Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لُعِنَ: रहमत से दूर किया गया, अभिशापित किया गया।
- عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُودَ: दाऊद (अलैहिस्सलाम) की ज़बान पर, यानी उनकी किताब (ज़बूर) में।
- وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ: और ईसा बिन मरियम (अलैहिस्सलाम) की ज़बान पर, यानी उनकी किताब (इंजील) में।
- عَصَوا: उन्होंने अवज्ञा की, हुक्म की खिलाफ़वर्ज़ी की।
- يَعْتَدُونَ: हद से बढ़ने वाले, अल्लाह की हदों को पार करने वाले।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला बयान फ़रमाता है कि बनी इसराईल में से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से महरूम कर दिया और उन पर लानत भेजी। यह लानत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की ज़बान पर उनकी किताब ज़बूर में दर्ज की गई, और ईसा बिन मरियम (अलैहिस्सलाम) की ज़बान पर उनकी किताब इंजील में भी यही एलान किया गया। यानी अल्लाह ने अपने इन दो नबियों की किताबों में साफ़ तौर पर बता दिया था कि ये काफ़िर लोग रहमत से निकाले जा चुके हैं और उन पर लानत है।
इस लानत और रहमत से महरूमी की वजह यह थी कि उन्होंने अल्लाह के हुक्मों की अवज्ञा की, उसकी नाफ़रमानी की और उसकी हदों को पार करते हुए ज़ुल्म और सरकशी पर उतर आए। उन्होंने अल्लाह की हराम की हुई चीज़ों को हलाल ठहराया, नबियों को झुठलाया और उनमें से कुछ को क़त्ल भी किया। उनका यह हाल था कि वे हद से बढ़ने वाले, ज़ालिम और सरकश लोग थे। यह लानत उनके इन्हीं आमाल का नतीजा थी, क्योंकि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग ख़ुद अपने कर्मों से अपनी तबाही का सामान करते हैं।
फ़ायदे:
- अल्लाह की रहमत उस पर है जो उसके हुक्मों की पैरवी करे, और उसकी लानत उस पर है जो उसकी नाफ़रमानी करे। यह अल्लाह का अटल क़ानून है जो पहले उम्मतों पर लागू हुआ और आख़िरी उम्मत पर भी लागू होगा।
- नाफ़रमानी और हद से बढ़ना इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देता है, चाहे वह कितना ही बड़ा इल्म वाला या किसी बड़े नस्ल से क्यों न हो।
- अल्लाह के नबी अपनी उम्मत के लिए रहमत हैं, लेकिन जो लोग हक़ को नकारें और ज़ुल्म पर अड़े रहें, उन पर नबियों की ज़बान से भी लानत आती है। यह दिखाता है कि नबियों की मुहब्बत सिर्फ़ ईमान और नेक अमल वालों के लिए है।
- यह आयत मुसलमानों को चेतावनी देती है कि वे बनी इसराईल के हालात से सबक़ लें और अल्लाह के हुक्मों की पूरी पैरवी करें, ताकि उन पर भी लानत न आए।
- अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) में कोई बदलाव नहीं होता — जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और हद से बढ़ते हैं, वे चाहे किसी भी ज़माने में हों, अल्लाह की पकड़ और लानत के हक़दार बनते हैं। यह हमें डर और उम्मीद के बीच रहना सिखाता है।
📜 आयत 76-80 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 78
सूरा अल-माइदा आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बनी इसराईल में से जो लोग काफ़िर थे उन पर…सूरा आयत 78/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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