अत-तूर · 38/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٣٨
Am lahum sullamuny yastami`oona feehi falyaati mustami`uhum bisultaanim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُلَّمٌ (सुल्लम): सीढ़ी, वह साधन जिससे ऊपर चढ़ा जाए।
  • يَسْتَمِعُونَ فِيهِ (यस्तमि'ऊना फ़ीहि): उसके द्वारा (आसमान पर चढ़कर) सुनते हों।
  • بِسُلْطَانٍ مُبِينٍ (बिसुल्तानिन मुबीन): स्पष्ट और खुली हुई दलील, प्रमाण।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन मुशरिकों को देखो जो हक़ का इनकार करते हैं और अपनी बात पर अड़े हुए हैं। क्या उनके पास कोई सीढ़ी है जिससे वे आसमान पर चढ़कर अल्लाह का वह्य (प्रकाशना) और फ़रिश्तों की बातें सुनते हों, ताकि वे अपने झूठे दावों के समर्थन में कुछ पेश कर सकें? यह कितनी बड़ी बेतुकी बात है! यदि उनका यह दावा सच्चा होता, तो उनमें से जो कोई यह दावा करता कि उसने आसमान पर जाकर कुछ सुना है, उसे चाहिए कि वह अपने इस दावे पर एक स्पष्ट और ठोस प्रमाण पेश करे, जो उसकी बात की पुष्टि करे। लेकिन वे ऐसा कभी नहीं कर सकते, क्योंकि यह सब झूठ और मनगढ़ंत बातें हैं।

यह आयत उन लोगों की बेबुनियाद दलीलों का पर्दाफाश करती है जो हक़ के सामने झुकने से इनकार करते हैं। अल्लाह तआला उन्हें चुनौती दे रहा है कि अगर तुम्हारे पास कोई सच्चाई है, तो उसका सबूत लाओ। यह एक ऐसी चुनौती है जो क़यामत तक क़ायम रहेगी — कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, इस चुनौती का जवाब नहीं दे सकता।

यह हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि हक़ और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए हमें किसी बाहरी चमत्कार या आसमानी सीढ़ी की ज़रूरत नहीं है। अल्लाह ने हमें क़ुरआन दिया है, जो सबसे बड़ा प्रमाण और स्पष्ट दलील है। यह किताब खुद अपने अंदर इतनी सच्चाई और गहराई रखती है कि कोई समझदार इंसान उसे पढ़कर यह नहीं कह सकता कि यह इंसान की रचना है।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि जब हम किसी मामले में दलील पेश करें, तो वह स्पष्ट और ठोस होनी चाहिए, न कि बेबुनियाद कल्पनाओं पर आधारित। इस्लाम हमें तर्क, प्रमाण और स्पष्टता की तालीम देता है। अल्लाह हमें हक़ को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 36-40 — सूरा अत-तूर

36أَمْ خَلَقُوا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ
या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए हैं (नहीं) बल्कि ये लोग यक़ीन ही नहीं रखते
37أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं
38أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे
39أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
40أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अत-तूर 38

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Monday, September 28, 2026

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