Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صَاحِبُكُم (तुम्हारा साथी): इससे अल्लाह के रसूल मुहम्मद ﷺ की ओर इशारा है, जो क़ुरैश क़बीले के लोगों के बीच पैदा हुए और उन्हीं के साथ रहे।
- بِمَجْنُونٍ (दीवाना/पागल): यह वह आरोप था जो मक्का के मुशरिकीन नबी ﷺ पर लगाते थे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ की पाकीज़गी और सच्चाई को बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि ऐ मक्का वालो! तुम्हारा यह साथी (मुहम्मद ﷺ) जो तुम्हारे बीच पैदा हुआ, तुम्हारे साथ रहा, और जिसकी सच्चाई, अमानतदारी और समझदारी को तुम ख़ूब जानते हो—वह हरगिज़ दीवाना नहीं है। तुम उस पर यह आरोप लगाकर झूठ बोलते हो और बहुत बड़ी बदतमीज़ी करते हो।
यह वही नबी हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारे बीच सच्चाई और अमानत के साथ गुज़ारी, और तुम उन्हें "अमीन" (भरोसेमंद) कहते थे। फिर जब वह तुम्हें सच्चे दीन की ओर बुलाने लगे, तो तुमने उन पर झूठा इल्ज़ाम लगाना शुरू कर दिया। अल्लाह तआला इस आयत में उनकी बराअत (पाकीज़गी) का ऐलान कर रहे हैं।
यह आयत उस समय के माहौल में नाज़िल हुई जब मक्का के काफ़िर नबी ﷺ को पागल, काहिन (ज्योतिषी) और शायर कहकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है। तुम्हारा यह साथी तो अल्लाह का रसूल है, जिस पर फ़रिश्ता जिब्रील अमीन वही लेकर उतरते हैं।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें अपने नबी ﷺ पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए और उनकी सच्चाई को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिस तरह मक्का वाले नबी ﷺ की सच्चाई को जानते हुए भी उन्हें झुठलाते थे, हमें चाहिए कि हम उनकी सीरत (ज़िंदगी) का अध्ययन करें, उनके अख़लाक़ (आदर्श चरित्र) को अपनाएँ और उनके बताए रास्ते पर चलें। यही हमारी कामयाबी है।
अल्लाह तआला ने इस आयत में नबी ﷺ की निस्बत से हमें बताया कि सच्चाई और अमानतदारी ही असल कसौटी है। जो शख्स सच्चा और अमानतदार हो, उस पर झूठे इल्ज़ाम लगाना बहुत बड़ा गुनाह है। हमें भी चाहिए कि हम किसी पर बगैर सबूत के इल्ज़ाम न लगाएँ और हमेशा सच्चाई का साथ दें।
📜 आयत 20-24 — सूरा अत-तकवीर
अनुवाद — अत-तकवीर 22
सूरा अत-तकवीर आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मक्के वालों) तुम्हारे साथी मोहम्मद दीवाने नहीं हैंसूरा आयत 22/29 — सूरा अत-तकवीर التكوير (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तकवीर सुनें, सूरा अत-तकवीर अनुवाद, सूरा अत-तकवीर mp3, सूरा अत-तकवीर pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अत-तकवीर
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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