Wa law annahum aqaamut Tawraata wal Injeela wa maaa unzila ilaihim mir Rabbihim la akaloo min fawqihim wa min tahti arjulihim; minhum ummatum muqta sidatunw wa kaseerum minhum saaa`a maa ya`maloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और (सहीफ़े) उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल किये गए थे (उनके एहकाम को) क़ायम रखते तो ज़रूर (उनके) ऊपर से भी (रिज़क़ बरस पड़ता) और पॉवों के नीचे से भी उबल आता और (ये ख़ूब चैन से) खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं (मगर) उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
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اور اگر وہ تورات اور انجیل کو اور جو (اور کتابیں) ان کے پروردگار کی طرف سے ان پر نازل ہوئیں ان کو قائم رکھتے (تو ان پر رزق مینہ کی طرح برستا کہ) اپنے اوپر سے پاؤں کے نیچے سے کھاتے ان میں کچھ لوگ میانہ رو ہیں اور بہت سے ایسے ہیں جن کے اعمال برے ہیں
أَقَامُوا التَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ: अर्थात् तौरात और इंजील पर अमल करते, उन्हें क़ायम रखते।
مُقْتَصِدَةٌ: न्यायपूर्ण, मध्यम मार्ग पर चलने वाली, सीधे रास्ते पर स्थिर रहने वाली।
سَاءَ مَا يَعْمَلُونَ: उनका कर्म बहुत बुरा है, अर्थात् उनका कुकर्म अत्यंत निंदनीय है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) अपनी किताबों तौरात और इंजील पर सच्चे दिल से अमल करते, और उन आदेशों को मानते जो उनकी ओर उनके रब की ओर से उतारे गए — जिनमें आख़िरी नबी ﷺ पर ईमान लाना और उनकी पैरवी करना भी शामिल है — तो अल्लाह उन्हें हर तरफ़ से रिज़्क़ अता करता। यानी आसमान से बारिश बरसाता और ज़मीन से पैदावार निकालता, जिससे उनकी ज़िंदगी खुशहाल और आसान हो जाती। यह उनके लिए दुनिया में ही एक बड़ा इनाम होता।
इसके बाद अल्लाह तआला बताता है कि अहले-किताब में से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सीधे रास्ते पर क़ायम हैं, न्याय और सच्चाई पर चलते हैं, जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनके साथी जिन्होंने नबी ﷺ पर ईमान लाया। लेकिन उनमें से अधिकतर लोगों के कर्म बहुत बुरे हैं — वे कुफ़्र और गुनाहों में डूबे हुए हैं, जिसके कारण वे अल्लाह की रहमत और रिज़्क़ से महरूम रह गए।
फ़ायदे:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की बताई हुई किताबों और आदेशों पर अमल करना ही बरकत और रिज़्क़ का ज़रिया है। जो लोग अल्लाह के हुक्मों को छोड़ देते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान उठाते हैं।
यह आयत हमें बताती है कि सच्चा ईमान और नेक अमल इंसान की ज़िंदगी में खुशहाली और आसानी लाता है, और अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खोलता है।
हमें यह भी सबक़ मिलता है कि हर उम्मत में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं, लेकिन हमें हमेशा अच्छे लोगों की तरह बनने की कोशिश करनी चाहिए और उनके रास्ते पर चलना चाहिए।
यह आयत हमें क़ुरआन पर अमल करने की तरग़ीब देती है, क्योंकि यह आख़िरी किताब है जो सभी पिछली किताबों की तस्दीक़ करती है और इसे मानना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है।
और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और (सहीफ़े) उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल किये गए थे (उनके एहकाम को) क़ायम रखते तो ज़रूर (उनके) ऊपर से भी (रिज़क़ बरस पड़ता) और पॉवों के नीचे से भी उबल आता और (ये ख़ूब चैन से) खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं (मगर) उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
और यहूदी कहने लगे कि ख़ुदा का हाथ बॅधा हुआ है (बख़ील हो गया) उन्हीं के हाथ बॉध दिए जाएं और उनके (इस) कहने पर (ख़ुदा की) फिटकार बरसे (ख़ुदा का हाथ बॅधने क्यों लगा) बल्कि उसके दोनों हाथ कुशादा हैं जिस तरह चाहता है ख़र्च करता है और जो (किताब) तुम्हारे पास नाज़िल की गयी है (उनका शक व हसद) उनमें से बहुतेरों को कुफ़्र व सरकशी को और बढ़ा देगा और (गोया) हमने ख़ुद उनके आपस में रोज़े क़यामत तक अदावत और कीने की बुनियाद डाल दी जब ये लोग लड़ाई की आग भड़काते हैं तो ख़ुदा उसको बुझा देता है और रूए ज़मीन में फ़साद फेलाने के लिए दौड़ते फिरते हैं और ख़ुदा फ़सादियों को दोस्त नहीं रखता
और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और (सहीफ़े) उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल किये गए थे (उनके एहकाम को) क़ायम रखते तो ज़रूर (उनके) ऊपर से भी (रिज़क़ बरस पड़ता) और पॉवों के नीचे से भी उबल आता और (ये ख़ूब चैन से) खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं (मगर) उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल किया गया है पहुंचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो (समझ लो कि) तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया और (तुम डरो नहीं) ख़ुदा तुमको लोगों के श्शर से महफ़ूज़ रखेगा ख़ुदा हरगिज़ काफ़िरों की क़ौम को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाता
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब जब तक तुम तौरेत और इन्जील और जो (सहीफ़े) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल हुए हैं उनके (एहकाम) को क़ायम न रखोगे उस वक्त तक तुम्हारा मज़बह कुछ भी नहीं और (ऐ रसूल) जो (किताब) तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से भेजी गयी है (उसका) रश्क (हसद) उनमें से बहुतेरों की सरकशी व कुफ़्र को और बढ़ा देगा तुम काफ़िरों के गिरोह पर अफ़सोस न करना
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