अत-तूर · 37/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ ۝٣٧
Am`indahum khazaaa`inu rabbika am humul musaitiroon
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अम: क्या (प्रश्नवाचक, इन्कार के अर्थ में)
  • ख़ज़ाइन: ख़ज़ानों की चाबियाँ या भण्डार
  • रब्बिक: आपके पालनहार
  • मुसैतिरून: अधिकार रखने वाले, दबदबा रखने वाले, ज़बरदस्ती करने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों से सवाल कर रहा है जो रसूलुल्लाह ﷺ की बात नहीं मानते और अपनी अकड़ में मुंह फेरते हैं। अल्लाह फरमाता है: क्या उनके पास तुम्हारे रब के ख़ज़ाने हैं? क्या वे रिज़्क़, नबुव्वत और रहमत के भण्डारों पर क़ाबू रखते हैं कि जिसे चाहें दें और जिससे चाहें रोक दें? क्या नबुव्वत और रिसालत उनके हाथ में है कि वे इसे जिसे चाहें सौंप दें और जिसे चाहें महरूम कर दें?

फिर अल्लाह पूछता है: क्या वे ही मुसैतिर हैं? यानी क्या वे ही सारी दुनिया पर हुकूमत रखते हैं, सब पर उनका दबदबा है, और वे जो चाहें कर गुज़रें? क्या सारा इख़्तियार उन्हीं के पास है?

ये सवाल उन्हें उनकी औक़ात दिखाने के लिए हैं। असल हक़ीक़त यह है कि ये लोग बिल्कुल कमज़ोर और आजिज़ हैं। इनके पास न कुछ है और न इनका कोई दबदबा है। सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। वही रिज़्क़ देता है, वही नबुव्वत देता है, वही इज़्ज़त और ज़िल्लत देता है। ये लोग तो उल्टे ख़ुद अल्लाह की रहमत के मोहताज हैं।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान को अपनी औक़ात नहीं भूलनी चाहिए। जो इंसान यह समझ ले कि सारा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के पास है, वह कभी सरकशी नहीं करेगा। अल्लाह के दीन की बात को ठुकराना, नबियों की बात न मानना, यह सब अहंकार और ग़लतफ़हमी से पैदा होता है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि रिज़्क़, ज़िंदगी, मौत, इज़्ज़त — सब अल्लाह के हाथ में है, तो हमारे दिल में अल्लाह का डर पैदा होता है और हम उसके हुक्म के आगे सर झुका देते हैं।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह ने जिसे नबुव्वत दी, वही सच्चा रास्ता दिखाने वाला है। हमें अपनी अक्ल पर भरोसा करने के बजाय अल्लाह के चुने हुए रसूलों की पैरवी करनी चाहिए। यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 35-39 — सूरा अत-तूर

35أَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ أَمْ هُمُ الْخَالِقُونَ
क्या ये लोग किसी के (पैदा किये) बग़ैर ही पैदा हो गए हैं या यही लोग (मख़लूक़ात के) पैदा करने वाले हैं
36أَمْ خَلَقُوا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ
या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए हैं (नहीं) बल्कि ये लोग यक़ीन ही नहीं रखते
37أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं
38أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे
39أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
37आयत

अनुवाद — अत-तूर 37

सूरा अत-तूर आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या…

सूरा आयत 37/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए