अल-हाक़्का · 17/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ ۝١٧
Wal malaku `alaaa arjaaa`ihaa; wa yahmilu `Arsha Rabbika fawqahum yawma`izin samaaniyah
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالْمَلَكُ: यहाँ "मलक" से मुराद फ़रिश्ते हैं।
  • عَلَى أَرْجَائِهَا: "अर्जाइहा" का अर्थ है आसमान के किनारे और कोने।
  • وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ: और तेरे रब का अर्श (सिंहासन) उठाए हुए होंगे।
  • فَوْقَهُمْ: उन फ़रिश्तों के ऊपर।
  • ثَمَانِيَةٌ: आठ फ़रिश्ते।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब सूर (नरसिंगा) में एक ही फूँक मारी जाएगी, और यह पहली फूँक होगी जिससे पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी, तो ज़मीन और पहाड़ अपनी जगहों से उखड़कर टकराएँगे और चूर-चूर हो जाएँगे। उसी वक़्त क़यामत बरपा हो जाएगी, और आसमान फट जाएगा। उस दिन आसमान बेहद कमज़ोर और ढीला हो जाएगा, उसमें कोई मज़बूती और सख़्ती नहीं रहेगी। फ़रिश्ते आसमान के किनारों और कोनों पर खड़े होंगे, और उस दिन तेरे रब का अर्श (सिंहासन) आठ बड़े फ़रिश्ते अपने सिरों के ऊपर उठाए हुए होंगे। ये फ़रिश्ते अल्लाह के सबसे करीबी और अज़ीम मख़लूक़ हैं, जो उसके अर्श को अपनी क़ुदरत से उठाएँगे।

फिर उस दिन तुम सब लोग अल्लाह के सामने पेश किए जाओगे, हिसाब और जज़ा (बदला) के लिए। अल्लाह पर तुम्हारी कोई बात छिपी नहीं होगी, चाहे वह कितनी ही पोशीदा (छिपी हुई) क्यों न हो। यह वो दिन है जब हर इंसान को उसके अमल का सामना करना होगा, और अल्लाह की अदालत में कोई सिफ़ारिश या रिश्तेदारी काम नहीं आएगी, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ख़ुद इजाज़त दे।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें उस अज़ीम दिन की याद दिलाती है जब सारी कायनात बदल जाएगी। आसमान फट जाएगा, ज़मीन और पहाड़ चूर-चूर हो जाएँगे, और अल्लाह का अर्श आठ फ़रिश्तों के कंधों पर होगा। यह अल्लाह की अज़मत और क़ुदरत का मंज़र है, जिसके सामने हर शख़्स झुक जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस दिन के लिए तैयारी करें, अपने अमलों को सुधारें, नेकियाँ कमाएँ और गुनाहों से बचें। यह दिन उन लोगों के लिए ख़ुशी का होगा जो अल्लाह के फरमाँबरदार हैं, और उन लोगों के लिए अफ़सोस का जो उसकी नाफ़रमानी में ज़िंदगी गुज़ारते हैं। अल्लाह हमें उस दिन के लिए अच्छी तैयारी करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 15-19 — अल-हाक़्का

15فَيَوْمَئِذٍ وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ
और आसमान फट जाएगा
16وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ
तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते उनके किनारे पर होंगे
17وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ
और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे
18يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी
19فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَيَقُولُ هَاؤُمُ اقْرَءُوا كِتَابِيَهْ
तो जिसको (उसका नामए आमाल) दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह (लोगो से) कहेगा लीजिए मेरा नामए आमाल पढ़िए
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अनुवाद — अल-हाक़्का 17

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Tuesday, August 18, 2026

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