अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: ईमान लाए, सच्चे दिल से स्वीकार किया।
- وَاتَّقَوْا: डरें, अल्लाह के आदेशों का पालन करें और निषेधों से बचें।
- لَكَفَّرْنَا: हम (अल्लाह) माफ कर देंगे, ढक देंगे (पापों को)।
- سَيِّئَاتِهِمْ: उनके बुरे कर्म, गुनाह।
- جَنَّاتِ النَّعِيم: ऐसे बाग जो हमेशा की नेमतों (आशीर्वादों) से भरे हों।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अह्ले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) को संबोधित करते हुए फरमाता है कि अगर वे सच्चे दिल से अल्लाह और उसके आखिरी रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान ले आते, और अल्लाह के आदेशों का पालन करते हुए उससे डरते — यानी गुनाहों से बचते और तक़वा (परहेज़गारी) अपनाते — तो अल्लाह उनके सारे पिछले गुनाह माफ कर देता, चाहे वे कितने ही ज़्यादा क्यों न हों। अल्लाह का वादा है कि वह उन्हें आख़िरत में ऐसे बागों में दाखिल करेगा जो हमेशा रहने वाली नेमतों से भरे हुए हैं — वहाँ की खुशियाँ, आराम और सुख कभी खत्म नहीं होंगे। यह अल्लाह की बड़ी रहमत और करम है कि ईमान और तक़वा पिछले सारे पापों को मिटा देते हैं। इस आयत में यह भी स्पष्ट संकेत है कि इस्लाम (अल्लाह के सामने आत्मसमर्पण) पिछले सारे गुनाहों को धो देता है, और कोई भी किताबी (यहूदी या ईसाई) जब तक इस्लाम नहीं अपनाता, जन्नत में दाखिल नहीं हो सकता।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की रहमत असीम है: अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने के लिए तैयार है, बशर्ते वे ईमान लाएँ और तक़वा अपनाएँ। यह हमें उम्मीद देता है कि चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अल्लाह की ओर लौटना और सच्चा ईमान लाना हमेशा संभव है।
- ईमान और तक़वा का महत्व: यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ नाम का ईमान काफी नहीं, बल्कि अल्लाह से डरना और उसके हुक्मों पर अमल करना ज़रूरी है। यही दो चीज़ें इंसान को जन्नत तक पहुँचाती हैं।
- इस्लाम की सच्चाई: यह आयत बताती है कि इस्लाम ही वह रास्ता है जो अल्लाह को पसंद है, और इस्लाम अपनाने से पिछले सारे पाप धुल जाते हैं। यह हर इंसान के लिए एक प्यारा संदेश है कि वह अपने अतीत की परवाह किए बिना सच्चाई की ओर लौट सकता है।
- जन्नत की नेमतें: जन्नत का ज़िक्र हमें याद दिलाता है कि असली सुख और चैन इसी दुनिया में नहीं, बल्कि आख़िरत के उस बाग में है जो कभी खत्म नहीं होता। यह हमें दुनिया की चीज़ों से लगाव कम करने और आख़िरत की तैयारी करने की प्रेरणा देता है।
📜 आयत 63-67 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 65
सूरा अल-माइदा आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर अहले किताब ईमान लाते और (हमसे) डरते तो…सूरा आयत 65/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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