अल-अनआम · 19/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ أَيُّ شَيْءٍ أَكْبَرُ شَهَادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهِيدٌ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ وَأُوحِيَ إِلَيَّ هَٰذَا الْقُرْآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُمْ لَتَشْهَدُونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخْرَىٰ ۚ قُل لَّا أَشْهَدُ ۚ قُلْ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَإِنَّنِي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ ۝١٩
Qul ayyu shai`in akbaru shahaadatan qulil laahu shaheedum bainee wa bainakum; wa oohiya ilaiya haazal Qur`aanu li unzirakum bihee wa mam balagh; a`innakum latashhadoona anna ma`al laahi aalihatan ukhraa; qul laaa ashhad; qul innamaa Huwa Ilaahunw Waahidunw wa innanee baree`um mimmaa tushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाज़िल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَكْبَرُ شَهَادَةً: सबसे बड़ी गवाही कौन दे सकता है, यानी सबसे महान और सबसे सत्य गवाह कौन है।
  • شَهِيدٌ: गवाह, जो सब कुछ जानता और देखता है।
  • لِأُنذِرَكُم: ताकि मैं तुम्हें सचेत करूँ और डराऊँ।
  • وَمَن بَلَغَ: और वह भी जिस तक यह क़ुरआन पहुँचे।
  • بَرِيءٌ: मैं बरी हूँ, मेरा कोई संबंध नहीं है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहें जो आपकी सच्चाई पर शक करते हैं और गवाही माँगते हैं: "बताओ, सबसे बड़ी और सबसे सच्ची गवाही किसकी हो सकती है?" अगर वे जवाब न दें, तो आप खुद कह दें: "अल्लाह ही सबसे बड़ा गवाह है।" वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह है — वह जानता है कि मैं सच्चा हूँ और जो मैं लेकर आया हूँ वह उसी का भेजा हुआ है, और वह तुम्हारे इनकार और झुठलाने को भी जानता है। उसकी गवाही सबसे बड़ी है, क्योंकि वह हर चीज़ का ज्ञान रखता है और उससे कुछ छिपा नहीं है।

अल्लाह ने मेरी ओर यह क़ुरआन इसलिए उतारा है ताकि मैं इसके ज़रिए तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराऊँ — और सिर्फ तुम्हें ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान और जिन्न को जिस तक यह क़ुरआन पहुँचे, क़यामत तक। यह क़ुरआन हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है जो इसे सुने या पढ़े। यही इसकी सार्वभौमिकता है — यह किसी एक ज़माने या एक क़ौम के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और हर ज़माने के लिए है।

फिर अल्लाह तआला मुशरिकों से पूछता है: "क्या तुम सच में गवाही देते हो कि अल्लाह के साथ और भी पूज्य (माबूद) हैं?" यह एक तंबीह (चेतावनी) है। ऐ नबी! आप उनसे कह दें: "मैं ऐसी गवाही नहीं दे सकता, क्योंकि यह झूठ है। मैं तो यह गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं — वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। और जिन चीज़ों को तुम अल्लाह का साझी बनाकर पूजते हो — चाहे वे मूर्तियाँ हों या और कुछ — मैं उन सबसे बरी हूँ, मेरा उनसे कोई संबंध नहीं।"


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही अल्लाह की है। जब हमारे पास अल्लाह का क़ुरआन है, तो हमें किसी इंसानी गवाही की ज़रूरत नहीं। यह क़ुरआन खुद एक जीती-जागती निशानी है — इसकी शिक्षाएँ, इसकी भाषा, इसकी विधियाँ और इसका संरक्षण — सब कुछ यह साबित करता है कि यह अल्लाह की किताब है। जो कोई भी इसे पढ़े और समझे, वह इसकी सच्चाई को महसूस कर सकता है। यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है — कि हम अपने जीवन में केवल अल्लाह को ही माबूद मानें, उसी से डरें, उसी से उम्मीद रखें, और उसी की इबादत करें। यही सबसे बड़ी सफलता है — क्योंकि जिसने अल्लाह को अकेला मान लिया, उसका दिल शांत हो गया, और जिसने दूसरों को साझी बनाया, वह भटक गया। आइए, हम इस आयत से सीखें कि सच्चाई के साथ खड़े रहें, चाहे दुनिया कुछ भी कहे, और अल्लाह की गवाही को अपने जीवन का आधार बनाएँ।



📜 आयत 17-21 — अल-अनआम

17وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يَمْسَسْكَ بِخَيْرٍ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
18وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाक़िफकार हकीम है
19قُلْ أَيُّ شَيْءٍ أَكْبَرُ شَهَادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهِيدٌ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ وَأُوحِيَ إِلَيَّ هَٰذَا الْقُرْآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُمْ لَتَشْهَدُونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخْرَىٰ ۚ قُل لَّا أَشْهَدُ ۚ قُلْ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَإِنَّنِي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाज़िल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो
20الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمُ ۘ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
मै तो उनसे बेज़र हूँ जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है (यहूद व नसारा) वह तो जिस तरह अपने बाल बच्चों को पहचानते है उसी तरह उस नबी (मोहम्मद) को भी पहचानते हैं (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (किसी तरह) ईमान न लाएंगें
21وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۗ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़के ज़ालिम कौन होगा और ज़ालिमों को हरगिज़ नजात न होगी
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-अनआम 19

सूरा अल-अनआम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन…

सूरा आयत 19/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए