Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الرَّبَّانِيُّونَ (रब्बानिय्यून): वे धार्मिक नेता और विद्वान जो लोगों को धर्म की शिक्षा देते थे और उनका मार्गदर्शन करते थे।
- الأَحْبَارُ (अहबार): यहूदी विद्वान और धर्मज्ञ।
- الْإِثْم (इस्म): झूठ बोलना, झूठी गवाही देना और पाप के कार्य।
- السُّحْتَ (सुह्त): हराम कमाई, रिश्वत, और लोगों का माल नाजायज़ तरीके से खाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयात में अल्लाह तआला उन लोगों की निंदा कर रहा है जो पाप और ज़ुल्म में जल्दी करते हैं, और साथ ही उनके विद्वानों और धार्मिक नेताओं को भी फटकार रहा है। अल्लाह पूछता है: "क्या इन रब्बानियों (धार्मिक नेताओं) और अहबार (विद्वानों) को इन लोगों को झूठ बोलने, झूठी गवाही देने और हराम कमाई (रिश्वत, सूद, और लोगों का माल नाजायज़ तरीके से खाने) से क्यों नहीं रोकना चाहिए?"
यानी, इन विद्वानों का कर्तव्य था कि वे इन पापियों को इन बुराइयों से रोकते और उन्हें सच्चाई और नेकी की ओर बुलाते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। फिर अल्लाह कहता है: "निश्चय ही वे बहुत बुरा कर रहे थे" — यानी, इन विद्वानों का मौन रहना और निषेध (नाही अनिल मुन्कर) का कर्तव्य छोड़ देना स्वयं एक बड़ा पाप है। यह आयत स्पष्ट करती है कि जो व्यक्ति बुराई से रोकने का कर्तव्य छोड़ देता है, वह उस बुराई को करने वाले के समान ही गुनाहगार है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- विद्वानों और धार्मिक नेताओं की ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी है — वे केवल पढ़ाने ही नहीं, बल्कि समाज में बुराई को रोकने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यदि वे चुप रहेंगे, तो अल्लाह के यहाँ पकड़े जाएँगे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि बुराई को देखकर चुप रहना या उसका समर्थन करना गुनाह है। हर मुसलमान को अपनी हैसियत के अनुसार बुराई को रोकने का प्रयास करना चाहिए।
- झूठ, झूठी गवाही और हराम कमाई (जैसे रिश्वत, सूद, धोखाधड़ी) गंभीर पाप हैं, और इनसे बचना हर मुसलमान का कर्तव्य है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के दीन में अमर बिल मारूफ़ (नेकी का आदेश) और नाही अनिल मुन्कर (बुराई से रोकना) कितना महत्वपूर्ण है — यह समाज को सुधारने का सबसे बड़ा ज़रिया है।
- इस आयत से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने समाज में सच्चाई और ईमानदारी को बढ़ावा दें, और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, चाहे हमारा पद या हैसियत कुछ भी हो।
📜 आयत 61-65 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 63
सूरा अल-माइदा आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनको अल्लाह वाले और उलेमा झूठ बोलने और हरामख़ोरी से…सूरा आयत 63/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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