अल-अनआम · 83/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَتِلْكَ حُجَّتُنَا آتَيْنَاهَا إِبْرَاهِيمَ عَلَىٰ قَوْمِهِ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ ۝٨٣
Wa tilka hujjatunaaa aatainaahaaa Ibraaheema `alaa qawmih; narfa`u darajaatim man nashaaa`; inna Rabbaka Hakeemun `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और ये हमारी (समझाई बुझाई) दलीलें हैं जो हमने इबराहीम को अपनी क़ौम पर (ग़ालिब आने के लिए) अता की थी हम जिसके मरतबे चाहते हैं बुलन्द करते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार हिक़मत वाला बाख़बर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حُجَّتُنَا: हमारी दलील, प्रमाण या तर्क।
  • آتَيْنَاهَا: हमने उसे (इब्राहीम को) प्रदान की।
  • نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ: हम ऊँचे दर्जे बढ़ाते हैं।
  • حَكِيمٌ عَلِيمٌ: सब कुछ अपनी समझ-बूझ और ज्ञान के साथ करने वाला, सब कुछ जानने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

यह वही दलील है जो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने रखी थी, जब उन्होंने चाँद, सितारों और सूरज की पूजा का खंडन करते हुए यह सिद्ध किया कि ये सब मख़लूक़ हैं, इनका कोई ईश्वरीय अधिकार नहीं। यह दलील हमारी ओर से थी, हमने ही उन्हें यह तर्क-शक्ति और समझ प्रदान की थी, ताकि वे अपनी क़ौम के सामने सत्य को स्पष्ट कर सकें और उनके सारे तर्क बेकार हो जाएँ।

हम जिसे चाहते हैं, उसे ज्ञान और समझ के ऊँचे दर्जे प्रदान करते हैं, और यह हमारी इच्छा और कृपा पर निर्भर है। हे नबी! आपका रब हर मामले में हिकमत (समझदारी) से काम लेता है, और वह अपने बंदों की हालत को भली-भाँति जानता है। वह जिसे चाहता है, उसकी हैसियत और काबिलियत के अनुसार ऊँचा दर्जा देता है, और यह सब उसकी असीम ज्ञान और बुद्धि का परिणाम है।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई के लिए तर्क-पूर्ण बात करना और अंधविश्वासों का खंडन करना एक पुण्य का काम है, और अल्लाह अपने नेक बंदों को इसके लिए विशेष समझ और शक्ति प्रदान करता है।
  2. अल्लाह की कृपा से ही इंसान को ज्ञान और समझ मिलती है, इसलिए हमें उससे विनम्रता के साथ दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सही समझ और सत्य को पहचानने की तौफ़ीक़ दे।
  3. अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) और इल्म (ज्ञान) असीम है, और वह हर चीज़ को उसके सही स्थान पर रखता है। इससे हमें यह विश्वास होता है कि जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की योजना के अनुसार होता है, और उसमें हमारे लिए भलाई ही छिपी होती है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चे दीन (इस्लाम) की तरफ़ बुलाने के लिए सिर्फ़ जज़्बा ही नहीं, बल्कि सही ज्ञान और तर्क की भी ज़रूरत है, ताकि लोगों के सामने सत्य स्पष्ट हो सके।


📜 आयत 81-85 — अल-अनआम

81وَكَيْفَ أَخَافُ مَا أَشْرَكْتُمْ وَلَا تَخَافُونَ أَنَّكُمْ أَشْرَكْتُم بِاللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا ۚ فَأَيُّ الْفَرِيقَيْنِ أَحَقُّ بِالْأَمْنِ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और जिन्हें तुम ख़ुदा का शरीक बताते हो मै उन से क्यों डरुँ जब तुम इस बात से नहीं डरते कि तुमने ख़ुदा का शरीक ऐसी चीज़ों को बनाया है जिनकी ख़ुदा ने कोई सनद तुम पर नहीं नाज़िल की फिर अगर तुम जानते हो तो (भला बताओ तो सही कि) हम दोनों फरीक़ (गिरोह) में अमन क़ायम रखने का ज्यादा हक़दार कौन है
82الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُم بِظُلْمٍ أُولَٰئِكَ لَهُمُ الْأَمْنُ وَهُم مُّهْتَدُونَ
जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अपने ईमान को ज़ुल्म (शिर्क) से आलूदा नहीं किया उन्हीं लोगों के लिए अमन (व इतमिनान) है और यही लोग हिदायत याफ़ता हैं
83وَتِلْكَ حُجَّتُنَا آتَيْنَاهَا إِبْرَاهِيمَ عَلَىٰ قَوْمِهِ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और ये हमारी (समझाई बुझाई) दलीलें हैं जो हमने इबराहीम को अपनी क़ौम पर (ग़ालिब आने के लिए) अता की थी हम जिसके मरतबे चाहते हैं बुलन्द करते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार हिक़मत वाला बाख़बर है
84وَوَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ كُلًّا هَدَيْنَا ۚ وَنُوحًا هَدَيْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَمِن ذُرِّيَّتِهِ دَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ وَأَيُّوبَ وَيُوسُفَ وَمُوسَىٰ وَهَارُونَ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ वा याक़ूब (सा बेटा पोता) अता किया हमने सबकी हिदायत की और उनसे पहले नूह को (भी) हम ही ने हिदायत की और उन्हीं (इबराहीम) को औलाद से दाऊद व सुलेमान व अय्यूब व यूसुफ व मूसा व हारुन (सब की हमने हिदायत की) और नेकों कारों को हम ऐसा ही इल्म अता फरमाते हैं
85وَزَكَرِيَّا وَيَحْيَىٰ وَعِيسَىٰ وَإِلْيَاسَ ۖ كُلٌّ مِّنَ الصَّالِحِينَ
और ज़करिया व यहया व ईसा व इलियास (सब की हिदायत की (और ये) सब (ख़ुदा के) नेक बन्दों से हैं
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
83आयत

अनुवाद — अल-अनआम 83

सूरा अल-अनआम आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये हमारी (समझाई बुझाई) दलीलें हैं जो हमने इबराहीम…

सूरा आयत 83/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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