अल-अनआम · 20/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمُ ۘ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٢٠
Allazeena aatainaa humul Kitaaba ya`rifoonahoo kamaa ya`rifoona abnaaa`ahum; allazeena khasirooo anfusahum fahum laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
मै तो उनसे बेज़र हूँ जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है (यहूद व नसारा) वह तो जिस तरह अपने बाल बच्चों को पहचानते है उसी तरह उस नबी (मोहम्मद) को भी पहचानते हैं (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (किसी तरह) ईमान न लाएंगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ: वे लोग जिन्हें हमने किताब (तौरात और इंजील) दी।
  • يَعْرِفُونَهُ: वे उसे (मुहम्मद ﷺ को) पहचानते हैं।
  • كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمْ: जैसे वे अपने बेटों को पहचानते हैं।
  • خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ: उन्होंने अपने आप को घाटे में डाला (अपने नुक़्सान का कारण बने)।
  • فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ: इसलिए वे ईमान नहीं लाते।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन यहूदियों और ईसाइयों के बारे में बताती है जिन्हें अल्लाह ने तौरात और इंजील दी थी। वे हज़रत मुहम्मद ﷺ को उनकी उन विशेषताओं और निशानियों के कारण बिल्कुल स्पष्ट रूप से पहचानते थे जो उनकी किताबों में लिखी हुई थीं। उनकी यह पहचान इतनी पक्की और स्पष्ट थी जितनी किसी व्यक्ति को अपने बेटे की पहचान होती है — जैसे एक पिता अपने बेटे को किसी और से भ्रमित नहीं करता, उसी तरह वे मुहम्मद ﷺ को उनके सच्चे नबी होने के बारे में किसी संदेह में नहीं थे। उनकी किताबों में उनके नाम, गुण, आने का समय, और उनके दीन की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से मौजूद थीं।

इसके बावजूद, उन्होंने अपनी हवस (इच्छाओं) और दुनियावी मोह की पैरवी की, अपने बड़ों की अंधी नक़ल की, और सच्चाई को ठुकरा दिया। उन्होंने अपनी जानों को घाटे में डाल दिया — यानी अपने आप को जहन्नम की आग का हक़दार बना लिया — क्योंकि उन्होंने मुहम्मद ﷺ पर और उनके लाए हुए दीन पर ईमान नहीं लाया। उनका यह इनकार ज्ञान की कमी के कारण नहीं था, बल्कि जिद, हठ और सच्चाई से मुँह मोड़ने के कारण था। यही उनका सबसे बड़ा नुक़्सान था।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को पहचानने के बाद उसे क़बूल करना हर इंसान की ज़िम्मेदारी है। ज्ञान के बावजूद इनकार करना सबसे बड़ा घाटा है।
  2. अल्लाह ने अपने नबियों के आने की ख़बरें पहले की किताबों में दीं, जिससे यह साबित होता है कि इस्लाम कोई नई किताब नहीं, बल्कि उन्हीं सच्चे दीनों की पूर्णता है जो पहले आए थे।
  3. इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि इंसान को अपनी जान को घाटे में नहीं डालना चाहिए — यानी अपने आप को अल्लाह की नाफ़रमानी से बचाना चाहिए, क्योंकि सबसे बड़ा नुक़्सान अपने आप को अल्लाह की रहमत से दूर करना है।
  4. यह आयत मुसलमानों को यक़ीन दिलाती है कि मुहम्मद ﷺ का नबूवत का दावा सच्चा है, क्योंकि उसकी गवाही पहले की किताबों में मौजूद थी, और यह हमारे ईमान की मज़बूती का ज़रिया है।
🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अल-अनआम

18وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाक़िफकार हकीम है
19قُلْ أَيُّ شَيْءٍ أَكْبَرُ شَهَادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهِيدٌ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ وَأُوحِيَ إِلَيَّ هَٰذَا الْقُرْآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُمْ لَتَشْهَدُونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخْرَىٰ ۚ قُل لَّا أَشْهَدُ ۚ قُلْ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَإِنَّنِي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाज़िल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो
20الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمُ ۘ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
मै तो उनसे बेज़र हूँ जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है (यहूद व नसारा) वह तो जिस तरह अपने बाल बच्चों को पहचानते है उसी तरह उस नबी (मोहम्मद) को भी पहचानते हैं (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (किसी तरह) ईमान न लाएंगें
21وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۗ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़के ज़ालिम कौन होगा और ज़ालिमों को हरगिज़ नजात न होगी
22وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا أَيْنَ شُرَكَاؤُكُمُ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे फिर जिन लोगों ने शिर्क किया उनसे पूछेगें कि जिनको तुम (ख़ुदा का) शरीक ख्याल करते थे कहाँ हैं
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अनुवाद — अल-अनआम 20

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Tuesday, August 18, 2026

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