Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيُضِلَّ: गुमराह करने के लिए (यहाँ अर्थ है: गुमराही का फैसला सुनाना या उन्हें गुमराही में छोड़ देना)
- هَدَاهُمْ: उन्हें हिदायत दी, मार्गदर्शन किया
- يُبَيِّنَ: स्पष्ट कर दे, खोलकर बता दे
- مَا يَتَّقُونَ: जिससे उन्हें बचना है (हराम चीज़ें, जिनसे परहेज़ करना आवश्यक है)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और न्यायकारी है। वह किसी ऐसे समुदाय को गुमराही का फैसला नहीं सुनाता, जिसे उसने पहले हिदायत और ईमान की तौफ़ीक़ दी हो, जब तक कि वह उन्हें स्पष्ट रूप से न बता दे कि उन्हें किन चीज़ों से बचना है और किन आदेशों का पालन करना है। यानी अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह पहले अपने रसूलों और किताबों के माध्यम से हलाल-हराम, अच्छे-बुरे और ईमान-कुफ्र के मामलों को पूरी तरह स्पष्ट करता है, उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करता है, और उसके बाद ही जो लोग जानबूझकर उस स्पष्ट मार्गदर्शन को ठुकरा देते हैं, वे गुमराही के हक़दार बनते हैं। यह अल्लाह का पूर्ण न्याय है कि वह बिना बयान और चेतावनी के किसी को सज़ा नहीं देता। अल्लाह हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है — वह जानता है कि किसे हिदायत देनी है, किसे गुमराही में छोड़ना है, और उसने अपने बंदों को वह सब कुछ सिखाया जो वे नहीं जानते थे, ताकि उनके पास कोई बहाना न रह जाए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह तआला अत्यंत न्यायकारी है — वह किसी को बिना स्पष्टीकरण और चेतावनी के सज़ा नहीं देता। यह उसकी रहमत और इंसाफ़ की निशानी है।
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह ने क़ुरआन और सुन्नत के माध्यम से हमें हर ज़रूरी बात स्पष्ट कर दी है, इसलिए हमारे पास कोई बहाना नहीं है कि हमें पता नहीं था।
- अल्लाह का ज्ञान असीमित है — वह हमारे अंदर के इरादों, हमारे अतीत और भविष्य को जानता है। इसलिए हमें अपने अमल में ईमानदारी अपनानी चाहिए।
- यह आयत हमें अल्लाह के दीन को सीखने और समझने की तरग़ीब देती है — जितना अधिक हम दीन को समझेंगे, उतना ही अधिक हम गुमराही से बच सकेंगे।
- अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें अज्ञानता में नहीं छोड़ा, बल्कि अपनी किताब और रसूल के ज़रिए हमें सीधा रास्ता दिखाया — यह उसकी सबसे बड़ी नेमत है, जिसका शुक्र अदा करना चाहिए।
📜 आयत 113-117 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 115
सूरा अत-तौबा आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब…सूरा आयत 115/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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