अल-माइदा · 88/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
وَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي أَنتُم بِهِ مُؤْمِنُونَ ۝٨٨
Wa kuloo mimmaa razaqakumul laahu halaalan taiyibaa; wattaqul laahallazeee antum bihee mu`minon
📖 हिंदी अर्थ
और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने तुम्हें दी हैं उनको (शौक़ से) खाओ और जिस ख़ुदा पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَلَالًا: वह चीज़ जो शरिया में जायज़ और अनुमत हो।
  • طَيِّبًا: पवित्र, अच्छी और स्वच्छ चीज़, जिसे मन और स्वभाव नापसंद न करें।
  • اتَّقُوا: अल्लाह का भय रखें, उसके आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।

व्याख्या:

हे ईमानवालों! अल्लाह ने तुम्हें जो रोज़ी (आजीविका) दी है, उसमें से खाओ, बशर्ते वह हलाल (जायज़) हो और पवित्र (अच्छी) हो। यानी ऐसी चीज़ न हो जो हराम हो, जैसे चोरी या ज़बरदस्ती से ली गई वस्तु, या वह चीज़ जो नापाक और गंदी हो। साथ ही, अल्लाह का भय रखो और उसकी आज्ञाओं का पालन करो तथा उसकी मनाही से बचो। वही अल्लाह है जिस पर तुम ईमान रखते हो, और तुम्हारा उस पर ईमान ही तुम्हारे लिए यह अनिवार्य करता है कि तुम उसका भय रखो और उसकी निगरानी को ध्यान में रखो। यह आदेश उन लोगों के लिए है जो सच्चे दिल से उस पर ईमान रखते हैं, क्योंकि ईमान का दावा तभी सच्चा होता है जब उसके साथ तक़वा (अल्लाह का भय) हो।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि हर मुसलमान को अपनी कमाई और खान-पान में हलाल और पवित्र चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि हलाल रोज़ी ही दुआओं की क़बूलियत और अच्छे कर्मों का आधार है।
  2. ईमान और तक़वा (अल्लाह का भय) आपस में जुड़े हैं; जो व्यक्ति अल्लाह पर सच्चा ईमान रखता है, उसका ईमान उसे अल्लाह की अवज्ञा से रोकता है और उसे अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है।
  3. इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में खान-पान की स्वतंत्रता के साथ-साथ पवित्रता और वैधता की शर्त भी है, ताकि इंसान का शरीर और आत्मा दोनों पवित्र रहें।
  4. यह आयत मुसलमानों को अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने की तरफ़ भी प्रेरित करती है, क्योंकि अल्लाह ने जो कुछ दिया है, उसमें से खाना और उसका सही उपयोग करना शुक्र का एक रूप है।


📜 आयत 86-90 — सूरा अल-माइदा

86وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं
87يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تُحَرِّمُوا طَيِّبَاتِ مَا أَحَلَّ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ
ऐ ईमानदार जो पाक चीज़े ख़ुदा ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो और हद से न बढ़ो क्यों कि ख़ुदा हद से बढ़ जाने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
88وَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي أَنتُم بِهِ مُؤْمِنُونَ
और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने तुम्हें दी हैं उनको (शौक़ से) खाओ और जिस ख़ुदा पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो
89لَا يُؤَاخِذُكُمُ اللَّهُ بِاللَّغْوِ فِي أَيْمَانِكُمْ وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا عَقَّدتُّمُ الْأَيْمَانَ ۖ فَكَفَّارَتُهُ إِطْعَامُ عَشَرَةِ مَسَاكِينَ مِنْ أَوْسَطِ مَا تُطْعِمُونَ أَهْلِيكُمْ أَوْ كِسْوَتُهُمْ أَوْ تَحْرِيرُ رَقَبَةٍ ۖ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ ۚ ذَٰلِكَ كَفَّارَةُ أَيْمَانِكُمْ إِذَا حَلَفْتُمْ ۚ وَاحْفَظُوا أَيْمَانَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ख़ुदा तुम्हारे बेकार (बेकार) क़समों (के खाने) पर तो ख़ैर गिरफ्तार न करेगा मगर बाक़सद (सच्ची) पक्की क़सम खाने और उसके ख़िलाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हारी ले दे करेगा (लो सुनो) उसका जुर्माना जैसा तुम ख़ुद अपने एहलोअयाल को खिलाते हो उसी क़िस्म का औसत दर्जे का दस मोहताजों को खाना खिलाना या उनको कपड़े पहनाना या एक गुलाम आज़ाद करना है फिर जिससे यह सब न हो सके तो मैं तीन दिन के रोज़े (रखना) ये (तो) तुम्हारी क़समों का जुर्माना है जब तुम क़सम खाओ (और पूरी न करो) और अपनी क़समों (के पूरा न करने) का ख्याल रखो ख़ुदा अपने एहकाम को तुम्हारे वास्ते यूँ साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम शुक्र करो
90يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِّنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक (बुरे) शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
88आयत

अनुवाद — अल-माइदा 88

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Monday, September 28, 2026

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