अज़-ज़ारियात · 24/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ ۝٢٤
Hal ataaka hadeesu daifi Ibraaheemal mukrameen
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हदीस (حَدِيثُ): खबर, वृत्तांत या बात।
  • दैफ़ (ضَيْفِ): मेहमान।
  • मुकरमीन (الْمُكْرَمِينَ): जिन्हें सम्मानित किया गया हो, इज़्ज़त दिए गए लोग।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुम्हें हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के उन मेहमानों का वृत्तांत पहुँचा है, जिन्हें अल्लाह ने सम्मानित किया था? ये मेहमान अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते थे, जो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास एक महत्वपूर्ण कार्य से आए थे। उन्हें "मुकरमीन" (सम्मानित) इसलिए कहा गया क्योंकि वे अल्लाह के नज़दीक बहुत इज़्ज़त वाले थे, और साथ ही इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने और उनकी पत्नी ने उनकी बहुत खातिरदारी और सेवा की। उन्हें "दैफ़" (मेहमान) इसलिए कहा गया क्योंकि वे मेहमान की सूरत में आए थे।

जब ये फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के घर पहुँचे, तो उन्होंने सलाम किया और कहा: "सलामुन अलैकुम" (तुम पर शांति हो)। इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने भी जवाब में "सलाम" कहा और मन ही मन सोचा कि ये लोग तो अजनबी हैं, हम इन्हें नहीं जानते। फिर भी उन्होंने अपनी मेहमाननवाज़ी का हक़ अदा किया और जल्दी से उनके लिए खाना तैयार करवाया।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि मेहमाननवाज़ी इस्लाम की एक पाकीज़ा सुन्नत है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) जैसे अज़ीम नबी ने अनजान मेहमानों का भी इस कदर सम्मान किया कि अल्लाह ने उन्हें अपने ख़ास फ़रिश्तों से नवाज़ा। आज हमें भी चाहिए कि अपने मेहमानों की इज़्ज़त करें, चाहे वे जाने-पहचाने हों या अनजान। यह अल्लाह की रहमत और बरकत का ज़रिया है। साथ ही, यह वृत्तांत हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मेहमाननवाज़ी को कभी बेकार नहीं जाने देता — वह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। आइए, हम भी इस सुन्नत को अपनाएँ और अपने घरों को रहमत का केंद्र बनाएँ।



📜 आयत 22-26 — अज़-ज़ारियात

22وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है
23فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो
24هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए
25إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
तो कहने लगे (सलामुन अलैकुम) तो इबराहीम ने भी (अलैकुम) सलाम किया (देखा तो) ऐसे लोग जिनसे न जान न पहचान
26فَرَاغَ إِلَىٰ أَهْلِهِ فَجَاءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ
फिर अपने घर जाकर जल्दी से (भुना हुआ) एक मोटा ताज़ा बछड़ा ले आए
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 24

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Tuesday, August 18, 2026

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