Innamas sabeelu `alal lazeena yastaazinoonaka wa hum aghniyaaa`; radoo biany-yakoonoo ma`al khawaalifi wa taba`al laahu `alaa quloobihim fahum laa ya`lamoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
الزام تو ان لوگوں پر ہے۔ جو دولت مند ہیں اور (پھر) تم سے اجازت طلب کرتے ہیں (یعنی) اس بات سے خوش ہیں کہ عورتوں کے ساتھ جو پیچھے رہ جاتی ہیں (گھروں میں بیٹھ) رہیں۔ خدا نے ان کے دلوں پر مہر کردی ہے پس وہ سمجھتے ہی نہیں
السَّبِيلُ: मार्ग, यहाँ अर्थ है दोष, पकड़ और आज़ाब का रास्ता।
الْخَوَالِفِ: पीछे रह जाने वाले (स्त्रियाँ, बच्चे और वे लोग जिनके पास कोई उज़्र हो)।
طَبَعَ اللَّهُ: अल्लाह ने मुहर लगा दी (अर्थात दिल बंद कर दिए)।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों का ज़िक्र किया है जो जिहाद से पीछे रहने की इजाज़त माँगते थे, जबकि वे मालदार और ताक़तवर थे। उनके पास सामान और सवारी का पूरा इंतज़ाम था, फिर भी वे जिहाद में शामिल नहीं हुए। अल्लाह फ़रमाता है कि दोष और पकड़ का मार्ग केवल उन्हीं पर है जो तुम्हारे पास आकर इजाज़त माँगते हैं, हालाँकि वे अमीर हैं और जिहाद की तैयारी उनके लिए मुमकिन थी। उन्होंने अपने लिए यही पसंद किया कि पीछे रह जाने वालों (स्त्रियों, बच्चों और माज़ूर लोगों) के साथ घरों में बैठे रहें। उन्होंने अपनी इज़्ज़त और बुज़ुर्गी को छोड़कर ज़िल्लत और बेइज़्ज़ती को चुना। अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी, यानी उनके दिल सच्चाई और नेकी को क़बूल करने से बंद हो गए। नतीजतन, वे न तो अपने किए की बुराई समझते हैं और न ही उस अंजाम को जानते हैं जो उनके इस काम से दुनिया और आख़िरत में उन पर आएगा। वे नहीं जानते कि उनकी भलाई किस चीज़ में है (जिहाद में) और बुराई किस चीज़ में है (पीछे रहने में)।
फ़ायदे:
इस आयत से पता चलता है कि जो लोग ताक़त और सामर्थ्य रखते हुए भी दीन के कामों से जी चुराते हैं, वही अल्लाह की नाराज़गी और पकड़ के हक़दार हैं।
मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ताक़त और माल को अल्लाह के दीन की ख़िदमत में लगाए, न कि आराम और सुख-चैन की ज़िंदगी बिताने में।
जब इंसान बुराई पर अड़ जाता है और नेकी की तरफ़दारी नहीं करता, तो उसका दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाता है और वह सच्चाई को समझने की क़ाबिलियत खो देता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के कामों में पीछे रहना और आराम पसंदी अपनाना मुनाफ़िक़ों की आदत है, जबकि मोमिन की शान यह है कि वह हर हाल में अल्लाह के दीन की मदद के लिए आगे बढ़े।
अल्लाह की पकड़ और अज़ाब से बचने का सबसे बड़ा ज़रिया यह है कि इंसान अपने दिल को नेकी और तक़वा पर क़ायम रखे और अल्लाह के हुक्मों के आगे सर झुकाए।
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
(ऐ रसूल जिहाद में न जाने का) न तो कमज़ोरों पर कुछ गुनाह है न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो कुछ नहीं पाते कि ख़र्च करें बशर्ते कि ये लोग ख़ुदा और उसके रसूल की ख़ैर ख्वाही करें नेकी करने वालों पर (इल्ज़ाम की) कोई सबील नहीं और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
और न उन्हीं लोगों पर कोई इल्ज़ाम है जो तुम्हारे पास आए कि तुम उनके लिए सवारी बाहम पहुँचा दो और तुमने कहा कि मेरे पास (तो कोई सवारी) मौजूद नहीं कि तुमको उस पर सवार करूँ तो वह लोग (मजबूरन) फिर गए और हसरत (व अफसोस) उसे उस ग़म में कि उन को ख़र्च मयस्सर न आया
उनकी ऑंखों से ऑंसू जारी थे (इल्ज़ाम की) सबील तो सिर्फ उन्हीं लोगों पर है जिन्होंने बावजूद मालदार होने के तुमसे (जिहाद में) न जाने की इजाज़त चाही और उनके पीछे रह जाने वाले (औरतों, बच्चों) के साथ रहना पसन्द आया और ख़ुदा ने उनके दिलों पर (गोया) मोहर कर दी है तो ये लोग कुछ नहीं जानते
जब तुम उनके पास (जिहाद से लौट कर) वापस आओगे तो ये (मुनाफिक़ीन) तुमसे (तरह तरह) की माअज़रत करेंगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बातें न बनाओ हम हरग़िज़ तुम्हारी बात न मानेंगे (क्योंकि) हमे तो ख़ुदा ने तुम्हारे हालात से आगाह कर दिया है अनक़ीरब ख़ुदा और उसका रसूल तुम्हारी कारस्तानी को मुलाहज़ा फरमाएगें फिर तुम ज़ाहिर व बातिन के जानने वालों (ख़ुदा) की हुज़ूरी में लौटा दिए जाओगे तो जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे (ज़र्रा ज़र्रा) बता देगा
जब तुम उनके पास (जिहाद से) वापस आओगे तो तुम्हारे सामने ख़ुदा की क़समें खाएगें ताकि तुम उनसे दरगुज़र करो तो तुम उनकी तरफ से मुँह फेर लो बेशक ये लोग नापाक हैं और उनका ठिकाना जहन्नुम है (ये) सज़ा है उसकी जो ये (दुनिया में) किया करते थे
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