Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مِن جِنَّةٍ: पागलपन, उन्माद या सनक।
- نَذِيرٌ: डराने वाला, सचेत करने वाला।
- مُبِينٌ: स्पष्ट, प्रत्यक्ष, जिसका उद्देश्य और बात साफ़ हो।
विस्तृत व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों पर अफसोस और हैरानी व्यक्त कर रहा है जो पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की दावत को झुठलाते हैं। अल्लाह उनसे कहता है: क्या ये लोग कभी सोचते-विचारते नहीं? क्या वे अपनी अक्ल और दिमाग़ का इस्तेमाल नहीं करते? अगर वे ज़रा भी ग़ौर करते तो उन्हें साफ़ मालूम हो जाता कि उनके साथी (मुहम्मद ﷺ) को कोई पागलपन या दीवानगी नहीं है। वे उन्हें जीवन भर जानते थे — उनकी सच्चाई, अमानतदारी, समझदारी और नेक चाल-चलन उनसे छिपा नहीं था।
यह आरोप कि वे पागल हैं, महज़ एक बहाना था जो उन्होंने सच्चाई को क़ुबूल करने से बचने के लिए गढ़ा था। अल्लाह स्पष्ट करता है कि मुहम्मद ﷺ पागल नहीं हैं, बल्कि वे अल्लाह के भेजे हुए स्पष्ट चेतावनी देने वाले (नबी) हैं। उनका काम केवल यह है कि लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराएँ और उन्हें सीधा रास्ता दिखाएँ। उनका पैग़ाम साफ़, खुला और समझने में आसान है — उसमें कोई रहस्य या उलझन नहीं।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हर मामले में अक्ल और दिमाग़ का इस्तेमाल करना चाहिए। अंधी तक़्लीद या पूर्वाग्रह से बचकर सच्चाई को परखना चाहिए।
- पैग़म्बरों पर लगाए गए झूठे आरोप (जैसे पागलपन, जादूगरी) कोई नई बात नहीं है। यह हर ज़माने में मुख़ालिफ़ों का तरीक़ा रहा है। इसलिए हमें सच्चाई की पहचान उसके प्रमाणों से करनी चाहिए, न कि दुश्मनों के प्रचार से।
- यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम का पैग़ाम स्पष्ट और समझने योग्य है। इसमें कोई अस्पष्टता नहीं। जो लोग सच्चे दिल से सोचेंगे, वे इसकी सच्चाई को ज़रूर पहचान लेंगे।
- पैग़म्बर ﷺ की सबसे बड़ी खूबी उनकी अमानतदारी और सच्चाई थी, जो उनके दुश्मनों ने भी मानी। यह हमारे लिए नसीहत है कि सच्चाई और अमानतदारी ही सबसे बड़ी दलील है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने नबी ﷺ पर पूरा भरोसा और मुहब्बत रखनी चाहिए, और उनके लाए हुए पैग़ाम को पूरे यक़ीन के साथ क़ुबूल करना चाहिए।
📜 आयत 182-186 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 184
सूरा अल-आराफ आयत 184 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने इतना भी ख्याल न किया कि…सूरा आयत 184/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 182–186. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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