अत-तकवीर · 23/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तकवीर
وَلَقَدْ رَآهُ بِالْأُفُقِ الْمُبِينِ ۝٢٣
Wa laqad ra aahu bilufuqil mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक उन्होनें जिबरील को (आसमान के) खुले (शरक़ी) किनारे पर देखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَآهُ: उसने उसे देखा (अर्थात् नबी ﷺ ने जिब्रील को देखा)
  • بِالْأُفُقِ الْمُبِينِ: स्पष्ट (खुले) क्षितिज पर — अर्थात् आकाश के उस किनारे पर जो बिल्कुल साफ़ और प्रत्यक्ष हो

तफ़सीर:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ की तस्दीक़ और उनके सम्मान की बयान कर रहे हैं। इससे पहले की आयतों में अल्लाह ने फ़रमाया कि तुम्हारा साथी (मुहम्मद ﷺ) कोई दीवाना नहीं है। अब इस आयत में बताया जा रहा है कि उन्होंने सचमुच जिब्रील अमीन को उनके असली रूप में देखा था, जो उनके पास अल्लाह का पैग़ाम लेकर आते हैं।

नबी ﷺ ने जिब्रील को उनकी मूल रचना के अनुसार, उनके पूरे रूप में, आकाश के स्पष्ट क्षितिज पर देखा — यानी पूर्व दिशा में जहाँ सूरज निकलता है, उस ऊँचे और खुले आसमानी किनारे पर। यह दृश्य उन्होंने दो बार देखा — एक बार मक्का में और एक बार मेराज की रात को। यह उनकी नुबुव्वत की सबसे बड़ी गवाही है कि उन्होंने फ़रिश्ते को अपनी असली सूरत में देखा, और यह कोई ख़्वाब या वहम नहीं था, बल्कि हक़ीक़त में हुआ।

यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ की रिसालत बिल्कुल सच्ची है, और वह जो कुछ लेकर आए हैं वह अल्लाह की तरफ़ से है। जिस तरह उन्होंने जिब्रील को स्पष्ट रूप से देखा, उसी तरह उन्होंने जो वही पहुँचाई वह भी बिल्कुल साफ़ और सच्ची है। इसमें कोई धोखा, कोई मिलावट और कोई कमी नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे दिलों में नबी ﷺ की मुहब्बत और उनकी सच्चाई पर यक़ीन को मज़बूत करती है। जब हमें पता चलता है कि नबी ﷺ ने खुद जिब्रील को देखा और उनसे वही हासिल की, तो हमारा ईमान और पुख़्ता हो जाता है। यह हमें बताती है कि क़ुरआन कोई इंसानी किताब नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है जो जिब्रील के ज़रिये नबी ﷺ तक पहुँचा। इसलिए हमें इस पर पूरा भरोसा करना चाहिए और इस पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को रोशन करनी चाहिए। जिस रसूल ने अपनी आँखों से फ़रिश्ते को देखा और अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया, उस पर ईमान लाना और उसकी पैरवी करना ही हमारी कामयाबी है।



📜 आयत 21-25 — सूरा अत-तकवीर

21مُّطَاعٍ ثَمَّ أَمِينٍ
वहाँ (सब फरिश्तों का) सरदार अमानतदार है
22وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجْنُونٍ
और (मक्के वालों) तुम्हारे साथी मोहम्मद दीवाने नहीं हैं
23وَلَقَدْ رَآهُ بِالْأُفُقِ الْمُبِينِ
और बेशक उन्होनें जिबरील को (आसमान के) खुले (शरक़ी) किनारे पर देखा है
24وَمَا هُوَ عَلَى الْغَيْبِ بِضَنِينٍ
और वह ग़ैब की बातों के ज़ाहिर करने में बख़ील नहीं
25وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और न यह मरदूद शैतान का क़ौल है
अत-तकवीरकुरान सूची
29आयत
मक्कीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — अत-तकवीर 23

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Saturday, October 3, 2026

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