अन-नाज़ियात · 28/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا ۝٢٨
Raf`a sam kaha fasaw waaha
📖 हिंदी अर्थ
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَمْكَهَا: आकाश की ऊँचाई, उसका उच्च स्तर।
  • فَسَوَّاهَا: उसे समतल और सुव्यवस्थित किया, बिना किसी दरार या दोष के।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और कुदरत का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि उसने आकाश को ऊँचा उठाया और उसकी बुनियाद को मज़बूत किया। "स्मक" से मुराद आकाश की वह ऊँचाई है जो हमारे सिरों के ऊपर फैली हुई है। अल्लाह ने इस विशाल आकाश को बिना किसी स्तंभ के ऊपर उठाया और उसे इस तरह समतल और सुव्यवस्थित किया कि उसमें कोई दरार, कोई शिगाफ़, कोई कमी या कोई दोष नहीं है। यह आकाश अपनी पूरी सुंदरता और व्यवस्था के साथ खड़ा है, जो अल्लाह की कुदरत का अद्भुत नमूना है।

यह आयत उस संदर्भ में आई है जब अल्लाह तआला क़यामत के दिन पुनर्जीवित करने की बात कर रहा है। वह फ़रमाता है: "क्या तुम्हारा दोबारा उठाया जाना अधिक कठिन है या आकाश का निर्माण?" यानी जिस अल्लाह ने इतने विशाल और ऊँचे आकाश को बिना किसी सहारे के खड़ा किया, उसके लिए तुम्हें दोबारा ज़िंदा करना कौन सी मुश्किल बात है? वह तो जब चाहता है, कहता है "हो जा" और वह हो जाता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की कुदरत के सामने कुछ भी असंभव नहीं है। जिसने इस अद्भुत आकाश को बनाया और उसे इस तरह सजाया कि उसमें कोई दोष नहीं, वह निश्चित रूप से मृतकों को दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूर्ण सामर्थ्य रखता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करें और उसकी ओर लौटें। जो अल्लाह इतनी बड़ी रचना को संभाल कर रखा है, वह हमारी छोटी-छोटी दुआओं को भी सुनता है और हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने पर कादिर है।

इस आयत की रौशनी में हमें अपने रब की अज़मत को पहचानना चाहिए और उसके सामने अपने सिर झुकाने चाहिए। यह आकाश जो हमारे ऊपर छाया हुआ है, अल्लाह की रहमत और कुदरत की एक ज़िंदा निशानी है। जब हम आसमान की तरफ देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब कुछ उसी अल्लाह की बनाई हुई चीज़ है, जो हमें प्यार करता है और हमारी हर अच्छाई का बदला देने वाला है।



📜 आयत 26-30 — सूरा अन-नाज़ियात

26إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है
27أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
28رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
29وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
30وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
अन-नाज़ियातकुरान सूची
46आयत
मक्कीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 28

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Thursday, October 1, 2026

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