अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ: अपनी आँखों को सिर्फ़ अपने पतियों पर ही रखने वाली (जो किसी और की ओर नहीं देखतीं)।
- لَمْ يَطْمِثْهُنَّ: उन्हें छुआ तक नहीं, अर्थात उनका कौमार्य (बक्रियत) अभी अक्षुण्ण है।
- إِنسٌ: इंसान (आदमी)।
- جَانٌّ: जिन्न।
विस्तृत तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला जन्नत की उन हूरों (पवित्र पत्नियों) का वर्णन कर रहे हैं जो उन फ़र्शों (आरामगाहों) पर होंगी। ये हूरें ऐसी होंगी जिनकी आँखें सिर्फ़ अपने पतियों पर ही टिकी होंगी—वे किसी और की ओर देखना तक पसंद नहीं करेंगी। उनकी निगाहें पाक और नीची रहेंगी, और उनके दिल सिर्फ़ अपने जीवनसाथी से मुहब्बत से भरे होंगे। वे अपने पतियों के सिवा किसी और को नहीं चाहेंगी, न उनकी तरफ़ देखेंगी और न उनके दिल में किसी और की चाहत होगी।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि इन हूरों को उनके पतियों से पहले न किसी इंसान ने छुआ होगा और न किसी जिन्न ने। यानी वे पूरी तरह से पाक-दामन, कौमार्य (बक्रियत) में अक्षुण्ण और सिर्फ़ अपने पतियों के लिए ही होंगी। यह उनकी पाकीज़गी और इज़्ज़त की निशानी है कि वे किसी और के साथ कभी मिली नहीं होंगी—न इंसानों में से, न जिन्नात में से।
यह आयत जन्नत की उस नेमत की तरफ़ इशारा करती है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है। जिस तरह दुनिया में एक पति अपनी बीवी से वफ़ादारी और पाकीज़गी चाहता है, उसी तरह जन्नत में अल्लाह अपने बंदों को ऐसी पाक और वफ़ादार जीवनसाथी देगा जो सिर्फ़ उन्हीं की होंगी। यह उस महान इनाम की झलक है जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए रखा है।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि जन्नत की नेमतें उन लोगों के लिए हैं जो दुनिया में अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) करते हैं, अपनी निगाहों को हराम से बचाते हैं, और अपने दिलों को पाक रखते हैं। जो लोग दुनिया में अपनी निगाहें नीची रखते हैं और अपने दिलों को पاک रखते हैं, अल्लाह उन्हें जन्नत में ऐसी पाक जीवनसाथी देगा जो उनकी निगाहों को ठंडक पहुँचाएँगी।
याद रखिए, अल्लाह की रहमत और उसके इनाम का कोई अंत नहीं है। जन्नत की हर नेमत उसके बंदों के लिए उसकी मुहब्बत और कृपा का नतीजा है। आइए हम अल्लाह की इताअत करें, उसकी राह पर चलें, और उस जन्नत के हक़दार बनें जहाँ हर तरफ़ खुशी, सुकून और मुहब्बत होगी।
📜 आयत 54-58 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 56
सूरा अर-रहमान आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें (पाक दामन ग़ैर की तरफ ऑंख उठा कर न…सूरा आयत 56/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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