अल-हाक़्का · 18/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ ۝١٨
Yawma`izin tu`radoona laa takhfaa min kum khaafiyah
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُعْرَضُونَ: तुम्हें पेश किया जाएगा (अल्लाह के सामने हिसाब के लिए)
  • خَافِيَةٌ: छिपी हुई चीज़, गुप्त बात, वह रहस्य जो दिल में हो

तफ़सीर:

उस दिन—क़ियामत के दिन—तुम सब लोग अल्लाह के सामने पेश किए जाओगे, और यह पेशी ऐसी होगी कि तुममें से कोई भी छिपी हुई चीज़, कोई भी गुप्त बात, कोई भी भेद—चाहे वह दिल में छिपा हो, चाहे वह ज़ुबान से न निकला हो, चाहे वह सीने में दबा हो—अल्लाह से छिपा न रहेगा।

यह वह दिन होगा जब सारे पर्दे उठा दिए जाएँगे, सारे राज़ खुल जाएँगे। जो बातें इंसान ने दुनिया में छिपाईं, जो नीयतें उसने अपने दिल में रखीं, जो इरादे उसने किए—सब कुछ अल्लाह के सामने साफ़ और खुला होगा। अल्लाह तआला को हर चीज़ का इल्म है, वह ज़ाहिर और बातिन सब कुछ जानता है, और उस दिन वह सब कुछ सामने ला देगा।

यह दिन उन लोगों के लिए बड़ी राहत और खुशी का दिन होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह से डरकर, उसकी इबादत करके, और उसके हुक्मों पर चलकर अपनी ज़िंदगी गुज़ारी होगी। उनके लिए यह पेशी शर्मिंदगी का कारण नहीं होगी, बल्कि उनके ईमान और अच्छे आमाल का इनाम पाने का ज़रिया होगी।

लेकिन उन लोगों के लिए यह दिन बहुत सख्त और भयानक होगा जिन्होंने दुनिया में गुनाह किए, अल्लाह के हुक्मों की खिलाफ़वर्ज़ी की, और अपने गुनाहों को छिपाने की कोशिश की। उस दिन उनके सारे छिपे हुए गुनाह खुल जाएँगे, और वे शर्मिंदगी के मारे अपना मुँह न उठा सकेंगे।

नसीहत और दावत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल, हमारे दिल की हर धड़कन, हमारे दिल में उठने वाला हर ख़याल—सब कुछ अल्लाह के इल्म में है। हम चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, अपने गुनाहों को लोगों से छिपा सकते हैं, लेकिन अल्लाह से नहीं छिपा सकते।

तो क्यों न हम आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें? क्यों न हम अपने दिलों को गुनाहों से पाक कर लें? क्यों न हम उस दिन की तैयारी कर लें जब हमें अल्लाह के सामने पेश होना है?

याद रखिए, अल्लाह रहम करने वाला है। जो शख्स आज तौबा कर ले, अल्लाह उसकी तौबा कबूल कर लेता है। उस दिन के डर से हमें आज ही अपने आमाल सुधारने चाहिए, ताकि उस दिन हमारी पेशी हमारे लिए खुशी और कामयाबी का ज़रिया बने, न कि शर्मिंदगी और अज़ाब का।

अल्लाह हम सबको उस दिन की तैयारी करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-हाक़्का

16وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ
तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते उनके किनारे पर होंगे
17وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ
और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे
18يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी
19فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَيَقُولُ هَاؤُمُ اقْرَءُوا كِتَابِيَهْ
तो जिसको (उसका नामए आमाल) दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह (लोगो से) कहेगा लीजिए मेरा नामए आमाल पढ़िए
20إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ
तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 18

सूरा अल-हाक़्का आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश…

सूरा आयत 18/52 — सूरा अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हाक़्का सुनें, सूरा अल-हाक़्का अनुवाद, सूरा अल-हाक़्का mp3, सूरा अल-हाक़्का pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए