Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَطَافَ عَلَيْهَا طَائِفٌ – उस (बाग़) पर एक चक्कर लगाने वाला (आफ़त) फिरा, यानी रात में एक बला आई जिसने उसे घेर लिया।
- مِن رَّبِّكَ – आपके रब की ओर से (यानी अल्लाह की तरफ से भेजी गई)।
- وَهُمْ نَائِمُونَ – और वे (बाग़ के मालिक) सो रहे थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब उन बाग़ वालों ने यह ठान लिया कि वे सुबह होते ही फल तोड़ेंगे और ग़रीबों व मिस्कीनों को कुछ नहीं देंगे, और उन्होंने अपनी इस योजना में कोई अपवाद (इंशा अल्लाह) नहीं कहा, तो अल्लाह तआला ने उनके इस अहंकार और बुरे इरादे की सज़ा उन्हीं की नींद में भेज दी। रातों-रात, जब वे गहरी नींद में थे और उन्हें किसी बात का ज़रा भी एहसास नहीं था, आपके रब की ओर से एक आफ़त — एक आग — उस बाग़ पर फिरी और उसे इस तरह जला दिया कि वह पूरी तरह स्वाहा हो गया। यह आग रात में आई, क्योंकि रात का अंधेरा और नींद की गहराई उनके लिए अज़ाब को और भी भयानक बना देने वाली थी। वे सोते रहे और उनका सारा मेहनत-मज़दूरी का फल, उनकी सारी उम्मीदें और योजनाएँ राख बन गईं। सुबह जब वे उठे तो उन्होंने अपने बाग़ को काली रात की तरह जला हुआ पाया, जैसे कोई चीज़ जलकर कोयले जैसी काली हो जाए।
दावत और नसीहत:
यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है कि अल्लाह तआला की निगरानी और उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं है। इंसान चाहे कितनी भी योजनाएँ बना ले, चाहे कितना भी सोच-समझ ले, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला उसकी सारी तदबीरों पर भारी है। यह भी सीख है कि माल और दौलत पर घमंड नहीं करना चाहिए, और अल्लाह ने जो नेअमतें दी हैं, उनमें दूसरों का — ख़ासकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का — हक़ अदा करना चाहिए। जो लोग अपने माल में अल्लाह का हक़ नहीं देते और अपनी ताक़त पर इतराते हैं, उन्हें अल्लाह की पकड़ से डरना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और वह उस वक़्त आती है जब इंसान को उसका ज़रा भी एहसास नहीं होता। तो आओ, हम अपने माल और अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह खर्च करें, उसके बंदों के साथ भलाई करें, और हर काम में "इंशा अल्लाह" कहना न भूलें, ताकि अल्लाह हमें अपनी बरकत से नवाज़े और हमारी मेहनतों को कामयाबी दे।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 19
सूरा अल-क़लम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे…सूरा आयत 19/52 — सूरा अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़लम सुनें, सूरा अल-क़लम अनुवाद, सूरा अल-क़लम mp3, सूरा अल-क़लम pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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