अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَفَهًا (सफहन): मूर्खता, नासमझी और बुद्धि की कमी के कारण।
- افْتِرَاءً (इफ्तिरा): अल्लाह पर झूठ बोलना, झूठी बात अल्लाह की तरफ निस्बत करना।
- ضَلُّوا (दल्लू): सीधे रास्ते से भटक गए।
- مُهْتَدِينَ (मुह्तदीन): हिदायत पाने वाले, सत्य मार्ग पर चलने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के भयानक अंजाम का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अपनी मूर्खता और अज्ञानता के कारण अपनी ही संतानों को क़त्ल किया। ये वे लोग थे जो जाहिलियत के दौर में अपनी बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर देते थे, डरते थे कि कहीं वे दुश्मनों के हाथों क़ैद न हों या उन पर ग़रीबी का ख़ौफ़ सवार हो जाता था। वे अपनी औलाद को अपने हाथों से मौत के घाट उतार देते थे — यह कितनी बड़ी बर्बादी और घाटे की बात है!
इसके अलावा, उन्होंने अल्लाह की दी हुई रोज़ी (जानवरों) को अपने ऊपर हराम कर लिया — जैसे बहीरा, साइबा, वसीला और हामी — और यह सब अल्लाह पर झूठ बोलकर किया। वे कहते थे कि अल्लाह ने हमें यह हुक्म दिया है, जबकि यह पूरी तरह झूठ और अल्लाह पर इफ्तिरा था। अल्लाह ने जो चीज़ें हलाल की हैं उन्हें हराम करना और जो हराम की हैं उन्हें हलाल करना — यह अल्लाह की हुकूमत में दखल देना है।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "वे यक़ीनन घाटे में रहे और कभी हिदायत न पा सके।" यानी वे न सिर्फ़ दुनिया में बुरे अंजाम से दो-चार हुए, बल्कि आख़िरत में भी उनका ठिकाना जहन्नुम है। उन्होंने सीधे रास्ते को छोड़ दिया और गुमराही में डूब गए।
इस आयत से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है: हलाल और हराम का फ़ैसला सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का है। किसी इंसान को यह हक़ नहीं कि वह अल्लाह की तरफ़ झूठी बातें जोड़कर लोगों के लिए हलाल-हराम का नियम बनाए। अल्लाह ने जो हलाल किया है वही हलाल है और जो हराम किया है वही हराम है।
आज भी कुछ लोग अपनी सोच, रिवाजों या मनमानी से चीज़ों को हराम या हलाल ठहरा लेते हैं — यह उसी जाहिलियत की तरह है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फ़ैसले को मानें, क्योंकि यही सच्ची हिदायत है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है, और जो इससे मुँह मोड़ते हैं, वही असली घाटे में रहते हैं।
याद रखिए! अल्लाह की रहमत और उसका दीन ही सच्ची भलाई का ज़रिया है। हमें अपने बच्चों से मुहब्बत करनी चाहिए, उनकी परवरिश अच्छे तरीक़े से करनी चाहिए और अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए — न कि उन्हें बर्बाद करना या उन्हें हराम ठहराना। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है।
📜 आयत 138-142 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 140
सूरा अल-अनआम आयत 140 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने अपनी औलाद को बे समझे बूझे…सूरा आयत 140/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 138–142. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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