अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ: आकाश का फट जाना, टुकड़े-टुकड़े हो जाना।
- وَاهِيَةٌ: कमज़ोर, ढीली, बेजान, जिसमें कोई मज़बूती और स्थिरता न रही हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब सूर (नरसिंगा) में पहली बार फूँक मारी जाएगी और पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी, तो उस दिन आकाश भी फट जाएगा। यह आकाश जो आज इतना मज़बूत, ऊँचा और स्थिर दिखाई देता है, उस दिन वह बिल्कुल कमज़ोर और ढीला हो जाएगा। उसमें कोई सख़्ती, कोई बंधन या कोई सहारा नहीं रहेगा। वह इस तरह फटेगा और बिखर जाएगा जैसे कोई पुराना, घिसा-पिटा कपड़ा तार-तार हो जाता है। यह उस दिन की महान घटना का एक भयानक दृश्य है, जब अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस और नाचीज़ हो जाएगी।
यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया और इसका पूरा निज़ाम कभी का स्थायी नहीं है। जिस आकाश को हम अपने ऊपर छत की तरह देखते हैं, वह भी एक दिन अल्लाह के हुक्म से फट जाएगा और कमज़ोर हो जाएगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम इस फ़ानी दुनिया के पीछे अंधे न हों, बल्कि उस दिन की तैयारी करें जब सारी मख़लूक़ात अपने रब के सामने हाज़िर होगी। जो लोग इस दिन पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम करते हैं, उनके लिए उस दिन ख़ुशी और कामयाबी है, और जो ग़ाफ़िल हैं, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें उस दिन की हिफ़ाज़त अता फ़रमाए और हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे।
📜 आयत 14-18 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 16
सूरा अल-हाक़्का आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते…सूरा आयत 16/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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