अन-नबा · 29/40
अनुवाद उच्चारण — अन-नबा
وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا ۝٢٩
Wa kulla shai-in ahsai naahu kitaa ba
📖 हिंदी अर्थ
और हमने हर चीज़ को लिख कर मनज़बत कर रखा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَحْصَيْنَاهُ: हमने गिन लिया, संरक्षित कर लिया, पूरी तरह दर्ज कर लिया।
  • كِتَابًا: लिखित रूप में, एक रिकॉर्ड के रूप में।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि उन्होंने हर चीज़ को गिन लिया है और उसे एक किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में दर्ज कर दिया है। यानी इंसान के हर अमल—चाहे वह छोटा हो या बड़ा, खुला हो या छिपा—सब कुछ अल्लाह के इल्म में है और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है। यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आख़िरत के दिन को झुठलाते हैं और अपने आपको आज़ाद समझते हैं, यह सोचते हुए कि उनके कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा। अल्लाह फ़रमाते हैं कि हमने हर चीज़ को लिख लिया है, और क़यामत के दिन हर इंसान को उसका पूरा नामा-ए-आमाल दिया जाएगा।

यह आयत हमें यह यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। हमारी हर साँस, हर नज़र, हर बात, हर अमल—सब कुछ अल्लाह के पास दर्ज है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नेमत भी है, क्योंकि इसका मतलब है कि हमारा कोई भी अच्छा काम, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह के पास गुम नहीं होगा। हर नेकी का बदला हमें मिलेगा। और साथ ही, यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है कि हम बुरे कामों से बचें, क्योंकि हर बुराई भी दर्ज की जा रही है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें बताया कि उनका न्याय पूर्ण है। कोई चीज़ उनकी नज़र से छिपी नहीं है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधारें, अच्छे काम करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हमें अपने रब के सामने पेश होना है। यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ बुलाती है—कि आज हमारे पास मौक़ा है, आज हम तौबा कर सकते हैं, आज हम अपने अमल दुरुस्त कर सकते हैं। कल जब हिसाब होगा, तो कोई मौक़ा नहीं मिलेगा।

याद रखिए, अल्लाह ने हर चीज़ को किताब में दर्ज कर दिया है, और यह किताब उस दिन हमारे सामने पेश की जाएगी। जो लोग दुनिया में नेकी करेंगे, उनके लिए ख़ुशख़बरी है, और जो लोग बुराई में डूबे रहे, उनके लिए अफ़सोस। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अन-नबा

27إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا
बेशक ये लोग आख़ेरत के हिसाब की उम्मीद ही न रखते थे
28وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا
और इन लोगो हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया
29وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا
और हमने हर चीज़ को लिख कर मनज़बत कर रखा है
30فَذُوقُوا فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
तो अब तुम मज़ा चखो हमतो तुम पर अज़ाब ही बढ़ाते जाएँगे
31إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
बेशक परहेज़गारों के लिए बड़ी कामयाबी है
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अनुवाद — अन-नबा 29

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सूरा आयत 29/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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