अल-माइदा · 62/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٦٢
Wa taraa kaseeram minhum yusaari`oona fil ismi wal`udwaani wa aklihimus suht; labi`sa maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और सरकशी और हरामख़ोरी की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • इस्म (الإثم): पाप, गुनाह, विशेष रूप से झूठ और शिर्क।
  • उद्वान (العدوان): ज़ुल्म, हद से बढ़ना, दूसरों पर अत्याचार करना।
  • सुह्त (السحت): हराम कमाई, रिश्वत, ऐसा धन जो अवैध तरीके से प्राप्त किया गया हो।

विस्तृत व्याख्या:

ऐ नबी! आप देखते हैं कि इन यहूदियों और मुनाफ़िक़ों में से बहुत से लोग बुराई की तरफ तेज़ी से दौड़ते हैं। वे पापों में जल्दी करते हैं, झूठ बोलते हैं, शिर्क करते हैं और अल्लाह की नाफ़रमानी में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। वे दूसरों पर ज़ुल्म करते हैं, उनके हक़ मारते हैं और अल्लाह की हदों से आगे बढ़ जाते हैं। साथ ही, वे हराम कमाई, रिश्वत और ऐसे धन को खाने में लिप्त हैं जो अल्लाह ने उनके लिए हराम किया है। यह उनका आदतन काम बन गया है। यह बहुत बुरा काम है जो वे करते हैं, और उनका यह कृत्य अत्यंत निंदनीय है।

फ़ायदे और सबक़:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि पाप और गुनाह में जल्दी करना और उसे अपनी आदत बना लेना कितनी बड़ी बुराई है। एक मुसलमान को हमेशा नेकी में जल्दी करनी चाहिए, गुनाह से दूर रहना चाहिए।
  2. हराम कमाई और रिश्वत खाना गंभीर पाप है। इस्लाम में साफ़ और हलाल कमाई की बहुत ताकीद की गई है। जो व्यक्ति हराम खाता है, उसकी दुआएँ क़ुबूल नहीं होतीं और उसका जीवन बरकत से खाली हो जाता है।
  3. यह आयत हमें आगाह करती है कि ज़ुल्म और अत्याचार से बचें। दूसरों के हक़ मारना, उन्हें तकलीफ़ देना अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा गुनाह है।
  4. इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए और बुरे कामों से तौबा करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह तआला बुरे काम करने वालों से नाराज़ होता है और उनके कर्मों को नापसंद करता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 60-64 — अल-माइदा

60قُلْ هَلْ أُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ اللَّهِ ۚ مَن لَّعَنَهُ اللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيْهِ وَجَعَلَ مِنْهُمُ الْقِرَدَةَ وَالْخَنَازِيرَ وَعَبَدَ الطَّاغُوتَ ۚ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ عَن سَوَاءِ السَّبِيلِ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुम्हें ख़ुदा के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दूं (अच्छा लो सुनो) जिसपर ख़ुदा ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को (मसख़ करके) बन्दर और (किसी को) सूअर बना दिया हो और (ख़ुदा को छोड़कर) शैतान की परस्तिश की हो पस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज्यादा दूर जा पहुंचे हैं
61وَإِذَا جَاءُوكُمْ قَالُوا آمَنَّا وَقَد دَّخَلُوا بِالْكُفْرِ وَهُمْ قَدْ خَرَجُوا بِهِ ۚ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا يَكْتُمُونَ
और (मुसलमानों) जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालॉकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो नेफ़ाक़ वह छुपाए हुए थे ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
62وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और सरकशी और हरामख़ोरी की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है
63لَوْلَا يَنْهَاهُمُ الرَّبَّانِيُّونَ وَالْأَحْبَارُ عَن قَوْلِهِمُ الْإِثْمَ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
उनको अल्लाह वाले और उलेमा झूठ बोलने और हरामख़ोरी से क्यों नहीं रोकते जो (दरगुज़र) ये लोग करते हैं यक़ीनन बहुत ही बुरी है
64وَقَالَتِ الْيَهُودُ يَدُ اللَّهِ مَغْلُولَةٌ ۚ غُلَّتْ أَيْدِيهِمْ وَلُعِنُوا بِمَا قَالُوا ۘ بَلْ يَدَاهُ مَبْسُوطَتَانِ يُنفِقُ كَيْفَ يَشَاءُ ۚ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرًا مِّنْهُم مَّا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ طُغْيَانًا وَكُفْرًا ۚ وَأَلْقَيْنَا بَيْنَهُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۚ كُلَّمَا أَوْقَدُوا نَارًا لِّلْحَرْبِ أَطْفَأَهَا اللَّهُ ۚ وَيَسْعَوْنَ فِي الْأَرْضِ فَسَادًا ۚ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُفْسِدِينَ
और यहूदी कहने लगे कि ख़ुदा का हाथ बॅधा हुआ है (बख़ील हो गया) उन्हीं के हाथ बॉध दिए जाएं और उनके (इस) कहने पर (ख़ुदा की) फिटकार बरसे (ख़ुदा का हाथ बॅधने क्यों लगा) बल्कि उसके दोनों हाथ कुशादा हैं जिस तरह चाहता है ख़र्च करता है और जो (किताब) तुम्हारे पास नाज़िल की गयी है (उनका शक व हसद) उनमें से बहुतेरों को कुफ़्र व सरकशी को और बढ़ा देगा और (गोया) हमने ख़ुद उनके आपस में रोज़े क़यामत तक अदावत और कीने की बुनियाद डाल दी जब ये लोग लड़ाई की आग भड़काते हैं तो ख़ुदा उसको बुझा देता है और रूए ज़मीन में फ़साद फेलाने के लिए दौड़ते फिरते हैं और ख़ुदा फ़सादियों को दोस्त नहीं रखता
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
62आयत

अनुवाद — अल-माइदा 62

सूरा अल-माइदा आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह…

सूरा आयत 62/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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