अल-माइदा · 76/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
قُلْ أَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا ۚ وَاللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٧٦
Qul ata`budoona min doonil laahi maa laa yamliku lakum darranw wa laa naf`aa; wallaahu Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
फिर देखो तो कि (उसपर भी उलटे) ये लोग कहॉ भटके जा रहे हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम ख़ुदा (जैसे क़ादिर व तवाना) को छोड़कर (ऐसी ज़लील) चीज़ की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख्तेयार है और न नफ़े का और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता (और सब कुछ) जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَرًّا (नुक़्सान): किसी प्रकार की हानि या बुराई पहुँचाना।
  • نَفْعًا (लाभ): किसी प्रकार का फ़ायदा या भलाई पहुँचाना।
  • السَّمِيعُ (सब कुछ सुनने वाला): अल्लाह की उस सिफ़त का नाम जो उसके सभी बंदों की बातें सुनता है।
  • العَلِيمُ (सब कुछ जानने वाला): अल्लाह की उस सिफ़त का नाम जो उसके सभी कार्यों और हालात से पूर्ण रूप से अवगत है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं: "क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसी चीज़ों की पूजा करते हो जो न तो तुम्हें कोई नुक़्सान पहुँचाने की शक्ति रखती हैं और न ही तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती हैं?" ये माबूद चाहे ईसा हों, फ़रिश्ते हों, बुत हों या कोई और चीज़ — सब अल्लाह की मख़लूक़ हैं और उनके पास न तो किसी को हानि पहुँचाने की ताक़त है और न ही किसी को फ़ायदा देने की। वे पूरी तरह से असमर्थ और लाचार हैं। जबकि अल्लाह ही वह इलाह है जो सब कुछ सुनता है — तुम्हारे कहे हर शब्द को, तुम्हारी हर दुआ को, तुम्हारी हर इबादत को — और वही सब कुछ जानता है — तुम्हारे अंदर के हालात, तुम्हारे इरादे और तुम्हारे सारे कर्म। वही अकेला है जो नुक़्सान और नफ़ा दोनों का मालिक है, और वही सच्चा माबूद है। उसके सिवा जो कुछ भी है, वह उसकी मख़लूक़ है और उसकी इबादत के क़ाबिल नहीं।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत केवल उसी की होनी चाहिए जो वास्तव में लाभ और हानि का मालिक हो — और वह केवल अल्लाह है। किसी और को पूजना, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, पूरी तरह बेकार और बेबुनियाद है।
  2. अल्लाह की सिफ़त "समी" (सुनने वाला) और "अलीम" (जानने वाला) हमें यह यक़ीन दिलाती है कि हमारी हर दुआ, हर पुकार और हर ज़रूरत उस तक पहुँचती है। वह हमारी बातें सुनता है और हमारे हालात जानता है — यह एक मोमिन के लिए सबसे बड़ी तसल्ली की बात है।
  3. यह आयत मुसलमानों को तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है और शिर्क की बेकारी को उजागर करती है। जब कोई चीज़ न नुक़्सान पहुँचा सके और न फ़ायदा, तो उसकी पूजा करना सिर्फ़ धोखा है।
  4. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में केवल अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ सुनता और जानता है, और वही हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने पर क़ादिर है।


📜 आयत 74-78 — सूरा अल-माइदा

74أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى اللَّهِ وَيَسْتَغْفِرُونَهُ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
तो ये लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और अपने (क़सूरों की) माफ़ी क्यों नहीं मॉगते हालॉकि ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
75مَّا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ الرُّسُلُ وَأُمُّهُ صِدِّيقَةٌ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ الطَّعَامَ ۗ انظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ الْآيَاتِ ثُمَّ انظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
मरियम के बेटे मसीह तो बस एक रसूल हैं और उनके क़ब्ल (और भी) बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी मॉ भी (ख़ुदा की) एक सच्ची बन्दी थी (और आदमियों की तरह) ये दोनों (के दोनों भी) खाना खाते थे (ऐ रसूल) ग़ौर तो करो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं
76قُلْ أَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا ۚ وَاللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
फिर देखो तो कि (उसपर भी उलटे) ये लोग कहॉ भटके जा रहे हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम ख़ुदा (जैसे क़ादिर व तवाना) को छोड़कर (ऐसी ज़लील) चीज़ की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख्तेयार है और न नफ़े का और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता (और सब कुछ) जानता है
77قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لَا تَغْلُوا فِي دِينِكُمْ غَيْرَ الْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوا أَهْوَاءَ قَوْمٍ قَدْ ضَلُّوا مِن قَبْلُ وَأَضَلُّوا كَثِيرًا وَضَلُّوا عَن سَوَاءِ السَّبِيلِ
ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए
78لُعِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِن بَنِي إِسْرَائِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُودَ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
बनी इसराईल में से जो लोग काफ़िर थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये (लानत उन पर पड़ी तो सिर्फ) इस वजह से कि (एक तो) उन लोगों ने नाफ़रमानी की और (फिर हर मामले में) हद से बढ़ जाते थे
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
76आयत

अनुवाद — अल-माइदा 76

सूरा अल-माइदा आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर देखो तो कि (उसपर भी उलटे) ये लोग कहॉ…

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Monday, September 28, 2026

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