Qul yaaa Ahlal Kitaabi laa taghloo fee deenikum ghairal haqqi wa laa tattabi`ooo ahwaaa`a qawmin qad dalloo min qablu wa adalloo kaseeranw wa dalloo `an Sawaaa`is Sabeel
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
کہو کہ اے اہل کتاب! اپنے دین (کی بات) میں ناحق مبالغہ نہ کرو اور ایسے لوگوں کی خواہشوں کے پیچھے نہ چلو جو (خود بھی) پہلے گمراہ ہوئے اور اَور بھی اکثروں کو گمراہ کر گئے اور سیدھے رستے سے بھٹک گئے
غَيْرَ الْحَقِّ: सत्य के विपरीत, बिना किसी सत्य आधार के।
أَهْوَاء: बहुवचन है 'हवा' का, जिसका अर्थ है मन की इच्छाएँ और व्यक्तिगत आकांक्षाएँ।
سَوَاءِ السَّبِيلِ: सीधा और मध्यम मार्ग, सत्य का रास्ता।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) से कह दीजिए कि अपने धर्म में सत्य की सीमा से आगे न बढ़ो। अतिशयता और अति दोनों ही धर्म में बुरी चीज़ें हैं—चाहे कोई कमी करे या हद से ज़्यादा बढ़ जाए, दोनों ही गलत हैं। ख़ास तौर पर ईसाइयों को संबोधित करते हुए यह नसीहत है कि उन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की इज़्ज़त में अतिशयता की और उन्हें ईश्वर का पुत्र या स्वयं ईश्वर मान लिया, जबकि वे केवल एक नबी थे। यह उनका अपने धर्म में हद से बढ़ जाना था।
साथ ही, उन लोगों की इच्छाओं का पालन मत करो जो तुमसे पहले गुमराह हो चुके थे—अर्थात उनके पूर्वजों और बुज़ुर्गों की, जिन्होंने अपनी मनमानी और झूठी परंपराओं को धर्म का हिस्सा बना लिया था। उन्होंने न केवल खुद गुमराही का रास्ता अपनाया, बल्कि बहुत से लोगों को भी सत्य के मार्ग से भटकाया। जब मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पैग़ंबर बनाकर भेजा गया, तो वे उनके सीधे और न्यायसंगत मार्ग को स्वीकार करने से भी इनकार करके गुमराही पर ही डटे रहे और सीधे रास्ते से दूर हो गए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि धर्म में संतुलन और मध्यमता ही सच्चा रास्ता है। अतिशयता चाहे किसी की इज़्ज़त में हो या इबादत में, वह इंसान को गुमराही की ओर ले जाती है।
अंधी परंपरा और पूर्वजों की नक़ल करना सत्य से भटकने का बड़ा कारण है। हमें हमेशा कुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपने धर्म को समझना चाहिए, न कि केवल अपने बुज़ुर्गों की आदतों की पैरवी करनी चाहिए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने धर्म में उन लोगों की इच्छाओं और मनमानी से बचना चाहिए जो गुमराह हैं, चाहे वे कितने भी बड़े या प्रभावशाली क्यों न हों।
इस्लाम का मार्ग 'सीधा मार्ग' (सिरात-ए-मुस्तक़ीम) है—जो न अति की तरफ झुकता है और न कमी की तरफ। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।
ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए
मरियम के बेटे मसीह तो बस एक रसूल हैं और उनके क़ब्ल (और भी) बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी मॉ भी (ख़ुदा की) एक सच्ची बन्दी थी (और आदमियों की तरह) ये दोनों (के दोनों भी) खाना खाते थे (ऐ रसूल) ग़ौर तो करो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं
फिर देखो तो कि (उसपर भी उलटे) ये लोग कहॉ भटके जा रहे हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम ख़ुदा (जैसे क़ादिर व तवाना) को छोड़कर (ऐसी ज़लील) चीज़ की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख्तेयार है और न नफ़े का और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता (और सब कुछ) जानता है
ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए
बनी इसराईल में से जो लोग काफ़िर थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये (लानत उन पर पड़ी तो सिर्फ) इस वजह से कि (एक तो) उन लोगों ने नाफ़रमानी की और (फिर हर मामले में) हद से बढ़ जाते थे
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।