Yaaa aiyuhar Rasoolu balligh maaa unzila ilaika mir Rabbika wa il lam taf`al famaaa ballaghta Risaalatah; wallaahu ya`simuka minan naas; innal laaha laa yahdil qawmal kaafireen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल किया गया है पहुंचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो (समझ लो कि) तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया और (तुम डरो नहीं) ख़ुदा तुमको लोगों के श्शर से महफ़ूज़ रखेगा ख़ुदा हरगिज़ काफ़िरों की क़ौम को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाता
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اے پیغمبر جو ارشادات خدا کی طرف سے تم پر نازل ہوئے ہیں سب لوگوں کو پہنچا دو اور اگر ایسا نہ کیا تو تم خدا کے پیغام پہنچانے میں قاصر رہے (یعنی پیغمبری کا فرض ادا نہ کیا) اور خدا تم کو لوگوں سے بچائے رکھے گا بیشک خدا منکروں کو ہدایت نہیں دیتا
ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल किया गया है पहुंचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो (समझ लो कि) तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया और (तुम डरो नहीं) ख़ुदा तुमको लोगों के श्शर से महफ़ूज़ रखेगा ख़ुदा हरगिज़ काफ़िरों की क़ौम को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाता
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
بَلِّغْ: पहुँचा दो, प्रचार-प्रसार कर दो।
أُنزِلَ إِلَيْكَ: जो कुछ तुम्हारी ओर उतारा गया है।
يَعْصِمُكَ: तुम्हें बचाएगा, सुरक्षा प्रदान करेगा।
لَا يَهْدِي: मार्गदर्शन नहीं देता।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)! जो कुछ भी आपके रब की ओर से आप पर उतारा गया है, उसे पूरा-पूरा लोगों तक पहुँचा दें। उसमें से किसी भी बात को छिपाएँ नहीं, चाहे वह कितनी ही कठिन या नापसंद क्यों न हो। यदि आपने उसमें से कुछ भी छिपाया या नहीं पहुँचाया, तो समझा जाएगा कि आपने अल्लाह का संदेश ही नहीं पहुँचाया—क्योंकि एक हिस्सा छिपाने का मतलब है पूरे संदेश को अधूरा कर देना। लेकिन अल्लाह ने आपको आश्वासन दिया है कि वह स्वयं आपको लोगों से बचाएगा। आपको किसी इंसान का डर नहीं होना चाहिए, न उनकी धमकियों की परवाह करनी चाहिए, न उनके नुकसान पहुँचाने का ख़तरा। आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है, उसका परिणाम अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह उन लोगों को मार्गदर्शन नहीं देता जो सत्य को जानते हुए भी उसका इनकार करते हैं और कुफ्र पर डटे रहते हैं। (यह आयत उस समय उतरी जब रसूलुल्लाह को अपने निकटतम रिश्तेदारों को चेतावनी देने का आदेश दिया गया था, और उन्हें लोगों की प्रतिक्रिया का डर महसूस हुआ। अल्लाह ने उन्हें यह गारंटी दी कि वह उन्हें सुरक्षित रखेगा।)
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य को बिना किसी डर के, बिना किसी लाग-लपेट के, पूरी ईमानदारी से पेश करना चाहिए। किसी इंसान की नाराज़गी या धमकी से हमें सत्य बोलने से नहीं रोकना चाहिए।
यह आयत हमें यह विश्वास दिलाती है कि जो व्यक्ति अल्लाह के काम में लगा होता है, अल्लाह स्वयं उसकी हिफ़ाज़त करता है। इसलिए हमें केवल अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, न कि लोगों के डर से।
इस आयत में रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए अल्लाह की ओर से स्पष्ट गारंटी है कि वह उन्हें लोगों से बचाएगा। यह उनकी नबुव्वत और उनके पैग़ाम की सच्चाई का प्रमाण है।
हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह के दीन को पूरा-पूरा अपनाना चाहिए, उसमें कोई कमी या छिपाव नहीं करना चाहिए। आधा-अधूरा इस्लाम इस्लाम नहीं है।
यह आयत मुसलमानों को साहस और हिम्मत देती है कि वे सत्य के प्रचार में किसी से न डरें, क्योंकि अल्लाह उनका संरक्षक है।
और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और (सहीफ़े) उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल किये गए थे (उनके एहकाम को) क़ायम रखते तो ज़रूर (उनके) ऊपर से भी (रिज़क़ बरस पड़ता) और पॉवों के नीचे से भी उबल आता और (ये ख़ूब चैन से) खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं (मगर) उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल किया गया है पहुंचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो (समझ लो कि) तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहुंचाया और (तुम डरो नहीं) ख़ुदा तुमको लोगों के श्शर से महफ़ूज़ रखेगा ख़ुदा हरगिज़ काफ़िरों की क़ौम को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाता
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब जब तक तुम तौरेत और इन्जील और जो (सहीफ़े) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल हुए हैं उनके (एहकाम) को क़ायम न रखोगे उस वक्त तक तुम्हारा मज़बह कुछ भी नहीं और (ऐ रसूल) जो (किताब) तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से भेजी गयी है (उसका) रश्क (हसद) उनमें से बहुतेरों की सरकशी व कुफ़्र को और बढ़ा देगा तुम काफ़िरों के गिरोह पर अफ़सोस न करना
इसमें तो शक ही नहीं कि मुसलमान हो या यहूदी हकीमाना ख्याल के पाबन्द हों ख्वाह नसरानी (गरज़ कुछ भी हो) जो ख़ुदा और रोज़े क़यामत पर ईमान लाएगा और अच्छे (अच्छे) काम करेगा उन पर अलबत्ता न तो कोई ख़ौफ़ होगा न वह लोग आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
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