Wa maa kaanal laahu liyudilla qawmam ba`da iz hadaahum hatta yubaiyina lahum maa yattaqoon; innal laaha bikulli shai`in `Aleem
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब उनकी हिदायत कर चुका हो उसके बाद बेशक ख़ुदा उन्हें गुमराह कर दे हत्ता (यहां तक) कि वह उन्हीं चीज़ों को बता दे जिससे वह परहेज़ करें बेशक ख़ुदा हर चीज़ से (वाक़िफ है)
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اور خدا ایسا نہیں کہ کسی قوم کو ہدایت دینے کے بعد گمراہ کر دے جب تک کہ ان کو وہ چیز نہ بتا دے جس سے وہ پرہیز کریں۔ بےشک خدا ہر چیز سے واقف ہے
ख़ुदा की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब उनकी हिदायत कर चुका हो उसके बाद बेशक ख़ुदा उन्हें गुमराह कर दे हत्ता (यहां तक) कि वह उन्हीं चीज़ों को बता दे जिससे वह परहेज़ करें बेशक ख़ुदा हर चीज़ से (वाक़िफ है)
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
لِيُضِلَّ: गुमराह करने के लिए (यहाँ अर्थ है: गुमराही का फैसला सुनाना या उन्हें गुमराही में छोड़ देना)
هَدَاهُمْ: उन्हें हिदायत दी, मार्गदर्शन किया
يُبَيِّنَ: स्पष्ट कर दे, खोलकर बता दे
مَا يَتَّقُونَ: जिससे उन्हें बचना है (हराम चीज़ें, जिनसे परहेज़ करना आवश्यक है)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और न्यायकारी है। वह किसी ऐसे समुदाय को गुमराही का फैसला नहीं सुनाता, जिसे उसने पहले हिदायत और ईमान की तौफ़ीक़ दी हो, जब तक कि वह उन्हें स्पष्ट रूप से न बता दे कि उन्हें किन चीज़ों से बचना है और किन आदेशों का पालन करना है। यानी अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह पहले अपने रसूलों और किताबों के माध्यम से हलाल-हराम, अच्छे-बुरे और ईमान-कुफ्र के मामलों को पूरी तरह स्पष्ट करता है, उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करता है, और उसके बाद ही जो लोग जानबूझकर उस स्पष्ट मार्गदर्शन को ठुकरा देते हैं, वे गुमराही के हक़दार बनते हैं। यह अल्लाह का पूर्ण न्याय है कि वह बिना बयान और चेतावनी के किसी को सज़ा नहीं देता। अल्लाह हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है — वह जानता है कि किसे हिदायत देनी है, किसे गुमराही में छोड़ना है, और उसने अपने बंदों को वह सब कुछ सिखाया जो वे नहीं जानते थे, ताकि उनके पास कोई बहाना न रह जाए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह तआला अत्यंत न्यायकारी है — वह किसी को बिना स्पष्टीकरण और चेतावनी के सज़ा नहीं देता। यह उसकी रहमत और इंसाफ़ की निशानी है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह ने क़ुरआन और सुन्नत के माध्यम से हमें हर ज़रूरी बात स्पष्ट कर दी है, इसलिए हमारे पास कोई बहाना नहीं है कि हमें पता नहीं था।
अल्लाह का ज्ञान असीमित है — वह हमारे अंदर के इरादों, हमारे अतीत और भविष्य को जानता है। इसलिए हमें अपने अमल में ईमानदारी अपनानी चाहिए।
यह आयत हमें अल्लाह के दीन को सीखने और समझने की तरग़ीब देती है — जितना अधिक हम दीन को समझेंगे, उतना ही अधिक हम गुमराही से बच सकेंगे।
अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें अज्ञानता में नहीं छोड़ा, बल्कि अपनी किताब और रसूल के ज़रिए हमें सीधा रास्ता दिखाया — यह उसकी सबसे बड़ी नेमत है, जिसका शुक्र अदा करना चाहिए।
नबी और मोमिनीन पर जब ज़ाहिर हो चुका कि मुशरेकीन जहन्नुमी है तो उसके बाद मुनासिब नहीं कि उनके लिए मग़फिरत की दुआएं माँगें अगरचे वह मुशरेकीन उनके क़राबतदार हो (क्यों न) हो
और इबराहीम का अपने बाप के लिए मग़फिरत की दुआ माँगना सिर्फ इस वायदे की वजह से था जो उन्होंने अपने बाप से कर लिया था फिर जब उनको मालूम हो गया कि वह यक़ीनी ख़ुदा का दुश्मन है तो उससे बेज़ार हो गए, बेशक इबराहीम यक़ीनन बड़े दर्दमन्द बुर्दबार (सहन करने वाले) थे
ख़ुदा की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब उनकी हिदायत कर चुका हो उसके बाद बेशक ख़ुदा उन्हें गुमराह कर दे हत्ता (यहां तक) कि वह उन्हीं चीज़ों को बता दे जिससे वह परहेज़ करें बेशक ख़ुदा हर चीज़ से (वाक़िफ है)
इसमें तो शक़ ही नहीं कि सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ुदा ही के लिए ख़ास है वही (जिसे चाहे) जिलाता है और (जिसे चाहे) मारता है और तुम लोगों का ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त है न मददगार
अलबत्ता ख़ुदा ने नबी और उन मुहाजिरीन अन्सार पर बड़ा फज़ल किया जिन्होंने तंगदस्ती के वक्त रसूल का साथ दिया और वह भी उसके बाद कि क़रीब था कि उनमे ंसे कुछ लोगों के दिल जगमगा जाएँ फिर ख़ुदा ने उन पर (भी) फज़ल किया इसमें शक़ नहीं कि वह उन लोगों पर पड़ा तरस खाने वाला मेहरबान है
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