Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَكْبَرُ شَهَادَةً: सबसे बड़ी गवाही कौन दे सकता है, यानी सबसे महान और सबसे सत्य गवाह कौन है।
- شَهِيدٌ: गवाह, जो सब कुछ जानता और देखता है।
- لِأُنذِرَكُم: ताकि मैं तुम्हें सचेत करूँ और डराऊँ।
- وَمَن بَلَغَ: और वह भी जिस तक यह क़ुरआन पहुँचे।
- بَرِيءٌ: मैं बरी हूँ, मेरा कोई संबंध नहीं है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहें जो आपकी सच्चाई पर शक करते हैं और गवाही माँगते हैं: "बताओ, सबसे बड़ी और सबसे सच्ची गवाही किसकी हो सकती है?" अगर वे जवाब न दें, तो आप खुद कह दें: "अल्लाह ही सबसे बड़ा गवाह है।" वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह है — वह जानता है कि मैं सच्चा हूँ और जो मैं लेकर आया हूँ वह उसी का भेजा हुआ है, और वह तुम्हारे इनकार और झुठलाने को भी जानता है। उसकी गवाही सबसे बड़ी है, क्योंकि वह हर चीज़ का ज्ञान रखता है और उससे कुछ छिपा नहीं है।
अल्लाह ने मेरी ओर यह क़ुरआन इसलिए उतारा है ताकि मैं इसके ज़रिए तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराऊँ — और सिर्फ तुम्हें ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान और जिन्न को जिस तक यह क़ुरआन पहुँचे, क़यामत तक। यह क़ुरआन हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है जो इसे सुने या पढ़े। यही इसकी सार्वभौमिकता है — यह किसी एक ज़माने या एक क़ौम के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और हर ज़माने के लिए है।
फिर अल्लाह तआला मुशरिकों से पूछता है: "क्या तुम सच में गवाही देते हो कि अल्लाह के साथ और भी पूज्य (माबूद) हैं?" यह एक तंबीह (चेतावनी) है। ऐ नबी! आप उनसे कह दें: "मैं ऐसी गवाही नहीं दे सकता, क्योंकि यह झूठ है। मैं तो यह गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं — वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। और जिन चीज़ों को तुम अल्लाह का साझी बनाकर पूजते हो — चाहे वे मूर्तियाँ हों या और कुछ — मैं उन सबसे बरी हूँ, मेरा उनसे कोई संबंध नहीं।"
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही अल्लाह की है। जब हमारे पास अल्लाह का क़ुरआन है, तो हमें किसी इंसानी गवाही की ज़रूरत नहीं। यह क़ुरआन खुद एक जीती-जागती निशानी है — इसकी शिक्षाएँ, इसकी भाषा, इसकी विधियाँ और इसका संरक्षण — सब कुछ यह साबित करता है कि यह अल्लाह की किताब है। जो कोई भी इसे पढ़े और समझे, वह इसकी सच्चाई को महसूस कर सकता है। यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाती है — कि हम अपने जीवन में केवल अल्लाह को ही माबूद मानें, उसी से डरें, उसी से उम्मीद रखें, और उसी की इबादत करें। यही सबसे बड़ी सफलता है — क्योंकि जिसने अल्लाह को अकेला मान लिया, उसका दिल शांत हो गया, और जिसने दूसरों को साझी बनाया, वह भटक गया। आइए, हम इस आयत से सीखें कि सच्चाई के साथ खड़े रहें, चाहे दुनिया कुछ भी कहे, और अल्लाह की गवाही को अपने जीवन का आधार बनाएँ।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 19
सूरा अल-अनआम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन…सूरा आयत 19/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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