अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मलकूत – राज्य, सत्ता और पूर्ण अधिकार।
- अजल – मृत्यु का समय, आयु की अवधि।
- इक़्तरब – निकट आ गया, समीप हो गया।
तफ़सीर:
क्या इन लोगों ने कभी आसमानों और ज़मीन के उस विशाल राज्य पर नज़र नहीं डाली जो अल्लाह के क़ब्ज़े में है? क्या उन्होंने उन तमाम चीज़ों पर ग़ौर नहीं किया जो अल्लाह ने पैदा की हैं – ये बेशुमार मख़लूक़ात, ये बेपनाह कायनात, ये निज़ाम जो कभी बिगड़ता नहीं? क्या उन्होंने कभी सोचा कि जिस ज़ात ने यह सब बनाया है, उसकी क़ुदरत के आगे उनका अपना जीवन कितना छोटा और कमज़ोर है?
अल्लाह तआला इन्सान को जगा रहा है कि वो अपनी आँखें खोले, अपने दिल की निगाह से देखे। ये सितारे, ये पहाड़, ये समुन्दर, ये पेड़-पौधे, ये जानवर, ये इंसान का अपना बदन – हर चीज़ अल्लाह की कुदरत की निशानी है। जो शख्स इन निशानियों पर ग़ौर करे, उसके दिल में यक़ीन पैदा हो जाता है कि यह सब कुछ अपने आप नहीं बना, बल्कि एक हकीम और क़ादिर ख़ालिक़ ने इसे बनाया है।
और फिर अल्लाह तआला एक बहुत ही अहम बात की तरफ़ इशारा करता है – वो ये कि इन लोगों की मौत का वक़्त शायद बहुत करीब आ चुका है। इंसान को मालूम नहीं कि उसकी ज़िंदगी की आख़िरी साँस कब आ जाए। अगर वो आज ईमान नहीं लाता, तो कल क्या पता कि उसे मौक़ा मिले या न मिले। ये एक बहुत प्यार भरी तनबीह है – कि ऐ बन्दे! तू अपनी मौत से पहले अपने रब की तरफ़ पलट आ, तौबा कर ले, ईमान ले आ, क्योंकि मौत का वक़्त किसी को मालूम नहीं।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: अगर ये लोग क़ुरआन पर ईमान नहीं लाते, तो फिर किस किताब पर ईमान लाएँगे? क़ुरआन के बाद कोई और किताब नहीं आनी, और हमारे नबी ﷺ के बाद कोई और नबी नहीं आना। यही आख़िरी पैग़ाम है, यही आख़िरी किताब है। जो इसे नहीं मानता, उसके पास ईमान लाने के लिए और क्या बचा है?
प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें बुला रही है कि हम अपने आस-पास देखें, अल्लाह की बनाई हर चीज़ पर ग़ौर करें। हर पत्ते का हिलना, हर साँस का आना-जाना, हर दिल की धड़कन – सब अल्लाह की तरफ़ इशारा कर रहा है। और सबसे बड़ी बात, हम अपनी मौत को याद रखें। मौत की याद इंसान को सीधे रास्ते पर लाती है, उसे ग़ाफ़िल नहीं रहने देती। आओ हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, और क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।
📜 आयत 183-187 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 185
सूरा अल-आराफ आयत 185 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और…सूरा आयत 185/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 183–187. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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