिल की नीयत की अहमियत: अल्लाह सिर्फ ज़ाहिरी अमल नहीं देखता, बल्कि दिल की नीयत भी देखता है। इसलिए हमें अपनी नीयत को साफ़ रखना चाहिए और अल्लाह के सामने अपने दिल को पवित्र रखने की कोशिश करनी चाहिए।
- क़ियामत का यक़ीन: यह आयत क़ियामत के दिन के भयावह दृश्यों में से एक दृश्य प्रस्तुत करती है, जो हमें उस दिन के लिए तैयारी करने की प्रेरणा देती है — नेक अमल करके और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखते हुए।
📜 आयत 107-111 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 109
सूरा अल-माइदा आयत 109 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस वक्त क़ो याद करो) जिस दिन ख़ुदा अपने पैग़म्बरों…सूरा आयत 109/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 107–111. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








