अज़-ज़ारियात · 23/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ ۝٢٣
Fawa Rabbis samaaa`i wal ardi innahoo lahaqqum misla maa annakum tantiqoon
📖 हिंदी अर्थ
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ: अर्थात् शपथ है आसमान और ज़मीन के रब की।
  • إِنَّهُ لَحَقٌّ: निस्संदेह वह (बात) पूर्ण सत्य है।
  • مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ: उसी तरह जैसे तुम बोलते हो (इसमें कोई संदेह नहीं)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी पाक ज़ात की क़सम खाकर उस वादे की सच्चाई को साबित किया है जो पिछली आयात में मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए किया गया था—यानी जन्नत, इनाम, और अज़ाब का वादा। अल्लाह फ़रमाता है: "तो क़सम है आसमान और ज़मीन के रब की, यह बात (यानी क़यामत का आना, मरने के बाद जी उठना, और अच्छे-बुरे का बदला) बिल्कुल सच है, उतनी ही सच जितनी सच तुम्हारा बोलना है।"

जिस तरह तुम्हें अपने बोलने में कोई शक नहीं होता, और तुम जानते हो कि हम बोल रहे हैं, उसी तरह क़यामत और हिसाब-किताब का आना भी उतना ही यक़ीनी और सच है। यहाँ अल्लाह ने सबसे मज़बूत क़सम (अपनी ज़ात की क़सम) खाई है, ताकि बंदों के दिलों में इस सच्चाई का पूरा यक़ीन पैदा हो जाए।

यह आयत मोमिनों के लिए एक बड़ी तसल्ली और दिलासा है कि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता। जो लोग इस पर ईमान रखते हैं, वे दुनिया की मुश्किलों में भी सब्र और भरोसे के साथ ज़िंदगी गुज़ारते हैं, क्योंकि उन्हें यक़ीन है कि अल्लाह की तरफ से किया गया हर वादा पूरा होकर रहेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा और उसके वादों पर यक़ीन ही असली सुकून की जगह है। जब हमें यक़ीन हो कि मौत के बाद की ज़िंदगी सच है, और हर अच्छे-बुरे काम का बदला मिलेगा, तो हम गुनाहों से बचते हैं और नेकियों की तरफ बढ़ते हैं। यह यक़ीन हमें ज़िंदगी की हर मुश्किल में सब्र और शुक्र का रास्ता दिखाता है। अल्लाह ने अपनी क़सम खाकर हमें यह पैग़ाम दिया है कि उसका दीन और उसका वादा—सब कुछ सच है। खुशक़िस्मत हैं वे लोग जो इस सच्चाई को दिल से मान लें और अपनी ज़िंदगी को इसी के मुताबिक ढाल लें।



📜 आयत 21-25 — अज़-ज़ारियात

21وَفِي أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
और ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं
22وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है
23فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो
24هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए
25إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
तो कहने लगे (सलामुन अलैकुम) तो इबराहीम ने भी (अलैकुम) सलाम किया (देखा तो) ऐसे लोग जिनसे न जान न पहचान
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 23

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान)…

सूरा आयत 23/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए