अल-जिन्न · 15/28
अनुवाद उच्चारण — अल-जिन्न
وَأَمَّا الْقَاسِطُونَ فَكَانُوا لِجَهَنَّمَ حَطَبًا ۝١٥
Wa ammal qaasitoona fa kaanoo li jahannama hatabaa
📖 हिंदी अर्थ
नाफरमान तो वह जहन्नुम के कुन्दे बने

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-क़ासितून (القاسطون): अत्याचारी, सत्य से भटकने वाले, इंसाफ़ छोड़ने वाले।
  • हतबन (حطبًا): ईंधन, लकड़ी जो आग जलाने के काम आती है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला जिन्नात के उन गिरोहों का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अपने नबी की दावत सुनकर ईमान क़ुबूल किया था। जिन्नात ने अपनी क़ौम के बारे में बताया कि हम में से कुछ नेक और फ़रमाँबरदार हैं, और कुछ अत्याचारी और सत्य से भटके हुए हैं। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जो लोग सत्य से भटक गए और अत्याचार का रास्ता अपनाया, उन्होंने हक़ को छोड़कर बातिल को अपना लिया, और अपने कुफ़्र और ज़ुल्म की वजह से वे जहन्नम की आग के लिए ईंधन बन जाएँगे। जिस तरह लकड़ी आग को भड़काती है, उसी तरह ये लोग क़ियामत के दिन जहन्नम की आग को और तेज़ करेंगे और उसमें हमेशा के लिए जलते रहेंगे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि इंसान और जिन्न दोनों में से जो भी अल्लाह की इताअत से मुँह मोड़ेगा और ज़ुल्म व सरकशी पर क़ायम रहेगा, उसका अंजाम जहन्नम की आग है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए खुला है। जो भी अपनी ग़लती का एहसास करके अल्लाह की तरफ़ लौट आए, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसे जन्नत की राह दिखाता है। यही वह महान दया है जो इस्लाम हर इंसान को देता है — चाहे वह कितना ही गुनाहगार क्यों न हो, जब तक वह साँस ले रहा है, तौबा का दरवाज़ा उसके लिए खुला है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में सीधे रास्ते पर चलें, अल्लाह के हुक्मों का पालन करें और अपने अंजाम को याद रखें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और ज़ुल्म फैलाते हैं, वे आख़िरत में अपने किए की सज़ा पाएँगे। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 13-17 — अल-जिन्न

13وَأَنَّا لَمَّا سَمِعْنَا الْهُدَىٰ آمَنَّا بِهِ ۖ فَمَن يُؤْمِن بِرَبِّهِ فَلَا يَخَافُ بَخْسًا وَلَا رَهَقًا
और ये कि जब हमने हिदायत (की किताब) सुनी तो उन पर ईमान लाए तो जो शख़्श अपने परवरदिगार पर ईमान लाएगा तो उसको न नुक़सान का ख़ौफ़ है और न ज़ुल्म का
14وَأَنَّا مِنَّا الْمُسْلِمُونَ وَمِنَّا الْقَاسِطُونَ ۖ فَمَنْ أَسْلَمَ فَأُولَٰئِكَ تَحَرَّوْا رَشَدًا
और ये कि हम में से कुछ लोग तो फ़रमाबरदार हैं और कुछ लोग नाफ़रमान तो जो लोग फ़रमाबरदार हैं तो वह सीधे रास्ते पर चलें और रहें
15وَأَمَّا الْقَاسِطُونَ فَكَانُوا لِجَهَنَّمَ حَطَبًا
नाफरमान तो वह जहन्नुम के कुन्दे बने
16وَأَن لَّوِ اسْتَقَامُوا عَلَى الطَّرِيقَةِ لَأَسْقَيْنَاهُم مَّاءً غَدَقًا
और (ऐ रसूल तुम कह दो) कि अगर ये लोग सीधी राह पर क़ायम रहते तो हम ज़रूर उनको अलग़ारों पानी से सेराब करते
17لِّنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَمَن يُعْرِضْ عَن ذِكْرِ رَبِّهِ يَسْلُكْهُ عَذَابًا صَعَدًا
ताकि उससे उनकी आज़माईश करें और जो शख़्श अपने परवरदिगार की याद से मुँह मोड़ेगा तो वह उसको सख्त अज़ाब में झोंक देगा
अल-जिन्नकुरान सूची
28आयत
मक्कीRevelation
15आयत

अनुवाद — अल-जिन्न 15

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Tuesday, August 18, 2026

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