Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تُعْرَضُونَ: तुम्हें पेश किया जाएगा (अल्लाह के सामने हिसाब के लिए)
- خَافِيَةٌ: छिपी हुई चीज़, गुप्त बात, वह रहस्य जो दिल में हो
तफ़सीर:
उस दिन—क़ियामत के दिन—तुम सब लोग अल्लाह के सामने पेश किए जाओगे, और यह पेशी ऐसी होगी कि तुममें से कोई भी छिपी हुई चीज़, कोई भी गुप्त बात, कोई भी भेद—चाहे वह दिल में छिपा हो, चाहे वह ज़ुबान से न निकला हो, चाहे वह सीने में दबा हो—अल्लाह से छिपा न रहेगा।
यह वह दिन होगा जब सारे पर्दे उठा दिए जाएँगे, सारे राज़ खुल जाएँगे। जो बातें इंसान ने दुनिया में छिपाईं, जो नीयतें उसने अपने दिल में रखीं, जो इरादे उसने किए—सब कुछ अल्लाह के सामने साफ़ और खुला होगा। अल्लाह तआला को हर चीज़ का इल्म है, वह ज़ाहिर और बातिन सब कुछ जानता है, और उस दिन वह सब कुछ सामने ला देगा।
यह दिन उन लोगों के लिए बड़ी राहत और खुशी का दिन होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह से डरकर, उसकी इबादत करके, और उसके हुक्मों पर चलकर अपनी ज़िंदगी गुज़ारी होगी। उनके लिए यह पेशी शर्मिंदगी का कारण नहीं होगी, बल्कि उनके ईमान और अच्छे आमाल का इनाम पाने का ज़रिया होगी।
लेकिन उन लोगों के लिए यह दिन बहुत सख्त और भयानक होगा जिन्होंने दुनिया में गुनाह किए, अल्लाह के हुक्मों की खिलाफ़वर्ज़ी की, और अपने गुनाहों को छिपाने की कोशिश की। उस दिन उनके सारे छिपे हुए गुनाह खुल जाएँगे, और वे शर्मिंदगी के मारे अपना मुँह न उठा सकेंगे।
नसीहत और दावत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल, हमारे दिल की हर धड़कन, हमारे दिल में उठने वाला हर ख़याल—सब कुछ अल्लाह के इल्म में है। हम चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, अपने गुनाहों को लोगों से छिपा सकते हैं, लेकिन अल्लाह से नहीं छिपा सकते।
तो क्यों न हम आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें? क्यों न हम अपने दिलों को गुनाहों से पाक कर लें? क्यों न हम उस दिन की तैयारी कर लें जब हमें अल्लाह के सामने पेश होना है?
याद रखिए, अल्लाह रहम करने वाला है। जो शख्स आज तौबा कर ले, अल्लाह उसकी तौबा कबूल कर लेता है। उस दिन के डर से हमें आज ही अपने आमाल सुधारने चाहिए, ताकि उस दिन हमारी पेशी हमारे लिए खुशी और कामयाबी का ज़रिया बने, न कि शर्मिंदगी और अज़ाब का।
अल्लाह हम सबको उस दिन की तैयारी करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 16-20 — सूरा अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 18
सूरा अल-हाक़्का आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश…सूरा आयत 18/52 — सूरा अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हाक़्का सुनें, सूरा अल-हाक़्का अनुवाद, सूरा अल-हाक़्का mp3, सूरा अल-हाक़्का pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हाक़्का
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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