Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمَلَأُ: क़ौम के बड़े-बड़े सरदार और प्रतिष्ठित लोग।
- ضَلَالٍ: सत्य से भटकना, गुमराही, सीधे मार्ग से हट जाना।
- مُبِينٍ: स्पष्ट, प्रत्यक्ष, जो किसी पर छिपा न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उन्हें मूर्तिपूजा से रोका, तो उनकी क़ौम के सरदारों और बुज़ुर्गों ने — जो अपनी सामाजिक हैसियत और धन-दौलत के कारण लोगों की नज़रों में बड़े माने जाते थे — उन्हें जवाब देते हुए कहा: "ऐ नूह! हम तो तुम्हें साफ़-साफ़ गुमराही में देख रहे हैं।" उनका कहना था कि तुमने अपने बाप-दादा का रास्ता छोड़ दिया है और एक नई बात लेकर आए हो जो हमारी समझ में बिल्कुल ग़लत और सत्य से दूर है। उन्होंने अपनी इस बात को "मुबीन" (स्पष्ट) कहा, यानी उनके अनुसार यह गुमराही इतनी ज़ाहिर थी कि उसमें किसी संदेह की गुंजाइश ही नहीं थी। यह उनके अहंकार और हठधर्मिता का प्रमाण था कि उन्होंने नूह (अलैहिस्सलाम) की सच्ची बात को सुनने और समझने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि उल्टा उन्हें ही गुमराह कह दिया। यह स्थिति हर युग में उन लोगों की रही है जो सत्य के दावेदारों को अपनी मनमानी राय से परखते हैं, न कि तर्क और प्रमाण से।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहना: जब एक नबी को उसकी क़ौम के बड़े लोग गुमराह कहते हैं, तो यह साबित करता है कि सत्य का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। मुसलमान को चाहिए कि वह लोगों की निंदा और उपहास की परवाह किए बिना सत्य पर क़ायम रहे।
- बड़ों की राय हमेशा सही नहीं होती: किसी भी समाज के सरदार और प्रतिष्ठित लोग गलती पर हो सकते हैं। इसलिए सच्चाई को उनकी राय से नहीं, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना चाहिए।
- विनम्रता से सत्य को सुनना: जो लोग अपने को बड़ा समझते हैं, वे अक्सर सत्य को स्वीकार नहीं कर पाते। हमें चाहिए कि हम अपने से छोटे या कमतर समझे जाने वाले लोगों की अच्छी बात को भी खुले दिल से सुनें।
- नबियों की सहनशीलता: हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के इस कठोर जवाब पर धैर्य से काम लिया और उन्हें समझाते रहे। यह हमें सिखाता है कि दूसरों को सत्य की ओर बुलाते समय नरमी और सब्र से काम लेना चाहिए, चाहे सामने वाला कितना ही कठोर क्यों न हो।
- अहंकार का अंजाम: क़ौम के सरदारों का यह रवैया बताता है कि अहंकार और अपनी बड़ाई का भ्रम इंसान को सत्य से दूर कर देता है। इससे बचना चाहिए और हमेशा अल्लाह के सामने अपनी नम्रता बनाए रखनी चाहिए।
📜 आयत 58-62 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 60
सूरा अल-आराफ आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो…सूरा आयत 60/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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