अल-आराफ · 185/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أَوَلَمْ يَنظُرُوا فِي مَلَكُوتِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيْءٍ وَأَنْ عَسَىٰ أَن يَكُونَ قَدِ اقْتَرَبَ أَجَلُهُمْ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَهُ يُؤْمِنُونَ ۝١٨٥
Awalam yanzuroo fee malakootis samaawaati wal ardi wa maa khalaqal laahu min shai`inw wa an `asaaa ai yakoona qadiqtaraba ajaluhum fabi aiyi hadeesim ba`dahoo yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और ख़ुदा की पैदा की हुई चीज़ों में ग़ौर नहीं किया और न इस बात में कि यायद उनकी मौत क़रीब आ गई हो फिर इतना समझाने के बाद (भला) किस बात पर ईमान लाएंगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मलकूत – राज्य, सत्ता और पूर्ण अधिकार।
  • अजल – मृत्यु का समय, आयु की अवधि।
  • इक़्तरब – निकट आ गया, समीप हो गया।

तफ़सीर:

क्या इन लोगों ने कभी आसमानों और ज़मीन के उस विशाल राज्य पर नज़र नहीं डाली जो अल्लाह के क़ब्ज़े में है? क्या उन्होंने उन तमाम चीज़ों पर ग़ौर नहीं किया जो अल्लाह ने पैदा की हैं – ये बेशुमार मख़लूक़ात, ये बेपनाह कायनात, ये निज़ाम जो कभी बिगड़ता नहीं? क्या उन्होंने कभी सोचा कि जिस ज़ात ने यह सब बनाया है, उसकी क़ुदरत के आगे उनका अपना जीवन कितना छोटा और कमज़ोर है?

अल्लाह तआला इन्सान को जगा रहा है कि वो अपनी आँखें खोले, अपने दिल की निगाह से देखे। ये सितारे, ये पहाड़, ये समुन्दर, ये पेड़-पौधे, ये जानवर, ये इंसान का अपना बदन – हर चीज़ अल्लाह की कुदरत की निशानी है। जो शख्स इन निशानियों पर ग़ौर करे, उसके दिल में यक़ीन पैदा हो जाता है कि यह सब कुछ अपने आप नहीं बना, बल्कि एक हकीम और क़ादिर ख़ालिक़ ने इसे बनाया है।

और फिर अल्लाह तआला एक बहुत ही अहम बात की तरफ़ इशारा करता है – वो ये कि इन लोगों की मौत का वक़्त शायद बहुत करीब आ चुका है। इंसान को मालूम नहीं कि उसकी ज़िंदगी की आख़िरी साँस कब आ जाए। अगर वो आज ईमान नहीं लाता, तो कल क्या पता कि उसे मौक़ा मिले या न मिले। ये एक बहुत प्यार भरी तनबीह है – कि ऐ बन्दे! तू अपनी मौत से पहले अपने रब की तरफ़ पलट आ, तौबा कर ले, ईमान ले आ, क्योंकि मौत का वक़्त किसी को मालूम नहीं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: अगर ये लोग क़ुरआन पर ईमान नहीं लाते, तो फिर किस किताब पर ईमान लाएँगे? क़ुरआन के बाद कोई और किताब नहीं आनी, और हमारे नबी ﷺ के बाद कोई और नबी नहीं आना। यही आख़िरी पैग़ाम है, यही आख़िरी किताब है। जो इसे नहीं मानता, उसके पास ईमान लाने के लिए और क्या बचा है?

प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें बुला रही है कि हम अपने आस-पास देखें, अल्लाह की बनाई हर चीज़ पर ग़ौर करें। हर पत्ते का हिलना, हर साँस का आना-जाना, हर दिल की धड़कन – सब अल्लाह की तरफ़ इशारा कर रहा है। और सबसे बड़ी बात, हम अपनी मौत को याद रखें। मौत की याद इंसान को सीधे रास्ते पर लाती है, उसे ग़ाफ़िल नहीं रहने देती। आओ हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, और क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।



📜 आयत 183-187 — अल-आराफ

183وَأُمْلِي لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِي مَتِينٌ
और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूंगा बेशक मेरी तद्बीर (पुख्ता और) मज़बूत है
184أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا ۗ مَا بِصَاحِبِهِم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
क्या उन लोगों ने इतना भी ख्याल न किया कि आख़िर उनके रफीक़ (मोहम्मद ) को कुछ जुनून तो नहीं वह तो बस खुल्लम खुल्ला (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाले हैं
185أَوَلَمْ يَنظُرُوا فِي مَلَكُوتِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيْءٍ وَأَنْ عَسَىٰ أَن يَكُونَ قَدِ اقْتَرَبَ أَجَلُهُمْ ۖ فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَهُ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और ख़ुदा की पैदा की हुई चीज़ों में ग़ौर नहीं किया और न इस बात में कि यायद उनकी मौत क़रीब आ गई हो फिर इतना समझाने के बाद (भला) किस बात पर ईमान लाएंगें
186مَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَلَا هَادِيَ لَهُ ۚ وَيَذَرُهُمْ فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे फिर उसका कोई राहबर नहीं और उन्हीं की सरकशी (व शरारत) में छोड़ देगा कि सरगरदॉ रहें
187يَسْأَلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَاهَا ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ رَبِّي ۖ لَا يُجَلِّيهَا لِوَقْتِهَا إِلَّا هُوَ ۚ ثَقُلَتْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ لَا تَأْتِيكُمْ إِلَّا بَغْتَةً ۗ يَسْأَلُونَكَ كَأَنَّكَ حَفِيٌّ عَنْهَا ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुमसे लोग क़यामत के बारे में पूछा करते हैं कि कहीं उसका कोई वक्त भी तय है तुम कह दो कि उसका इल्म बस फक़त पररवदिगार ही को है वही उसके वक्त मुअय्यन पर उसको ज़ाहिर कर देगा। वह सारे आसमान व ज़मीन में एक कठिन वक्त होगा वह तुम्हारे पास पस अचानक आ जाएगी तुमसे लोग इस तरह पूछते हैं गोया तुम उनसे बखूबी वाक़िफ हो तुम (साफ) कह दो कि उसका इल्म बस ख़ुदा ही को है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते
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अनुवाद — अल-आराफ 185

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Tuesday, August 18, 2026

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