अल-अनआम · 40/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ أَوْ أَتَتْكُمُ السَّاعَةُ أَغَيْرَ اللَّهِ تَدْعُونَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٤٠
Qaul ara`aytakum in ataakum `azaabul laahi aw atatkumus Saa`atu a-ghairal laahi tad`oona in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुदा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَرَأَيْتَكُمْ: मुझे बताओ, अपनी राय ज़ाहिर करो।
  • السَّاعَةُ: क़ियामत, वह समय जब सब लोग हश्र के लिए उठाए जाएँगे।
  • تَدْعُونَ: पुकारते हो, मदद माँगते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "मुझे बताओ, अगर अल्लाह की ओर से तुम पर अज़ाब आ जाए—चाहे वह दुनिया में किसी बला या मुसीबत की शक्ल में हो—या फिर क़ियामत आ जाए और तुम्हें अपने किए का सामना करना पड़े, तो उस वक़्त तुम किसे पुकारोगे? क्या तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे? हरगिज़ नहीं! उस घड़ी तुम अपने बुतों और झूठे माबूदों को भूल जाओगे और सिर्फ़ अल्लाह को पुकारोगे, क्योंकि तुम जानते हो कि सच्चा मददगार और मुसीबत टालने वाला सिर्फ़ वही है।"

यह बात उन लोगों के लिए चुनौती है जो दावा करते हैं कि उनके देवी-देवता उन्हें फ़ायदा पहुँचाते हैं या नुक़सान से बचाते हैं। अल्लाह उनसे कहता है: "अगर तुम सच्चे हो अपने इस दावे में, तो मुसीबत के वक़्त अपने उन माबूदों को पुकारकर दिखाओ।" लेकिन हक़ीक़त यह है कि जब सख़्त मुसीबत आती है, तो इंसान की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) खुद उसे अल्लाह की तरफ़ मोड़ देती है, और वह अपने बनाए हुए माबूदों को भूल जाता है। यह इस बात का सबूत है कि असली मदद और पनाह सिर्फ़ अल्लाह ही के पास है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. मुसीबत और सख़्ती के वक़्त इंसान की फ़ितरत साफ़ हो जाती है—वह सिर्फ़ अल्लाह को पुकारता है, भले ही वह दूसरे वक़्त उसे भूलता हो। यह दिखाता है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) हर इंसान की जन्मजात पहचान है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सिवा किसी और से मदद माँगना—चाहे वह बुत हो, पीर हो, या कोई और—बेकार है, क्योंकि सच्ची मुसीबत में सब झूठे सहारे छूट जाते हैं।
  3. इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह को हमेशा याद रखे, सिर्फ़ मुसीबत में नहीं, बल्कि आराम और खुशहाली में भी, ताकि उसका दिल अल्लाह से जुड़ा रहे और वह उन लोगों में से न हो जो मुसीबत भूल जाने पर अल्लाह से मुँह मोड़ लेते हैं।
  4. यह आयत मुशरिकों की हुज्जत (तर्क) को तोड़ती है और साबित करती है कि उनका शिर्क (बहुदेववाद) उनके अपने दिल की गवाही के खिलाफ़ है, क्योंकि वे खुद मुसीबत में अल्लाह को पुकारते हैं।


📜 आयत 38-42 — सूरा अल-अनआम

38وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ إِلَّا أُمَمٌ أَمْثَالُكُم ۚ مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे।
39وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِ ۗ مَن يَشَإِ اللَّهُ يُضْلِلْهُ وَمَن يَشَأْ يَجْعَلْهُ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया वह (कुफ्र के घटाटोप) ऍधेरों में गूंगें बहरे (पड़े हैं) ख़ुदा जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसे चाहे उसे सीधे ढर्रे पर लगा दे
40قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ أَوْ أَتَتْكُمُ السَّاعَةُ أَغَيْرَ اللَّهِ تَدْعُونَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुदा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे
41بَلْ إِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ إِلَيْهِ إِن شَاءَ وَتَنسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ
(दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे
42وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَاهُم بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ
और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं हम उनके पास भी बहुतेरे रसूल भेज चुके हैं फिर (जब नाफ़रमानी की) तो हमने उनको सख्ती
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-अनआम 40

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Monday, September 28, 2026

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