अल-क़लम · 19/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
فَطَافَ عَلَيْهَا طَائِفٌ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَائِمُونَ ۝١٩
Fataafa `alaihaa taaa`i fum mir rabbika wa hum naaa`imoon
📖 हिंदी अर्थ
तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَطَافَ عَلَيْهَا طَائِفٌ – उस (बाग़) पर एक चक्कर लगाने वाला (आफ़त) फिरा, यानी रात में एक बला आई जिसने उसे घेर लिया।
  • مِن رَّبِّكَ – आपके रब की ओर से (यानी अल्लाह की तरफ से भेजी गई)।
  • وَهُمْ نَائِمُونَ – और वे (बाग़ के मालिक) सो रहे थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब उन बाग़ वालों ने यह ठान लिया कि वे सुबह होते ही फल तोड़ेंगे और ग़रीबों व मिस्कीनों को कुछ नहीं देंगे, और उन्होंने अपनी इस योजना में कोई अपवाद (इंशा अल्लाह) नहीं कहा, तो अल्लाह तआला ने उनके इस अहंकार और बुरे इरादे की सज़ा उन्हीं की नींद में भेज दी। रातों-रात, जब वे गहरी नींद में थे और उन्हें किसी बात का ज़रा भी एहसास नहीं था, आपके रब की ओर से एक आफ़त — एक आग — उस बाग़ पर फिरी और उसे इस तरह जला दिया कि वह पूरी तरह स्वाहा हो गया। यह आग रात में आई, क्योंकि रात का अंधेरा और नींद की गहराई उनके लिए अज़ाब को और भी भयानक बना देने वाली थी। वे सोते रहे और उनका सारा मेहनत-मज़दूरी का फल, उनकी सारी उम्मीदें और योजनाएँ राख बन गईं। सुबह जब वे उठे तो उन्होंने अपने बाग़ को काली रात की तरह जला हुआ पाया, जैसे कोई चीज़ जलकर कोयले जैसी काली हो जाए।

दावत और नसीहत:

यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है कि अल्लाह तआला की निगरानी और उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं है। इंसान चाहे कितनी भी योजनाएँ बना ले, चाहे कितना भी सोच-समझ ले, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला उसकी सारी तदबीरों पर भारी है। यह भी सीख है कि माल और दौलत पर घमंड नहीं करना चाहिए, और अल्लाह ने जो नेअमतें दी हैं, उनमें दूसरों का — ख़ासकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का — हक़ अदा करना चाहिए। जो लोग अपने माल में अल्लाह का हक़ नहीं देते और अपनी ताक़त पर इतराते हैं, उन्हें अल्लाह की पकड़ से डरना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और वह उस वक़्त आती है जब इंसान को उसका ज़रा भी एहसास नहीं होता। तो आओ, हम अपने माल और अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह खर्च करें, उसके बंदों के साथ भलाई करें, और हर काम में "इंशा अल्लाह" कहना न भूलें, ताकि अल्लाह हमें अपनी बरकत से नवाज़े और हमारी मेहनतों को कामयाबी दे।



📜 आयत 17-21 — सूरा अल-क़लम

17إِنَّا بَلَوْنَاهُمْ كَمَا بَلَوْنَا أَصْحَابَ الْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ
जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे
18وَلَا يَسْتَثْنُونَ
और इन्शाअल्लाह न कहा
19فَطَافَ عَلَيْهَا طَائِفٌ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَائِمُونَ
तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी
20فَأَصْبَحَتْ كَالصَّرِيمِ
तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात
21فَتَنَادَوْا مُصْبِحِينَ
फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचाने
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — अल-क़लम 19

सूरा अल-क़लम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे…

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Thursday, October 1, 2026

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