अल-हाक़्का · 16/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ ۝١٦
Wanshaqqatis samaaa`u fahiya yawma `izinw-waahiyah
📖 हिंदी अर्थ
तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते उनके किनारे पर होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ: आकाश का फट जाना, टुकड़े-टुकड़े हो जाना।
  • وَاهِيَةٌ: कमज़ोर, ढीली, बेजान, जिसमें कोई मज़बूती और स्थिरता न रही हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब सूर (नरसिंगा) में पहली बार फूँक मारी जाएगी और पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी, तो उस दिन आकाश भी फट जाएगा। यह आकाश जो आज इतना मज़बूत, ऊँचा और स्थिर दिखाई देता है, उस दिन वह बिल्कुल कमज़ोर और ढीला हो जाएगा। उसमें कोई सख़्ती, कोई बंधन या कोई सहारा नहीं रहेगा। वह इस तरह फटेगा और बिखर जाएगा जैसे कोई पुराना, घिसा-पिटा कपड़ा तार-तार हो जाता है। यह उस दिन की महान घटना का एक भयानक दृश्य है, जब अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस और नाचीज़ हो जाएगी।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया और इसका पूरा निज़ाम कभी का स्थायी नहीं है। जिस आकाश को हम अपने ऊपर छत की तरह देखते हैं, वह भी एक दिन अल्लाह के हुक्म से फट जाएगा और कमज़ोर हो जाएगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम इस फ़ानी दुनिया के पीछे अंधे न हों, बल्कि उस दिन की तैयारी करें जब सारी मख़लूक़ात अपने रब के सामने हाज़िर होगी। जो लोग इस दिन पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम करते हैं, उनके लिए उस दिन ख़ुशी और कामयाबी है, और जो ग़ाफ़िल हैं, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें उस दिन की हिफ़ाज़त अता फ़रमाए और हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-हाक़्का

14وَحُمِلَتِ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَاحِدَةً
और ज़मीन और पहाड़ उठाकर एक बारगी (टकरा कर) रेज़ा रेज़ा कर दिए जाएँगे तो उस रोज़ क़यामत आ ही जाएगी
15فَيَوْمَئِذٍ وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ
और आसमान फट जाएगा
16وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ
तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते उनके किनारे पर होंगे
17وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ
और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे
18يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 16

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Monday, September 28, 2026

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