अल-मुद्दस्सिर · 54/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ ۝٥٤
Kallaaa innahoo tazkirah
📖 हिंदी अर्थ
हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कल्ला (कल्ला): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है — यह उन लोगों को झिड़कने और रोकने के लिए है जो क़ुरआन से मुँह मोड़ते हैं।
  • इन्नहू (इन्नहू): बेशक वह (यानी क़ुरआन)।
  • तज़्किरा (तज़्किरा): नसीहत, याद दिलाने वाली चीज़, वह चीज़ जो इंसान को उसके रब की याद दिलाए और उसे सीधे रास्ते पर लाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों को जवाब दे रहा है जो क़ुरआन को जादू या इंसानी कलाम कहते थे और उससे मुँह मोड़ते थे। अल्लाह फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यानी ऐसा बिल्कुल नहीं है जैसा ये लोग कहते हैं। यह क़ुरआन कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि एक पूरी नसीहत और याद दहानी है।

यह क़ुरआन इंसान को उसके रब की याद दिलाता है, उसे बताता है कि वह क्यों पैदा किया गया है, उसका असली मक़सद क्या है, और उसे किस रास्ते पर चलना चाहिए। यह एक ऐसी नसीहत है जो हर उस दिल के लिए काफ़ी है जो सच्चाई की तलाश में है — बशर्ते वह इसे ध्यान से सुने और उस पर अमल करे।

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन की हिदायत हर उस शख्स के लिए खुली है जो नसीहत हासिल करना चाहे। अल्लाह ने इस किताब को आसान कर दिया है, और जो भी इसे पढ़ेगा और समझेगा, उसे ज़िंदगी का सही रास्ता मिल जाएगा।

लेकिन याद रखिए — हिदायत पाना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है, और जो उसकी तरफ़ सच्चे दिल से रुजू करता है, अल्लाह उसके दिल को खोल देता है। यही वह रहमत है जो हमें रोज़ अपनी दुआओं में माँगनी चाहिए।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन हमारे लिए कितनी बड़ी नेमत है। यह सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी बदलने के लिए उतारा गया है। जो इसे पढ़ता है, अल्लाह उसे याद दिलाता है — और जो अल्लाह की याद में आ जाए, उसका दिल कभी गुमराह नहीं हो सकता।

आइए, हम इस नसीहत को अपने दिलों में उतारें, इसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी की चाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 52-56 — अल-मुद्दस्सिर

52بَلْ يُرِيدُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً
असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ
53كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ الْآخِرَةَ
ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते
54كَلَّا إِنَّهُ تَذْكِرَةٌ
हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है
55فَمَن شَاءَ ذَكَرَهُ
तो जो चाहे उसे याद रखे
56وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَىٰ وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ
और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीRevelation
54आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 54

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है

सूरा आयत 54/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए