अत-तूर · 17/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَعِيمٍ ۝١٧
Innal muttaqeena fee jannaatinw wa na`eem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المُتَّقِينَ: परहेज़गार, वे लोग जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।
  • جَنَّاتٍ: बाग़, जन्नत के बाग़।
  • نَعِيمٍ: ऐश-ओ-आराम, खुशहाली, वो सुख-सुविधाएँ जो अल्लाह अपने नेक बंदों को देंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक और परहेज़गार बंदों की खुशखबरी सुना रहा है। जब अल्लाह ने पहले काफ़िरों और गुनाहगारों के अंजाम का ज़िक्र किया, तो अब मोमिनों के हसीन अंजाम का ज़िक्र फ़रमा रहा है। परहेज़गार वो लोग हैं जो अल्लाह के हुक्मों की पालना करते हैं, उसकी मनाही से बचते हैं, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालते हैं। उनके लिए जन्नत के बाग़ हैं और ऐसा नेमत (सुख) जिसकी कोई इंतिहा नहीं, जो कभी ख़त्म नहीं होता। वे उन चीज़ों से लुत्फ़ उठाएँगे जो अल्लाह ने उन्हें अता की हैं — तरह-तरह की नेमतें, लज़्ज़तें और खुशियाँ, और अल्लाह ने उन्हें जहन्नुम के अज़ाब से भी महफ़ूज़ रखा है। ये वो इनाम है जो अल्लाह अपने उन बंदों को देगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह से डरकर ज़िंदगी गुज़ारी।

दावती पहलू:

ये आयत हर उस इंसान के लिए एक प्यारी खुशखबरी है जो अल्लाह की राह पर चलना चाहता है। अल्लाह ने अपने बंदों से वादा किया है कि जो लोग उससे डरेंगे और नेक काम करेंगे, उनके लिए ऐसी जगहें हैं जिनका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता। ये दुनिया की ज़िंदगी चंद रोज़ की है, लेकिन जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। अल्लाह का ये वादा सच्चा है, और वो अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। आइए हम सब अपनी ज़िंदगी में तक़वा (परहेज़गारी) अपनाएँ — नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, सच बोलें, लोगों के साथ भलाई करें, और अल्लाह की मनाही से बचें। ये रास्ता आसान नहीं है, लेकिन इसका अंजाम बेहद खूबसूरत है। जो लोग इस रास्ते पर चलेंगे, अल्लाह उन्हें ऐसी जगहों में दाखिल करेगा जहाँ कोई ग़म, कोई दर्द और कोई डर नहीं होगा — सिर्फ़ खुशियाँ और सुकून होगा। अल्लाह हम सबको अपने परहेज़गार बंदों में शामिल करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अत-तूर

15أَفَسِحْرٌ هَٰذَا أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ
तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं आता
16اصْلَوْهَا فَاصْبِرُوا أَوْ لَا تَصْبِرُوا سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे
17إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَعِيمٍ
बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे
18فَاكِهِينَ بِمَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَاهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
जो (जो नेअमतें) उनके परवरदिगार ने उन्हें दी हैं उनके मज़े ले रहे हैं और उनका परवरदिगार उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचाएगा
19كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जो जो कारगुज़ारियाँ तुम कर चुके हो उनके सिले में (आराम से) तख्तों पर जो बराबर बिछे हुए हैं
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अत-तूर 17

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Tuesday, August 18, 2026

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