अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُضْلِلِ: गुमराह कर दे, हिदायत से वंचित कर दे।
- هَادِي: मार्गदर्शक, हिदायत देने वाला।
- يَذَرُهُمْ: उन्हें छोड़ देता है।
- طُغْيَانِهِمْ: उनकी सरकशी, हद से गुज़र जाना, कुफ़्र और ज़ुल्म में चरम सीमा।
- يَعْمَهُونَ: भटकते हुए, हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहना, अंधों की तरह टटोलते फिरना।
तफ़सीर (व्याख्या):
जिस व्यक्ति को अल्लाह तआला ने हिदायत से महरूम कर दिया और उसे गुमराही में छोड़ दिया, तो उसे कोई मार्गदर्शक नहीं मिल सकता। कोई भी उसे सीधे रास्ते पर नहीं ला सकता, चाहे वह कितना ही बड़ा दानिश्वर, नसीहत करने वाला या पैग़म्बर ही क्यों न हो। यह अल्लाह का क़ानून है कि जब कोई बंदा हक़ को जानबूझकर ठुकरा देता है और सत्य के सामने अहंकार करता है, तो अल्लाह उसके दिल पर मुहर लगा देता है और उसे उसकी सरकशी में छोड़ देता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह ऐसे लोगों को उनकी सरकशी और कुफ़्र की हालत में छोड़ देता है, जिसमें वे हैरान और परेशान होकर भटकते रहते हैं। वे न तो किसी सही रास्ते को पा सकते हैं और न ही अपनी गुमराही से निकलने का रास्ता देख पाते हैं। वे अंधों की तरह अंधेरे में टटोलते फिरते हैं, हर तरफ़ भटकते हैं, मगर सच्चाई उन्हें कहीं नहीं मिलती। यह उनके अपने कर्मों और हठधर्मिता का स्वाभाविक परिणाम है कि अल्लाह उन्हें उनकी ज़िद और सरकशी पर छोड़ देता है।
फ़ायदे (सीख):
- हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है — यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची हिदायत सिर्फ़ अल्लाह ही दे सकता है। इसलिए हमें हर वक़्त उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए और उसके सामने अपनी आजिज़ी और इन्कसारी का इज़हार करना चाहिए।
- हक़ को ठुकराने का अंजाम बहुत भयानक है — जो लोग सत्य को जानबूझकर नकारते हैं और उसके सामने अहंकार करते हैं, उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा यही है कि अल्लाह उन्हें उनकी गुमराही पर छोड़ देता है। यह किसी आग या अज़ाब से बढ़कर है, क्योंकि गुमराही में भटकना ही सबसे बड़ी मुसीबत है।
- इंसान को अपनी ज़िद और हठधर्मिता से बचना चाहिए — यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपनी राय और अहंकार को हक़ पर तरजीह न दें। जब सच्चाई सामने आ जाए, तो उसे खुशी-खुशी क़बूल कर लेना चाहिए, वरना अंजाम बहुत बुरा होता है।
- अल्लाह की रहमत और हिदायत की क़द्र करनी चाहिए — जब हम देखते हैं कि अल्लाह ने हमें इस्लाम और ईमान की नेअमत दी है, तो हमें इसका शुक्र अदा करना चाहिए और इस हिदायत पर क़ायम रहने की कोशिश करनी चाहिए। यह सबसे बड़ी नेअमत है, जिसकी कोई क़ीमत नहीं।
- दूसरों की हिदायत के लिए दुआ करना — यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जो लोग गुमराही में हैं, उनके लिए हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह उन्हें हिदायत दे, क्योंकि हिदायत सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। हमारा काम नसीहत करना है, और हिदायत देना अल्लाह का काम है।
📜 आयत 184-188 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 186
सूरा अल-आराफ आयत 186 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे फिर उसका कोई राहबर…सूरा आयत 186/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 184–188. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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